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संस्कृत और संस्कारों से ही संस्कृति सुरक्षित रहेगी : आचार्य
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फोटो नंबर-04श्रावणी उपाकर्म के दौरान जलक्रिया करते विप्रजन। संवाद
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नारनौल। आचार्य क्रांति निर्मल ने कहा कि संस्कृत और संस्कारों से ही संस्कृति सुरक्षित रहेगी। संस्कृत दिवस भी इसी अवसर पर मनाया जाता है। आने वाली पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने और सनातन परंपराओं को आगे बढ़ाने के लिए ऐसे आयोजन जरूरी हैं।
यह बात उन्होंने नसीबपुर स्थित जेठूबाबा मंदिर में शुक्रवार को श्रावणी उपाकर्म में कही। गौड़ ब्राह्मण सभा, नूनीवाल ब्राह्मण सभा और शारदा संस्कृत महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विप्रजनों ने भाग लिया। इस दौरान महाविद्यालय के 11 नए ब्रह्मचारियों को यज्ञोपवीत धारण कराया गया।
कार्यक्रम आचार्य देवदत्त शास्त्री के सान्निध्य में हुआ जबकि आचार्य क्रांति निर्मल ने वेद मंत्रों के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करवाए। शुरुआत में विप्रजनों ने जेठूबाबा जलाशय में खड़े होकर जलक्रिया की। मंत्रोच्चारण के बीच विभिन्न नदियों का आह्वान कर ऋषि तर्पण और पितृ तर्पण किया गया। इसके बाद मंदिर में सप्त ऋषियों का पूजन कर हवन-यज्ञ में आहुतियां दी गईं।
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आचार्य निर्मल ने कहा कि श्रावणी उपाकर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऋषि परंपरा, संस्कार और संस्कृति से जुड़ने का अवसर है। इस दौरान मनु, वशिष्ठ सहित सप्त ऋषियों का पूजन कर आत्मशुद्धि का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में 10 वर्ष से लेकर 80 वर्ष तक की आयु के लोगों ने भाग लिया। गौड़ सभा के प्रधान राकेश मेहता, सचिव कृष्ण कुमार शर्मा, सह सचिव हेमंत शर्मा सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे। नूनीवाल ब्राह्मण सभा के प्रधान बद्री प्रसाद, मदन लाल शास्त्री, राजेश बोहरा शास्त्री सहित बड़ी संख्या में विप्रजन उपस्थित रहे।
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यह बात उन्होंने नसीबपुर स्थित जेठूबाबा मंदिर में शुक्रवार को श्रावणी उपाकर्म में कही। गौड़ ब्राह्मण सभा, नूनीवाल ब्राह्मण सभा और शारदा संस्कृत महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विप्रजनों ने भाग लिया। इस दौरान महाविद्यालय के 11 नए ब्रह्मचारियों को यज्ञोपवीत धारण कराया गया।
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कार्यक्रम आचार्य देवदत्त शास्त्री के सान्निध्य में हुआ जबकि आचार्य क्रांति निर्मल ने वेद मंत्रों के साथ धार्मिक अनुष्ठान संपन्न करवाए। शुरुआत में विप्रजनों ने जेठूबाबा जलाशय में खड़े होकर जलक्रिया की। मंत्रोच्चारण के बीच विभिन्न नदियों का आह्वान कर ऋषि तर्पण और पितृ तर्पण किया गया। इसके बाद मंदिर में सप्त ऋषियों का पूजन कर हवन-यज्ञ में आहुतियां दी गईं।
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आचार्य निर्मल ने कहा कि श्रावणी उपाकर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ऋषि परंपरा, संस्कार और संस्कृति से जुड़ने का अवसर है। इस दौरान मनु, वशिष्ठ सहित सप्त ऋषियों का पूजन कर आत्मशुद्धि का संकल्प लिया गया।
कार्यक्रम में 10 वर्ष से लेकर 80 वर्ष तक की आयु के लोगों ने भाग लिया। गौड़ सभा के प्रधान राकेश मेहता, सचिव कृष्ण कुमार शर्मा, सह सचिव हेमंत शर्मा सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे। नूनीवाल ब्राह्मण सभा के प्रधान बद्री प्रसाद, मदन लाल शास्त्री, राजेश बोहरा शास्त्री सहित बड़ी संख्या में विप्रजन उपस्थित रहे।