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हरियाणा पुलिस में भर्ती के नाम पर ठगी का मामला: मुख्य आरोपी नरेश नेवी और आईटीबीपी में भी कर चुका नौकरी

Thu, 11 May 2023 01:27 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौल (हरियाणा)
संवाद न्यूज एजेंसी, नारनौल (हरियाणा) Published by: भूपेंद्र सिंह Updated Thu, 11 May 2023 01:27 AM IST
सार

इससे पहले नेवी, एयरफोर्स में रुपये लेकर बच्चे  भर्ती करवाए थे, कई सीटर भी पुलिस ने गिरफ्तार किए। नरेश ने आरोपी जितेंद्र उर्फ जीतू निवासी चिंडालिया के साथ मिलकर शेखावटी डिफेंस एकेडमी सिंघाना में खोली थी। 

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Fraud case on the name of recruitment in Haryana Police: Main accused Naresh has also worked in Navy and ITBP
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

हरियाणा पुलिस में भर्ती करवाने के नाम पर रुपये ठगने के मामले में पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। आरोपियों ने पहले जानकारों को फंसाया और उसके बाद आगे अन्य लोगों को नौकरी लगवाने का झांसा दिया। मुख्य आरोपी नरेश निवासी सीगड़ा वर्ष 2008 में नेवी में सिपाही लगा था, लेकिन पांच दिन में ही नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद वर्ष 2012 में आईटीबीपी में बतौर हेड कांस्टेबल लगा। वर्ष 2013 में नौकरी छोड़ दी थी। इसके बाद आरोपी ने वर्ष 2018 तक निजी स्कूलों में पढ़ाया।

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नरेश ने आरोपी जितेंद्र उर्फ जीतू निवासी चिंडालिया के साथ मिलकर शेखावटी डिफेंस एकेडमी सिंघाना में खोली थी। इसमें रेलवे में भर्ती करवाने के लिए हुए पैसे वापस न करने पर विवाद हो गया था। इसके बाद मुख्य आरोपी नरेश ने यूएसए डिफेंस एकेडमी पचेरी (राजस्थान) में खोली थी।
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पूछताछ में पुलिस ने पता लगाया कि आरोपी अन्य के साथ मिलकर पेपर लीक/हैक करवाकर सेटिंग करके बच्चों के परिजनों से रुपये लेकर भर्ती करवाते थे। इससे पहले भी नेवी, एयरफोर्स आदि में रुपये लेकर बच्चे भर्ती करवाए थे। आरोपी भर्ती देखने वाले बच्चों के एडमिट कार्ड में सीटरों के फोटो की मिक्सिंग व एडिटिंग का काम करते थे। हर आरोपी का काम बंटा हुआ था।
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पुलिस अधीक्षक विक्रांत भूषण ने बताया कि पुलिस ने सूरजनवास निवासी विनोद, संजय और ब्रह्मदत्त को गिरफ्तार किया। इनमें आरोपी विनोद ने उसके गांव के बच्चों के भर्ती होने के नाम पर पैसे दिलवाए थे। आरोपी संजय, नरेश के साथ मिलकर भर्ती में दूसरे की जगह पेपर देने बैठना था।

इसके अलावा आरोपी बलवान निवासी नया गांव थाना पचेरी नरेश की एकेडमी की देखरेख करता था। इसके अलावा आरोपी अवधेश निवासी जासावास की महेंद्रगढ़ में फोटोस्टेट की दुकान है, जोकि भर्ती देखने वाले बच्चों के एडमिट कार्ड में एडिटिंग करता था।

जितेंद्र उर्फ जीतू, जोकि नरेश के साथ मिलकर फर्जी तरीके से सरकारी भर्तियों में लगवाने का काम करता था। प्रवीण निवासी भालोठ थाना पचेरी ने नरेश से 3-4 बच्चों को भर्ती करवाने की बात की थी। आरोपी राजेश निवासी खांदवा थाना पचेरी नौकरी लगने वाले बच्चों को नरेश से मिलवाता था और अपना कमीशन लेता था।

मनोज निवासी भगड़ाना ने मामले में संलिप्त आरोपी को भगाने में मदद की थी। आरोपी नरवीर निवासी ढाणी बायांवाली नांगल चौधरी और राजबीर निवासी भिटेड़ा थाना बहरोड़ ने यूएसए डिफेंस एकेडमी में कोचिंग के लिए दाखिला लिया था, लेकिन बाद में नरेश के साथ मिलकर काम करने लगे थे।

योगेश निवासी गोदा का बास रघुवीरपुरा थाना सूरजगढ़ कमीशन लेकर भर्ती होने वाले बच्चों को नरेश से मिलवाता था। अजय व अमित निवासी खानपुरा थाना सामोद हाल आबाद निवारण रोड झोटवाड़ा और सुरेश निवासी गुजरवास थाना सिंघाना ने जयपुर में कैम्ब्रिज इन्फोटेक के नाम से लैब खोली हुई थी, जिनसे भर्ती के समय पेपर हैक करवाने और भर्ती के रुपयों में कमीशन देने की बात होती थी। आरोपी सुरेश पेपर देने के लिए बुलाए गए सीटरों को दिल्ली से गाड़ी में बैठाकर लाता था।

आरोपी दीपक फॉर्म और आधार कार्ड में करता था एडिटिंग
इसके अलावा बलवान निवासी मकड़ोली कलां थाना सदर रोहतक, प्रेमचंद निवासी खोरड़ा हाल वार्ड नंबर 16 रोहतक चौक चरखी दादरी गुरुकुल एकेडमी चरखी दादरी में बच्चों की आर्मी के फिजिकल के लिए तैयारी करवाता था। उक्त ड्यूटी वालों से सेटिंग करते थे। अनिल भास्कर निवासी नारायणपुर सुतिहार जिला छपरा अन्य के साथ मिलकर पैसे लेकर बच्चों को सरकारी विभागों में नौकर लगवाने का कार्य करता था। सरिता निवासी भैणी चंद्रपाल थाना महम हाल आबाद शास्त्री नगर रोहतक ने दीक्षा डिफेंस एकेडमी रोहतक में खोल रखी है और आरोपी नरेश, अनिल भास्कर व प्रेमचंद भर्ती करवाने के सिलसिले से उनकी एकेडमी पर आते रहते थे। इनकी कृष्ण लैब पर ऑनलाइन भर्ती के पेपर होते थे। आरोपी दीपक निवासी बडराई थाना झोझू कलां पुलिस की भर्ती के समय बच्चों के फॉर्म और आधार कार्ड में एडिटिंग करता था।

बिहार का राकेश पेपर में दूसरे के स्थान पर बैठता था
जगदीश निवासी तालु भिवानी भर्ती के लिए बाहर से आए हुए सीटर को रेलवे स्टेशन से लाता था और भर्ती सेंटर पर छोड़कर आता था। पुलिस ने एक सीटर को भी गिरफ्तार किया, जो पेपर में दूसरे के स्थान पर बैठता था और बदले में पैसे लेता था, जिसकी पहचान राकेश उर्फ पटेल निवासी पांची शेखपुर बिहार के रूप में हुई। आरोपी रेलवे में टेक्नीशियन के पद पर लगा हुआ है।
संदीप और हरविंद्र बच्चों को फर्जी तरीके से सरकारी विभागों में लगवाते थे नौकरी

इसके अलावा आरोपी प्रदीप वासी भीलवाड़ा अटेली जोकि कमीशन लेकर पुलिस भर्ती में फिंगर प्रिंट बदलने का कार्य करता था, लेकिन आरोपी फिंगर प्रिंट चेंज नहीं कर सके। आरोपी गोपाल निवासी आरा थाना नवादा जिला भोजपुर को सीटर उपलब्ध करवाने का कार्य करता थे। संदीप निवासी जसौर खेड़ी थाना सदर बहादुरगढ़ और हरविंद्र उर्फ हैप्पी निवासी कबूलपुर, रोहतक बच्चों को फर्जी तरीके से सरकारी विभागों में नौकरी लगवाते थे। सीमा निवासी शास्त्री नगर रोहतक एकेडमी के अकाउंट का काम देखती थी और भर्ती के लिए आए हुए रुपयों को वेस्टीज व क्रिप्टो करेंसी आदि में लगाती थी।

भर्ती के नाम प्रत्येक बच्चे से 12-15 लाख रुपये लेते थे आरोपी
पुलिस अधीक्षक विक्रांत भूषण ने बताया कि आरोपियों द्वारा एकेडमी में गारंटी से भर्ती करवाने के नाम से बैच चलाया जाता था। इस बैच के लिए अलग से पैसे निर्धारित किए गए थे। एकेडमी संचालक प्रत्येक बच्चे से 12-15 लाख रुपये 2-3 किस्तों में लेते थे। इस बैच में दाखिला लेने वाले बच्चों के परिजनों को भर्ती करवाने का पूर्ण आश्वासन दिया जाता था। एकेडमी संचालक पेपर हैकर और पेपर करवाने वाली कंपनी से संपर्क रखता था, जोकि पेपर हैक करके और पेपर में सीटर बैठाकर फर्जी पेपर करवाते थे। पेपर हैकिंग के नाम पर प्रत्येक बच्चे के 2-3 लाख रुपये के हिसाब से सेटिंग करते थे। हैकर द्वारा पेपर करवाने वाली कंपनी से सेटिंग करके पेपर के समय से पहले लैब से एक वायर अलग से डाल दिया जाता था और लैब के साथ लगते स्थान पर ले जाकर अपना सेटअप लगाकर पेपर हैक करके बच्चों के पेपर करवाते थे। पेपर करवाने वाली कंपनी से तालमेल कर लैब में अपने वर्कर की पेपर के समय ड्यूटी लगवाते थे और बच्चों के पेपर करवाते थे।
परीक्षा में अभ्यर्थी की जगह बैठाते थे फर्जी सीटर

एकेडमी संचालक बच्चों के अभिभावक से उनके बच्चे को भर्ती करवाने के पैसे लेकर हैकर से संपर्क कर फर्जी सीटर को बैठाकर पेपर करवाते थे। आरोपी नरेश द्वारा अन्य साथी एकेडमी संचालक अनिल भास्कर, राजेश सांगवान व अन्य की मदद से सीटर उपलब्ध किए गए। सीटर उपलब्ध होने पर सीटर की योग्यता का पेपर लेकर उनको पेपर में बैठने के पैसे दिए गए और असल अभ्यर्थी व सीटर की फोटो को एडिट करवाकर सीटर को बैठाकर पेपर दिलवाए गए।

पेपर के बाद फिंगर प्रिंट चेंज करवाने की सेटिंग राजेश मेघपुर से की गई, लेकिन फिंगर प्रिंट चेंज नहीं हो सके। पेपर पास होने पर बच्चों का फिजिकल टेस्ट करवाया गया। फिजिकल टेस्ट असल अभ्यर्थी द्वारा किया गया। इस दौरान दोबारा फिंगर प्रिंट लिए गए थे। इस भर्ती में बच्चों के फिजिकल टेस्ट व शारीरिक मापदंड के लिए अलग-अलग तारीख दी गई थी, लेकिन इस बात का एकेडमी संचालकों को पता नहीं था। असल अभ्यर्थी द्वारा फिजिकल टेस्ट में पास होने पर शारीरिक मापदंड व कागजात सत्यापन के लिए दी गई तारीख पर एकेडमी संचालकों ने बच्चों को उपस्थित नहीं होने दिया, क्योंकि बच्चो के फिंगर प्रिंट बदलने का काम नहीं हो पाया था।


जिला पुलिस ने फर्जी तरीके से सरकारी विभागों में भर्ती करवाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। इसमें विभिन्न राज्यों के कुल 32 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें कई एकेडमी संचालक भी शामिल हैं। मामले की जांच लगातार जारी है। इसमें शामिल अन्य आरोपियों की भी धरपकड़ जारी है। - विक्रांत भूषण, पुलिस अधीक्षक नारनौल

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