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Mahendragarh-Narnaul News: बसपा ने ट्रैक्टर पंजीकरण शुल्क वृद्धि को बताया किसान विरोधी
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कनीना। बसपा ने ट्रैक्टर पंजीकरण नवीनीकरण शुल्क में भारी बढ़ोतरी को किसान विरोधी करार देते हुए वापस लेने की मांग की है। समाजसेवी अतरलाल एडवोकेट ने जिले के गांव भोजावास, गोमला, गोमली में किसानों से बातचीत की।
उन्होंने कहा कि बसपा को किसानों से यह शिकायत मिल रही है कि ट्रैक्टर पंजीकरण नवीनीकरण शुल्क को सरकार ने 1080 रुपये से बढ़ाकर 10485 रुपये कर दिया है जो करीब 10 गुना वृद्धि है। उन्होंने कहा कि इतना अधिक शुल्क किसानों की आर्थिक स्थिति पर बड़ा बोझ डाल देगा और कई किसान इसके कारण गंभीर संकट में आ जाएंगे।
सरकार पर किसान विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की कथनी और करनी में भारी अंतर है। सरकार बाजरा किसानों के साथ भी वादाखिलाफी कर रही है। बाजरे की खरीद बंद हुए 10 दिन से अधिक समय हो चुका है। लेकिन किसानों को अभी तक घोषित भावांतर राशि नहीं मिली है।
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उन्होंने बताया कि सरकार ने बाजरे का मंडी भाव 2200 रुपये प्रति क्विंटल मानकर 575 रुपये प्रति क्विंटल भावांतर राशि देने की घोषणा की थी। लेकिन सरकारी खरीद बंद कर किसानों को निजी खरीदारों के भरोसे छोड़ दिया गया, जहां किसानों को मजबूरी में करीब 400 रुपये प्रति क्विंटल कम कीमत पर बाजरा बेचना पड़ा।
ऐसे में किसानों को वास्तविक नुकसान की भरपाई के लिए सरकार को 975 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भावांतर राशि देनी चाहिए। अतरलाल एडवोकेट ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो बसपा जल्द ही महापंचायत आयोजित कर आंदोलन शुरू करेगी। इस मौके पर भाग सिंह चेयरमैन, पवन धनखड़, राकेश यादव, सोनू सिंह सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे।
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उन्होंने कहा कि बसपा को किसानों से यह शिकायत मिल रही है कि ट्रैक्टर पंजीकरण नवीनीकरण शुल्क को सरकार ने 1080 रुपये से बढ़ाकर 10485 रुपये कर दिया है जो करीब 10 गुना वृद्धि है। उन्होंने कहा कि इतना अधिक शुल्क किसानों की आर्थिक स्थिति पर बड़ा बोझ डाल देगा और कई किसान इसके कारण गंभीर संकट में आ जाएंगे।
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सरकार पर किसान विरोधी नीतियां अपनाने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की कथनी और करनी में भारी अंतर है। सरकार बाजरा किसानों के साथ भी वादाखिलाफी कर रही है। बाजरे की खरीद बंद हुए 10 दिन से अधिक समय हो चुका है। लेकिन किसानों को अभी तक घोषित भावांतर राशि नहीं मिली है।
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उन्होंने बताया कि सरकार ने बाजरे का मंडी भाव 2200 रुपये प्रति क्विंटल मानकर 575 रुपये प्रति क्विंटल भावांतर राशि देने की घोषणा की थी। लेकिन सरकारी खरीद बंद कर किसानों को निजी खरीदारों के भरोसे छोड़ दिया गया, जहां किसानों को मजबूरी में करीब 400 रुपये प्रति क्विंटल कम कीमत पर बाजरा बेचना पड़ा।
ऐसे में किसानों को वास्तविक नुकसान की भरपाई के लिए सरकार को 975 रुपये प्रति क्विंटल की दर से भावांतर राशि देनी चाहिए। अतरलाल एडवोकेट ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने किसानों की इन मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की तो बसपा जल्द ही महापंचायत आयोजित कर आंदोलन शुरू करेगी। इस मौके पर भाग सिंह चेयरमैन, पवन धनखड़, राकेश यादव, सोनू सिंह सहित अनेक पदाधिकारी मौजूद रहे।