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डीडीपीओ की टीम लेगी सड़क के सैंपल
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sun, 10 Jul 2016 12:24 AM IST
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कनीना। उपायुक्त ने कनीना से अटेली तक करीब 26 किलोमीटर के सड़क निर्माण में घटिया निर्माण सामग्री इस्तेमाल करने की शिकायतों पर जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने डीडीपीओ कुलदीप सिंह को सैंपल लेने के लिए नियुक्त किया है। डीडीपीओ कनीना-अटेली मार्ग पर पहुंच कर सड़क के नमूने लेंग। जिनको श्रीराम लैब दिल्ली में जांच कराने के लिए भेजेंगे। उपायुक्त की इस कार्रवाई पर क्षेत्र की जनता ने राहत की सांस ली है। वहीं सड़क निर्माण में घटिया सामग्री लगने पर विरोध के स्वर बुलंद होते देख ठेकेदार कारिदों के हाथ फूल गए हैं।
विदित रहे कि कनीना-अटेली मार्ग को 5 मीटर से 7 मीटर चौड़ा कर निर्माण करने का ठेका लोक निर्माण विभाग की ओर से गावड़ कंस्ट्रेक्शन कंपनी को छोड़ा गया। बीती 15 मार्च से काम शुरू करने को लेकर छोड़े गए इस ठेके के बाद 9 अप्रैल को कंपनी की ओर से सड़क को उखाड़ने का कार्य शुरू किया गया। कंपनी की ओर से 3 माह में करीब छह किलोमीटर सड़क बनाई गई है। बनाई जा रही इस सड़क को लेकर निर्माण सामग्री घटिया इस्तेमाल करने के आरोप लगने लगे हैं। एक जागरूक नागरिक महेश कुमार ने तो लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से बनाए जा रहे रोड में कितना मैटेरियल लगाया जाता है, तारकोल सहित उसकी लंबाई चौड़ाई मोटाई आदि का ब्योरा मांगा है। जिसका अभी तक कोई जवाब नहीं मिल सका है।
सत्यवीर सिंह, महेश कुमार, शेरसिंह, सुशील कुमार, पवन कुमार ने बताया कि रेलवे फाटक के समीप से बनाए जा रहे रोड़ पर ठंडा तारकोल नहीं डाला गया जबकि गर्म तारकोल का फंवारा हल्की लेयर में मारा गया जो वाहनों के आवागमन से टायरों को चिपक कर उठ गया। रात्रि के समय तारकोल की जगह पानी से गिला कर सड़क निर्माण की गई। जिससे रोडिय़ां छिटकने लगी हैं। तारकोल की मात्रा न के बराबर रह गई। बिना तारकोल के डाली जा रही रोड़ियों की पकड़ नहीं होने से सड़क के जल्द टूटने की संभावना बनी रही है।
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2265.33 लाख रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे इस एमडीआर रोड नंबर 2549 को लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। जिसके निर्माण कार्य पूरा करने की समय सीमा 18 माह है। रोड़ को तैयार कर विभाग को सुपुर्द करने की तिथि 14 सितंबर 2017 है। इस अवधि में रोड़ को तैयार करने के लिए गावड़ कंपनी के लोग लगे हुए हैं। 90 एमएमए की लेयर डाल दी गई है, जबकि 42 एमएम की लेयर रोड बनने के करीब 4 माह बाद डाली जाएगी। लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन ने बताया कि नियमानुसार सड़क का निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग के जेई की मौजूदगी में होना चाहिए लेकिन जेई के मौके पर नहीं रहने के चलते ठेकेदार कारिदों द्वारा मर्जी के मुताबिक सड़क निर्माण कार्य किया जा रहा है जो चिंता का विषय है।
इस बारे में महेश कुमार ने लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन से 17 जून 2016 को विधिवत पत्र भेजकर आरटीआई एक्ट के तहत सूचना मांगी गई। जिसकी अभी तक कोई सुनवाई नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि नियमों को ताक पर रखकर रोड़ का निर्माण कार्य किया जा रहा है। जिसकी सूचना अभी तक नहीं मिल सकी है।
इस बारे में गावड़ कंस्ट्रेक्शन कंपनी के साइट प्रबंधक अजय शर्मा ने बताया कि कनीना-अटेली रोड़ को 18 से 23 फुट चौड़ा किया जा रहा है। जिसके निर्माण से पूर्व ठंडा तारकोल लगाया जाता है। उसके 12 घंटे बाद गर्म तारकोल के साथ रोडिय़ां बिछाई जाती हैं। 42 एमएम की जीरो रोड़ी की लेयर बाद में बिछाई जाएगी। उन्होंने बताया कि सड़क निर्माण के 5 साल बाद तक सड़क टूटती है तो उसके रिपेयर का काम कंपनी का रहेगा।
लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन एमएस सांगवान ने बताया कि ठेकेदार जेई की उपस्थिति के बिना सड़क निर्माण नहीं कर सकता। उन्होंने गुणवत्ता को ताक पर रखकर काम करने वाले ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है।
उपायुक्त संजीव वर्मा ने कहा कि कनीना- अटेली रोड़ केे निर्माण में घटिया निर्माण सामग्री प्रयोग करने की शिकायतें मिल रही थी। जिसके नमूने एकत्रित करने के लिए डीडीपीओ कुलदीप ङ्क्षसह को नियुक्त किया गया है। सड़क निर्माण में प्रयुक्त मेटिरियल के नमूने श्रीराम लैब दिल्ली में जांच के लिए भेजने की सिफारिश की है। जन भावनाओं की कद्र की जाएगी। निर्माण में किसी भी प्रकार की अनियमितताएं नहीं बरतने दी जाएंगी।
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विदित रहे कि कनीना-अटेली मार्ग को 5 मीटर से 7 मीटर चौड़ा कर निर्माण करने का ठेका लोक निर्माण विभाग की ओर से गावड़ कंस्ट्रेक्शन कंपनी को छोड़ा गया। बीती 15 मार्च से काम शुरू करने को लेकर छोड़े गए इस ठेके के बाद 9 अप्रैल को कंपनी की ओर से सड़क को उखाड़ने का कार्य शुरू किया गया। कंपनी की ओर से 3 माह में करीब छह किलोमीटर सड़क बनाई गई है। बनाई जा रही इस सड़क को लेकर निर्माण सामग्री घटिया इस्तेमाल करने के आरोप लगने लगे हैं। एक जागरूक नागरिक महेश कुमार ने तो लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से बनाए जा रहे रोड में कितना मैटेरियल लगाया जाता है, तारकोल सहित उसकी लंबाई चौड़ाई मोटाई आदि का ब्योरा मांगा है। जिसका अभी तक कोई जवाब नहीं मिल सका है।
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सत्यवीर सिंह, महेश कुमार, शेरसिंह, सुशील कुमार, पवन कुमार ने बताया कि रेलवे फाटक के समीप से बनाए जा रहे रोड़ पर ठंडा तारकोल नहीं डाला गया जबकि गर्म तारकोल का फंवारा हल्की लेयर में मारा गया जो वाहनों के आवागमन से टायरों को चिपक कर उठ गया। रात्रि के समय तारकोल की जगह पानी से गिला कर सड़क निर्माण की गई। जिससे रोडिय़ां छिटकने लगी हैं। तारकोल की मात्रा न के बराबर रह गई। बिना तारकोल के डाली जा रही रोड़ियों की पकड़ नहीं होने से सड़क के जल्द टूटने की संभावना बनी रही है।
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2265.33 लाख रुपये की लागत से तैयार किए जा रहे इस एमडीआर रोड नंबर 2549 को लेकर लोगों में तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। जिसके निर्माण कार्य पूरा करने की समय सीमा 18 माह है। रोड़ को तैयार कर विभाग को सुपुर्द करने की तिथि 14 सितंबर 2017 है। इस अवधि में रोड़ को तैयार करने के लिए गावड़ कंपनी के लोग लगे हुए हैं। 90 एमएमए की लेयर डाल दी गई है, जबकि 42 एमएम की लेयर रोड बनने के करीब 4 माह बाद डाली जाएगी। लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन ने बताया कि नियमानुसार सड़क का निर्माण कार्य लोक निर्माण विभाग के जेई की मौजूदगी में होना चाहिए लेकिन जेई के मौके पर नहीं रहने के चलते ठेकेदार कारिदों द्वारा मर्जी के मुताबिक सड़क निर्माण कार्य किया जा रहा है जो चिंता का विषय है।
इस बारे में महेश कुमार ने लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन से 17 जून 2016 को विधिवत पत्र भेजकर आरटीआई एक्ट के तहत सूचना मांगी गई। जिसकी अभी तक कोई सुनवाई नहीं हो सकी है। उन्होंने कहा कि नियमों को ताक पर रखकर रोड़ का निर्माण कार्य किया जा रहा है। जिसकी सूचना अभी तक नहीं मिल सकी है।
इस बारे में गावड़ कंस्ट्रेक्शन कंपनी के साइट प्रबंधक अजय शर्मा ने बताया कि कनीना-अटेली रोड़ को 18 से 23 फुट चौड़ा किया जा रहा है। जिसके निर्माण से पूर्व ठंडा तारकोल लगाया जाता है। उसके 12 घंटे बाद गर्म तारकोल के साथ रोडिय़ां बिछाई जाती हैं। 42 एमएम की जीरो रोड़ी की लेयर बाद में बिछाई जाएगी। उन्होंने बताया कि सड़क निर्माण के 5 साल बाद तक सड़क टूटती है तो उसके रिपेयर का काम कंपनी का रहेगा।
लोक निर्माण विभाग के एक्सईएन एमएस सांगवान ने बताया कि ठेकेदार जेई की उपस्थिति के बिना सड़क निर्माण नहीं कर सकता। उन्होंने गुणवत्ता को ताक पर रखकर काम करने वाले ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही है।
उपायुक्त संजीव वर्मा ने कहा कि कनीना- अटेली रोड़ केे निर्माण में घटिया निर्माण सामग्री प्रयोग करने की शिकायतें मिल रही थी। जिसके नमूने एकत्रित करने के लिए डीडीपीओ कुलदीप ङ्क्षसह को नियुक्त किया गया है। सड़क निर्माण में प्रयुक्त मेटिरियल के नमूने श्रीराम लैब दिल्ली में जांच के लिए भेजने की सिफारिश की है। जन भावनाओं की कद्र की जाएगी। निर्माण में किसी भी प्रकार की अनियमितताएं नहीं बरतने दी जाएंगी।