{"_id":"69ff73f741571aa94e0dcf22","slug":"drinking-water-supply-halved-requirement-stands-at-68-million-liters-receiving-only-35-million-liters-narnol-news-c-203-1-sroh1010-126343-2026-05-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahendragarh-Narnaul News: पेयजल की सप्लाई आधी, जरूरत 68 लाख लीटर और मिल रहा सिर्फ 35 लाख लीटर पानी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahendragarh-Narnaul News: पेयजल की सप्लाई आधी, जरूरत 68 लाख लीटर और मिल रहा सिर्फ 35 लाख लीटर पानी
विज्ञापन
फोटो संख्या:68- देवास जलघर के टैंक नंबर में दो में पानी--संवाद
महेंद्रगढ़। 50 हजार की आबादी वाले शहर को प्रतिदिन लगभग 68 लाख लीटर पानी की आवश्यकता है लेकिन जन स्वास्थ्य विभाग की ओर से महज 35 लाख लीटर पानी की ही आपूर्ति हो पा रही है। पेयजल संकट लगातार गहराता जा रहा है और विभाग पानी की राशनिंग करने को मजबूर है।
शहर के कई वार्डों में निर्धारित समय पर पानी आपूर्ति नहीं होने से भी लोग परेशान हैं। वहीं वार्ड नौ, दस व 11 में गंदे पानी की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि पेयजल की कमी के कारण घरेलू कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पिछले कई दिनों से तीन वार्डों के नलों में बदबूदार और मटमैला पानी आ रहा है।
लोगों को मजबूरी में पानी खरीदना पड़ रहा है। कई स्थानों पर पानी आने का इंतजार करना पड़ता है लेकिन पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पाता। शहर की पेयजल व्यवस्था मुख्य रूप से नहरी पानी आधारित देवास जल परियोजना पर निर्भर है। परियोजना के तीनों जल टैंक फिलहाल लबालब भरे हुए हैं लेकिन विभाग की चिंता वर्तमान से ज्यादा भविष्य को लेकर है।
विज्ञापन
नहरी पानी की अगली आपूर्ति मिलने में अभी करीब 25 दिन का समय बाकी है। ऐसे में उपलब्ध पानी का संतुलित उपयोग करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
विभाग ने फिलहाल जलापूर्ति में कटौती कर पानी बचाने की रणनीति अपनाई है। शहर में पुरानी पाइपलाइनें भी बड़ी समस्या बनी हुई हैं। कई स्थानों पर सीवरेज लाइन और पेयजल पाइपलाइन एक-दूसरे के पास होने के कारण लीकेज की स्थिति में गंदा पानी सप्लाई में मिल जाता है।
-- -- -- -- -- --
विभाग के पास बचता है 15 करोड़ लीटर पानी
गांव देवास स्थित 25 एकड़ में बनी जल परियोजना पर 24 करोड़ लीटर क्षमता के चार टैंक बने हुए हैं। आठ करोड़ लीटर क्षमता वाले टैंकर का निर्माण अंतिम चरण में चल रहा है। लोगों को 30 दिन नियमित आपूर्ति के लिए विभाग को करीब 20 करोड़ लीटर पानी की आवश्यकता होती है लेकिन 24 करोड़ क्षमता वाले टैंकों में से करीब छह करोड़ लीटर पानी वाष्पीकरण हो जाता है। कुछ टैंकों में मिट्टी व गाद जमी होने से क्षमता प्रभावित होती है। ऐसे में विभाग के पास 15 करोड़ लीटर पानी उपलब्ध रहता है। नहरी पानी आने में देरी को ध्यान में रखते हुए आपूर्ति भी राशनिंग के आधार पर की जाती है।
-- -- -- -- -- -- -
वार्ड नंबर-11 में पिछले दो सप्ताह से मटमैला पानी आ रहा है। यह पानी पीने के अलावा अन्य उपयोग के लायक भी नहीं है। विभाग के अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है लेकिन समाधान नहीं हो सकता है।
-दीपक जांगिड़, मोहल्ला बास
-- -- -- -- -- -- -
गर्मी में विभाग को नियमित आपूर्ति करनी चाहिए लेकिन यहां नियमित तो क्या समय तक निर्धारित नहीं है। गर्मी में जब पानी की अधिक जरूरत होती है तो महज दो दिन में एक बार ही पानी मिल रहा है।
-दीपक कुमार, मोहल्ला सैनीपुरा
-- -- -- -- -- -- --
वर्जन
गर्मी में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। शहरवासियों को पेयजल आपूर्ति की जा रही है लेकिन नहरी पानी आने में अगर देरी होती है तो परेशानी हो सकती है। कुछ वार्डों से पेयजल में गंदा पानी की शिकायत मिली थी। टीम भेजकर लाइनों की जांच कराई जा रही है। जल्द ही इस समस्या का समाधान किया जाएगा।
-सुरेंद्र यादव, कनिष्ठ अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग महेंद्रगढ़
विज्ञापन
शहर के कई वार्डों में निर्धारित समय पर पानी आपूर्ति नहीं होने से भी लोग परेशान हैं। वहीं वार्ड नौ, दस व 11 में गंदे पानी की शिकायतें भी लगातार सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि पेयजल की कमी के कारण घरेलू कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पिछले कई दिनों से तीन वार्डों के नलों में बदबूदार और मटमैला पानी आ रहा है।
विज्ञापन
लोगों को मजबूरी में पानी खरीदना पड़ रहा है। कई स्थानों पर पानी आने का इंतजार करना पड़ता है लेकिन पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिल पाता। शहर की पेयजल व्यवस्था मुख्य रूप से नहरी पानी आधारित देवास जल परियोजना पर निर्भर है। परियोजना के तीनों जल टैंक फिलहाल लबालब भरे हुए हैं लेकिन विभाग की चिंता वर्तमान से ज्यादा भविष्य को लेकर है।
विज्ञापन
नहरी पानी की अगली आपूर्ति मिलने में अभी करीब 25 दिन का समय बाकी है। ऐसे में उपलब्ध पानी का संतुलित उपयोग करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
विभाग ने फिलहाल जलापूर्ति में कटौती कर पानी बचाने की रणनीति अपनाई है। शहर में पुरानी पाइपलाइनें भी बड़ी समस्या बनी हुई हैं। कई स्थानों पर सीवरेज लाइन और पेयजल पाइपलाइन एक-दूसरे के पास होने के कारण लीकेज की स्थिति में गंदा पानी सप्लाई में मिल जाता है।
विभाग के पास बचता है 15 करोड़ लीटर पानी
गांव देवास स्थित 25 एकड़ में बनी जल परियोजना पर 24 करोड़ लीटर क्षमता के चार टैंक बने हुए हैं। आठ करोड़ लीटर क्षमता वाले टैंकर का निर्माण अंतिम चरण में चल रहा है। लोगों को 30 दिन नियमित आपूर्ति के लिए विभाग को करीब 20 करोड़ लीटर पानी की आवश्यकता होती है लेकिन 24 करोड़ क्षमता वाले टैंकों में से करीब छह करोड़ लीटर पानी वाष्पीकरण हो जाता है। कुछ टैंकों में मिट्टी व गाद जमी होने से क्षमता प्रभावित होती है। ऐसे में विभाग के पास 15 करोड़ लीटर पानी उपलब्ध रहता है। नहरी पानी आने में देरी को ध्यान में रखते हुए आपूर्ति भी राशनिंग के आधार पर की जाती है।
वार्ड नंबर-11 में पिछले दो सप्ताह से मटमैला पानी आ रहा है। यह पानी पीने के अलावा अन्य उपयोग के लायक भी नहीं है। विभाग के अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया जा चुका है लेकिन समाधान नहीं हो सकता है।
-दीपक जांगिड़, मोहल्ला बास
गर्मी में विभाग को नियमित आपूर्ति करनी चाहिए लेकिन यहां नियमित तो क्या समय तक निर्धारित नहीं है। गर्मी में जब पानी की अधिक जरूरत होती है तो महज दो दिन में एक बार ही पानी मिल रहा है।
-दीपक कुमार, मोहल्ला सैनीपुरा
वर्जन
गर्मी में पानी की मांग लगातार बढ़ रही है। शहरवासियों को पेयजल आपूर्ति की जा रही है लेकिन नहरी पानी आने में अगर देरी होती है तो परेशानी हो सकती है। कुछ वार्डों से पेयजल में गंदा पानी की शिकायत मिली थी। टीम भेजकर लाइनों की जांच कराई जा रही है। जल्द ही इस समस्या का समाधान किया जाएगा।
-सुरेंद्र यादव, कनिष्ठ अभियंता, जन स्वास्थ्य विभाग महेंद्रगढ़

फोटो संख्या:68- देवास जलघर के टैंक नंबर में दो में पानी--संवाद

फोटो संख्या:68- देवास जलघर के टैंक नंबर में दो में पानी--संवाद

फोटो संख्या:68- देवास जलघर के टैंक नंबर में दो में पानी--संवाद