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बाइपास पर दो से तीन फीट गहरे गड्डे वाहनों के लिए बने परेशानी का सबब
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अगर आप नारनौल शहर के आउटर पर बने बाईपास से जयपुर की ओर या महेंद्रगढ़ जाना चाहते हैं तो अपना इरादा बदल दीजिये क्योंकि इस बाईपास पर बने गड्ढे आपकी गाड़ी को नुकसान पहुंचा सकते हैं। ट्रक चालक बहुत मुश्किल से अपनी गाड़ियों को किसी तरह से बचाकर निकालते हैं मगर इसके बाद भी दुर्घटना होना आम बात हो गई है। छोटे वाहनों में आए दिन नुकसान हो रहा है। बरसात में तो इन गड्ढों का पता ही नहीं लगता जिससे ट्रक तक पलट जाते हैं। इन सबके बावजूद भी लोक निर्माण विभाग के अधिकारी चैन की नींद सो रहे हैं। पूछने पर बताते हैं कि दो बार एस्टीमेट भेजा जा चुका है मगर दोनों ही बार पैच वर्क का एस्टीमेट रिजेक्ट हो गया है।
वाहनों में नुकसान होना आम बात
वाहन चालकों का कहना है कि इस बाईपास पर इन गड्डों के कारण सबसे अधिक परेशानी हो रही है। कई बार अधिक लोड वाली गाड़ियों के तो हार्डवेयर टूट जाते हैं जिससे जाम भी लग जाता है और नुकसान होता है वह अलग। पूरे बाईपास पर लगभग तीन दर्जन ऐसे गड्डे बने हए हैं। छोटे वाहनों का निकलना तो बहुत मुश्किल है। कार का बंपर टूटना या नीचे से बैंड होना तो आम बात है। बाईपास के निकट रहने वाले लोगों का कहना है बार बार
पीडब्लयूडी के अधिकारी नहीं कर रहे सुनवाई
लोकनिर्माण विभाग के अधिकारियों से गुहार लगाई जा चुकी है कि इन गड्ढों में पेचवर्क ही करवा दिया जाए जिससे कुछ राहत मिल सके। बरसात के समय तो पानी भरने से इनका पता ही नहीं लगता ऐसे में ट्रक पलट जाते हैं। कुछ दिन पहले लकड़ियों से भरा ट्रक इसी कारण से पलट गया था। इसके अलावा दूसरी गाड़ियां भी दुर्घटनाग्रस्त होती रहती हैं। लोक निर्माण विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी यहीं गुजरते हैं। दूसरे अधिकारी भी जाते हैं मगर क्या मजाल किसी के कान पर जूं तक रेंगती हो।
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विभाग के अधिकारी कहते हैं दो बार एस्टीमेट भेजा जा चुका है। मगर पेचवर्क का एस्टीमेट रिजेक्ट हो जाता है। अब फिर से पूरे बाईपास की मरम्मत का एस्टीमेट भेजा है। उम्मीद है जल्द ही यह मंजूर हो जाएगा जिसके बाद काम शुरू हो सकेगा। अब हैैैरत इस बात की है कि जब तक एस्टीमेट मंजूर होगा तब तक वाहनों को इन गड्ढों से ही गुजरना होगा।
इस बारे में जेई धर्मबीर ने बताया कि दो एस्टीमेट बाईपास की मरम्मत के लिए भेजा गया है मगर दोनों ही बार रिजेक्ट कर दिया गया। अब पूरे मार्ग को दुरुस्त करने का भेजा गया है उम्मीद है जल्द ही मंजूर हो जाएगा। पैच वर्क का कार्य टैंपररी तौर पर करवाया जाएगा जिससे वाहनों को निकलने में परेशानी न हो।
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वाहनों में नुकसान होना आम बात
वाहन चालकों का कहना है कि इस बाईपास पर इन गड्डों के कारण सबसे अधिक परेशानी हो रही है। कई बार अधिक लोड वाली गाड़ियों के तो हार्डवेयर टूट जाते हैं जिससे जाम भी लग जाता है और नुकसान होता है वह अलग। पूरे बाईपास पर लगभग तीन दर्जन ऐसे गड्डे बने हए हैं। छोटे वाहनों का निकलना तो बहुत मुश्किल है। कार का बंपर टूटना या नीचे से बैंड होना तो आम बात है। बाईपास के निकट रहने वाले लोगों का कहना है बार बार
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पीडब्लयूडी के अधिकारी नहीं कर रहे सुनवाई
लोकनिर्माण विभाग के अधिकारियों से गुहार लगाई जा चुकी है कि इन गड्ढों में पेचवर्क ही करवा दिया जाए जिससे कुछ राहत मिल सके। बरसात के समय तो पानी भरने से इनका पता ही नहीं लगता ऐसे में ट्रक पलट जाते हैं। कुछ दिन पहले लकड़ियों से भरा ट्रक इसी कारण से पलट गया था। इसके अलावा दूसरी गाड़ियां भी दुर्घटनाग्रस्त होती रहती हैं। लोक निर्माण विभाग के अधिकारी व कर्मचारी भी यहीं गुजरते हैं। दूसरे अधिकारी भी जाते हैं मगर क्या मजाल किसी के कान पर जूं तक रेंगती हो।
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विभाग के अधिकारी कहते हैं दो बार एस्टीमेट भेजा जा चुका है। मगर पेचवर्क का एस्टीमेट रिजेक्ट हो जाता है। अब फिर से पूरे बाईपास की मरम्मत का एस्टीमेट भेजा है। उम्मीद है जल्द ही यह मंजूर हो जाएगा जिसके बाद काम शुरू हो सकेगा। अब हैैैरत इस बात की है कि जब तक एस्टीमेट मंजूर होगा तब तक वाहनों को इन गड्ढों से ही गुजरना होगा।
इस बारे में जेई धर्मबीर ने बताया कि दो एस्टीमेट बाईपास की मरम्मत के लिए भेजा गया है मगर दोनों ही बार रिजेक्ट कर दिया गया। अब पूरे मार्ग को दुरुस्त करने का भेजा गया है उम्मीद है जल्द ही मंजूर हो जाएगा। पैच वर्क का कार्य टैंपररी तौर पर करवाया जाएगा जिससे वाहनों को निकलने में परेशानी न हो।