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तीसरी लहर आई तो नकारा साबित हो सकता है नागरिक अस्पताल

Thu, 03 Jun 2021 11:52 PM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Thu, 03 Jun 2021 11:52 PM IST
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civil hospital will prove to be negative
महेंद्रगढ़। अगर कोरोना की तीसरी लहर आई तो यह स्वास्थ्य विभाग को लिए चुनौती साबित हो सकती है। हम ऐसा इसलिए कह रहे हैं कि स्वास्थ्य विभाग सेवाओं का विस्तार करने की बजाय उसे समेट रहा है। 100 बेड का दर्जा प्राप्त अस्पताल में मरीजों का उपचार करने के लिए जगह नहीं है।
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बता दें कि लोगों की सुविधा के लिए नागरिक अस्पताल को अस्थायी तौर पर पुराने महिला कॉलेज में ट्रांसफर किया जाना था लेकिन सिविल सर्जन अशोक कुमार ने वीरवार को निरीक्षण कर अस्पताल को ट्रांसफर किए जाने से मना कर दिया है। सिविल सर्जन ने कहा कि महिला कॉलेज को ठीक करवाने में काफी पैसा खर्च होगा।
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इस समय नागरिक अस्पताल में पुराने भवन को तोड़कर नया भवन बनाने का काम चल रहा है। अस्पताल में जगह की कमी से काफी दिक्कतें आ रही हैं। अस्पताल प्रशासन की ओर से उपायुक्त को पुराने महिला अस्पताल में ट्रांसफर करने के लिए अनुमति मांगी गई थी। इसकी एक कॉपी सिविल सर्जन के पास भी भेजी गई थी। वीरवार को सिविल सर्जन अशोक कुमार ने आकर निरीक्षण किया। अस्पताल में उन्होंने चिकित्सकों के केबिन तथा तीन चार खाली क्वार्टर चेक किए। इसके बाद सिविल सर्जन ने पुराने महिला कॉलेज को चेक किया जिसके लिए उन्होंने स्पष्ट मना कर दिया। जबकि पुराने एक क्वार्टर में मात्र दो से तीन बेड से अधिक नहीं डाले जा सकते। सिविल सर्जन उन क्वार्टरों के सहारे अस्पताल को चलाना चाह रहे हैं जो कि असंभव सा लगता है। जैसी की आशंका जताई जा रही है कि तीसरी लहर आएगी। अगर ऐसा हुआ तो मरीजों को दाखिल करने की जगह तक नहीं मिलेगी।
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अस्पताल की पुराने भवन को तोड़ने का कार्य चल रहा है। केवल इमरजेंसी भवन में ही पूरा अस्पताल चलाया जा रहा है। इस भवन में मात्र 24 बेड बिछाए गए हैं। जिनमें 17 लेबर रूम में तथा 7 इमरजेंसी वार्ड में हैं। सामान्य ओपीडी में अगर मरीजों को दाखिल करना हो तो अस्पताल प्रशासन के पास बेड बिछाने की जगह नहीं है।
चिकित्सकों के लिए नहीं बैठने की जगह:
वर्तमान में अधिकतर चिकित्सकों की ड्यूटी कोविड में लगी है। इस वजह से ओपीडी बंद है। सुबह आठ से तीन फ्लू ओपीडी चलती है। कोविड से पहले अस्पताल में आठ चिकित्सक ओपीडी करते थे। ओपीडी शुरू होने पर सभी चिकित्सकों के लिए बैठने की जगह नहीं हैं। ओपीडी के लिए भवन तोड़ने से पहले गैलरी में चार छोटे-छोटे केबिन बनाए गए थे। उनमें एक में फार्मासिस्ट, एक दंत चिकित्सक तथा दो केबिन में मात्र दो ही चिकित्सक बैठ सकते हैं। अभी लेडी डॉक्टर को दूसरी मंजिल पर लेबर रूम के साथ बने केबिन में बैठना पड़ रहा है। गर्भवती महिलाओं को दिखाने के लिए सीढ़ियों पर चढ़कर जाना पड़ता है। बावजूद इसके तीन चिकित्सकों के लिए बैठने की जगह नहीं है।
कोविड में हो गए थे हालात खराब:
कोरोना काल में नागरिक अस्पताल मेें हालात खराब हो गए थे। जगह नहीं होने की वजह से पुराने भवन को कोविड सेंटर बनाया गया था। बेड की कमी के चलते कोविड मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में भी रखा गया था। ऐसे में इमरजेंसी में सड़क हादसे या बाइक आदि पर चोटिल हो जाने या फिर अन्य किसी बीमारी से आए मरीजों को दाखिल करने की जगह नहीं थी। माइनर ओटी में ही कोरोना मरीज तथा वहीं घायल को रखकर इलाज किया जाता था।
कहां चलाया जाएगा ऑपरेशन थियेटर:
दो से तीन महीने पहले पुराने भवन से इमरजेंसी भवन में सामान शिफ्ट किया गया था। इस समय ऑपरेशन थियेटर को इमरजेंसी वार्ड के पास बनाया गया है। कोविड सेंटर बनाए जाने के बाद इसको आईसीयू वार्ड बना दिया गया और वेंटिलेटर लगा दिए गए हैं। ऐसे में पत्थरी, हर्निया, रसौली, पेट, फैमिली प्लानिंग आदि के ऑपरेशन कहां किए जाएंगे? ऑपरेशन थियेटर नहीं शुरू हुआ तो गरीब एवं मध्यम वर्ग को निजी अस्पतालों में उक्त ऑपरेशन के लिए जाना पड़ेगा। जो कि गरीब लोगों के लिए आर्थिक रूप से काफी परेशानी वाला होगा।

पुराने महिला कॉलेज का चेक किया है। यह भवन शुरू करने की हालत में नहीं है। इसको शुरू करने में काफी बजट की जरूरत पड़ेगी। इससे पहले भी अस्पताल में ही बहुत खर्चा लगा चुके हैं। इसलिए वर्तमान वाली जगह पर ही अस्पताल चलाया जाएगा।
-अशोक कुमार, सिविल सर्जन।
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