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कोरा कागज होता है बाल्यावस्था: विपिन कुमार
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नारनौल। आजादी के अमृत महोत्सव के तहत जिला बाल कल्याण परिषद की ओर से मंगलवार को राजकीय कन्या महाविद्यालय नारनौल में बच्चों को नैतिक मूल्यों व नशा मुक्ति जागरूकता पर शिविर का आयोजन किया गया।
इस मौके पर नैतिक मूल्यों की शिक्षा के राज्य नोडल अधिकारी विपिन कुमार शर्मा ने कहा कि हर घर में जैसा परिवेश होता है, उसी प्रकार के विचार एवं संस्कार बाल जीवन में परिवर्तित होते हैं। वास्तव में बाल अवस्था कोरे कागज की तरह होती है। जब बच्चा छोटा होता है, तभी से उसमे अच्छे संस्कार रूपी पौधा रोपा जाना संभव होता है, जिसे समय के साथ और अधिक पुष्पित व पल्लवित किया जा सकता है। ऐसे में प्रत्येक परिवार के हर एक सदस्य का दायित्व होता है कि बच्चों में भौतिक संसाधनों के साथ-साथ अच्छी शिक्षा और संस्कार देने का लक्ष्य तय करें। उन्होंने बताया कि आज के युवा जिस तनाव, अवसाद और अनुशासनहीनता के गिरफ्त में हैं उसका मूल कारण परिवारों में संस्कारों का अभाव ही है। ऐसे में यदि आरंभ से बच्चों को सुसंस्कार दिए जाएं तो वे न केवल अपना जीवन सुधारेंगे, बल्कि परिवार के अलावा आमजन का भी सम्मान करेंगे। कभी भूल कर भी बच्चों के सामने माता-पिता को अपनी तकरार, लड़ाई-झगड़े की बात प्रकट नहीं होने देनी चाहिए। लड़ाई-झगड़े, क्लेश, अशांति से बच्चों के कोमल मानस पर आघात पहुंचता है। प्राचार्य यशपाल शर्मा ने भी अपने विचार रखते हुए बच्चों से कहा कि वे सभी प्रकार की बुराईयों से दूर रहें। खासकर मोबाइल का प्रयोग करते समय ध्यान रखें तथा अच्छी बातों व सिर्फ शिक्षा से संबंधित चीजें ही मोबाइल पर देखें।
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इस मौके पर नैतिक मूल्यों की शिक्षा के राज्य नोडल अधिकारी विपिन कुमार शर्मा ने कहा कि हर घर में जैसा परिवेश होता है, उसी प्रकार के विचार एवं संस्कार बाल जीवन में परिवर्तित होते हैं। वास्तव में बाल अवस्था कोरे कागज की तरह होती है। जब बच्चा छोटा होता है, तभी से उसमे अच्छे संस्कार रूपी पौधा रोपा जाना संभव होता है, जिसे समय के साथ और अधिक पुष्पित व पल्लवित किया जा सकता है। ऐसे में प्रत्येक परिवार के हर एक सदस्य का दायित्व होता है कि बच्चों में भौतिक संसाधनों के साथ-साथ अच्छी शिक्षा और संस्कार देने का लक्ष्य तय करें। उन्होंने बताया कि आज के युवा जिस तनाव, अवसाद और अनुशासनहीनता के गिरफ्त में हैं उसका मूल कारण परिवारों में संस्कारों का अभाव ही है। ऐसे में यदि आरंभ से बच्चों को सुसंस्कार दिए जाएं तो वे न केवल अपना जीवन सुधारेंगे, बल्कि परिवार के अलावा आमजन का भी सम्मान करेंगे। कभी भूल कर भी बच्चों के सामने माता-पिता को अपनी तकरार, लड़ाई-झगड़े की बात प्रकट नहीं होने देनी चाहिए। लड़ाई-झगड़े, क्लेश, अशांति से बच्चों के कोमल मानस पर आघात पहुंचता है। प्राचार्य यशपाल शर्मा ने भी अपने विचार रखते हुए बच्चों से कहा कि वे सभी प्रकार की बुराईयों से दूर रहें। खासकर मोबाइल का प्रयोग करते समय ध्यान रखें तथा अच्छी बातों व सिर्फ शिक्षा से संबंधित चीजें ही मोबाइल पर देखें।
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