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भुंगारका विवाद : विधायक पर सरपंच का पक्ष्ा लेने का आरोप, ध्ारने की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 23 May 2017 11:48 PM IST
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नारनाैल/नांगल चौधरी। भुंगारका में ठेके पर तोड़-फोड़ और आगजनी का मामला अब राजनीतिक रूप लेने लगा है। मामले में पूर्व सरपंच की गिरफ्तारी होने के बाद ग्रामीण आक्रोशित हैं तथा उन्होंने विधायक अभय सिंह पर मामले में राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि विधायक सरपंच का पक्ष ले रहे हैं, जो गांव के हित में नहीं है। इससे ग्रामीणों में उनके खिलाफ भी रोष बन रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस पूरी तरह से राजनीतिक दबाव में काम कर रही है। सरपंच के फर्जीवाड़ों को दबाने के मकसद से पूर्व सरपंच राजेंद्र प्रसाद को झूठे आरोपों में गिरफ्तार किया गया है।
सोमवार को ग्रामीण डीसी से मिलने के लिए लघु सचिवालय पहुंचे थे। डीसी नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने सीटीएम से मुलाकात की तथा उन्हें ज्ञापन भी सौंपा। ग्रामीणों ने कहा कि पूर्व सरपंच राजेंद्र का कार्यकाल मिसाल बना हुआ है। चुनाव जीतने के बाद उन्होंने आपसी मतभेदों को तव्वजो नहीं दी। सभी वार्डों में समान विकास कार्य करवाए। पांच साल के दौरान करीब 90 विवादों का निपटारा करवाया। 3-4 केस कोर्ट से विड्राल करवाकर पंचायत में फैसला किया। इतना ही नहीं दोषियों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया। करीब एक लाख जुर्माना राशि गौशाला में दान बतौर जमा करवाई गई थी।
गांव की शांति व्यवस्था कायम रखने के मकसद से उन्होंने 2012 में शराब का ठेका बंद करवाने संबंधित प्रस्ताव पारित किया। आबकारी एवं कराधान आयुक्त के कार्यालय में प्रस्ताव देकर भुंगारका में शराब बिक्री केंद्र बंद करवाया था, लेकिन वर्तमान सरपंच जगत सिंह ने गुपचुप प्रस्ताव देकर ठेका खुलवा दिया, जोकि ऊंटाली सड़क मार्ग पर संचालित है। इसी रास्ते से ढाणी खातियान की छात्राएं भुंगारका स्कूल में पढ़ने आती हैं। रास्ते में शरारती तत्वों ने छात्राओं के साथ अशोभनीय हरकतें शुरू कर दी। जिससे परेशान ग्रामीणों ने सेल्समैन से ठेका बंद करने की गुहार लगाई, लेकिन उन्होंने उल्टा ही ग्रामीणों को डांटना शुरू कर दिया। राजनीतिक धौंस दिखाकर परिणाम भुगतने का अल्टीमेटम दिया गया। विवाद बढ़ने पर आगजनी की घटना हुई। सेल्समैन ने पूर्व सरपंच राजेंद्र समेत 19 ग्रामीणों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज करवा दी। जबकि वारदात के दिन राजेंद्र गांव में मौजूद ही नहीं था।
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गुस्साए ग्रामीणों द्वारा जिला उपायुक्त व एसपी को ज्ञापन सौंपे थे। उन्होंने निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि हलका विधायक के दबाव में पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की है। जिससे ग्रामीणों में रोष बना हुआ है। ज्ञापन सौंपने वालों में महेश कुमार, सोनू शर्मा, रतिराम, कर्ण सिंह, हेतराम, शेर सिंह, सरजीत, धर्मपाल, राजेश, अरविंद कुमार, जितेंद्र पंच, पवन कुमार और विजय सिंह सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे।
फर्जीवाड़ा दबाने की कूटनीति
ग्रामीणों ने बताया कि सरपंच जगत सिंह ने पंचों के फर्जी हस्ताक्षरों से प्रस्ताव पारित कर शराब बिक्री केंद्र खुलवाया है। जिसकी भनक लगने पर पंचों ने इस्तीफे की अल्टीमेटम दिया था। ग्रामीण व पंचों को डराने के लिए पूर्व सरपंच राजेंद्र प्रसाद को उकसाने के झूठे मामले में फंसाया गया है। इस षड्यंत्र में राजनीतिक दबाव की भूमिका मुख्य रही है।
गांव के हित में संघर्ष जारी रहेगा
पूर्व सरपंच ने कहा कि कार्यकाल में करीब 50 धरने-प्रदर्शन किए हैं, लेकिन कभी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया। आगजनी के दिन गांव में मौजूद नहीं था। सरपंच के फर्जीवाड़ों को दबाने के लिए राजनीतिक षड्यंत्र रचा गया है। जिसके दबाव में पुलिस ने उकसाने के झूठे आरोप में गिरफ्तार कर लिया। गांव के हित में संघर्ष जारी रहेगा।
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सोमवार को ग्रामीण डीसी से मिलने के लिए लघु सचिवालय पहुंचे थे। डीसी नहीं मिलने पर ग्रामीणों ने सीटीएम से मुलाकात की तथा उन्हें ज्ञापन भी सौंपा। ग्रामीणों ने कहा कि पूर्व सरपंच राजेंद्र का कार्यकाल मिसाल बना हुआ है। चुनाव जीतने के बाद उन्होंने आपसी मतभेदों को तव्वजो नहीं दी। सभी वार्डों में समान विकास कार्य करवाए। पांच साल के दौरान करीब 90 विवादों का निपटारा करवाया। 3-4 केस कोर्ट से विड्राल करवाकर पंचायत में फैसला किया। इतना ही नहीं दोषियों पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया। करीब एक लाख जुर्माना राशि गौशाला में दान बतौर जमा करवाई गई थी।
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गांव की शांति व्यवस्था कायम रखने के मकसद से उन्होंने 2012 में शराब का ठेका बंद करवाने संबंधित प्रस्ताव पारित किया। आबकारी एवं कराधान आयुक्त के कार्यालय में प्रस्ताव देकर भुंगारका में शराब बिक्री केंद्र बंद करवाया था, लेकिन वर्तमान सरपंच जगत सिंह ने गुपचुप प्रस्ताव देकर ठेका खुलवा दिया, जोकि ऊंटाली सड़क मार्ग पर संचालित है। इसी रास्ते से ढाणी खातियान की छात्राएं भुंगारका स्कूल में पढ़ने आती हैं। रास्ते में शरारती तत्वों ने छात्राओं के साथ अशोभनीय हरकतें शुरू कर दी। जिससे परेशान ग्रामीणों ने सेल्समैन से ठेका बंद करने की गुहार लगाई, लेकिन उन्होंने उल्टा ही ग्रामीणों को डांटना शुरू कर दिया। राजनीतिक धौंस दिखाकर परिणाम भुगतने का अल्टीमेटम दिया गया। विवाद बढ़ने पर आगजनी की घटना हुई। सेल्समैन ने पूर्व सरपंच राजेंद्र समेत 19 ग्रामीणों के खिलाफ नामजद शिकायत दर्ज करवा दी। जबकि वारदात के दिन राजेंद्र गांव में मौजूद ही नहीं था।
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गुस्साए ग्रामीणों द्वारा जिला उपायुक्त व एसपी को ज्ञापन सौंपे थे। उन्होंने निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि हलका विधायक के दबाव में पुलिस ने एकतरफा कार्रवाई की है। जिससे ग्रामीणों में रोष बना हुआ है। ज्ञापन सौंपने वालों में महेश कुमार, सोनू शर्मा, रतिराम, कर्ण सिंह, हेतराम, शेर सिंह, सरजीत, धर्मपाल, राजेश, अरविंद कुमार, जितेंद्र पंच, पवन कुमार और विजय सिंह सहित सैकड़ों ग्रामीण मौजूद थे।
फर्जीवाड़ा दबाने की कूटनीति
ग्रामीणों ने बताया कि सरपंच जगत सिंह ने पंचों के फर्जी हस्ताक्षरों से प्रस्ताव पारित कर शराब बिक्री केंद्र खुलवाया है। जिसकी भनक लगने पर पंचों ने इस्तीफे की अल्टीमेटम दिया था। ग्रामीण व पंचों को डराने के लिए पूर्व सरपंच राजेंद्र प्रसाद को उकसाने के झूठे मामले में फंसाया गया है। इस षड्यंत्र में राजनीतिक दबाव की भूमिका मुख्य रही है।
गांव के हित में संघर्ष जारी रहेगा
पूर्व सरपंच ने कहा कि कार्यकाल में करीब 50 धरने-प्रदर्शन किए हैं, लेकिन कभी भी कानून का उल्लंघन नहीं किया। आगजनी के दिन गांव में मौजूद नहीं था। सरपंच के फर्जीवाड़ों को दबाने के लिए राजनीतिक षड्यंत्र रचा गया है। जिसके दबाव में पुलिस ने उकसाने के झूठे आरोप में गिरफ्तार कर लिया। गांव के हित में संघर्ष जारी रहेगा।