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चुनाव अधिकारी को हटाकर बार काउंसिल ने बनाई चुनाव समिति
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जिला बार एसोसिएशन के चुनाव 17 दिसंबर को होंगे, लेकिन उससे पहले ही इसे संपन्न करवाने के लिए बार काउंसिल पंजाब एवं हरियाणा ने चुनाव अधिकारी ओम प्रकाश यादव को उनके पद से हटा कर तीन सदस्यीय चुनाव समिति बना दी है। चुनाव समिति में एडवोकेट ओम प्रकाश यादव को सदस्य के रूप में शामिल किया है। साथ ही समिति समाधिकार वाले दो सदस्य एडवोकेट रविंद्र यादव (महेंद्रगढ़ वाले) व एडवोकेट प्रवीण चौधरी छिलरो को भी शामिल किया है। बार काउंसिल ने चुनाव समिति को यह भी निर्देश दिया है कि वह मतदान के दौरान व मतगणना के समय वीडियोग्राफी भी करवाएं। वोटरों की उचित पहचान को सुनिश्चित करें, ताकि पारदर्शी चुनाव संपन्न हो सकें।
क्या था विवाद
बार काउंसिल पंजाब एवं हरियाणा के पत्र दिनांक 20 अगस्त में दिए गए निर्देशानुसार, जिला बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव संपन्न करवाने के लिए 29 सितंबर को बार एसोसिएशन की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में सचिव ने चुनाव अधिकारी की नियुक्ति के बारे में सदस्यों को विचार रखने के लिए आमंत्रित किया था। इस पर जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान एडवोकेट मनीष वशिष्ठ ने बार काउंसिल के उक्त पत्र की तरफ ध्यान आकर्षित करवाते हुए कहा कि उक्त पत्र में बार काउंसिल ने संबंधित बार एसोसिएशन के नियमानुसार चुनाव अधिकारी या चुनाव समिति की नियुक्ति का निर्देश दिया है। वशिष्ठ ने कहा था कि जिला बार एसोसिएशन नारनौल का लिखित संविधान है, जिसके नियम, अनुच्छेद 7 (डी) के अनुसार जिला बार एसोसिएशन नारनौल के चुनाव करवाने के लिए चुनाव अधिकारी नियुक्त नहीं किया जा सकता। उसके लिए 5 सदस्यीय चुनाव समिति बननी चाहिए, जिसके नाम भी प्रस्तावित किए थे। उन्होंने नाम प्रस्तावित किया था, जिसका यशवंत यादव व महेश दीक्षित ने अनुमोदन किया था। बार के दो सदस्यों सुधीर यादव व कृष्ण कुमार यादव ने ओम प्रकाश यादव का नाम चुनाव अधिकारी के लिए प्रस्तावित किया था।
बैठक में हुई चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने ओम प्रकाश यादव की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्हें नैतिकता के आधार पर चुनावी प्रक्रिया से दूर रहने की सलाह दी थी। कई अधिवक्ताओं ने हर बार ओम प्रकाश यादव को ही चुनाव अधिकारी बनाने पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इस कई योग्य अधिवक्ता हैं, जो बार का चुनाव निष्पक्षता एवं पारदर्शिता से संपन्न करवा सकते हैं।
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शिकायत में यशवंत यादव का आरोप था कि 29 सितंबर की बैठक के बाद प्रधान एवं सचिव ने जो प्रस्ताव पारित किया, उसमें मनीष वशिष्ठ द्वारा चुनाव समिति के लिए प्रस्तावित किए गए नामों की चर्चा ही नहीं की गई। उस प्रस्ताव को ऐसे लिखा जैसे मात्र एक व्यक्ति ओम प्रकाश यादव का नाम चुनाव अधिकारी के लिए ही आया हो तथा शिकायतकर्ता ने भी उसी नाम को अनुमोदित कर दिया हो।
यशवंत यादव एडवोकेट ने एक प्रतिवेदन के जरिये आरोप लगाया था कि 29 सितंबर की बैठक का प्रस्ताव, बैठक में हुई कार्रवाई, सदस्यों की भावनाओं तथा बार एसोसिएशन के संविधान के अनुरूप नहीं है। उन्होंने बार काउंसिल पंजाब एवं हरियाणा को प्रतिवेदन प्रेषित करते हुए अनुरोध किया था कि 29 सितंबर की बैठक के प्रस्ताव को संशोधित किया जाए तथा ओम प्रकाश यादव को चुनाव अधिकारी के पद से हटा कर 5 सदस्यीय चुनाव समिति बना कर चुनाव संपन्न करवाया जाए। जिस पर सुनवाई के लिए बार काउंसिल ने 15 नवंबर को 3 बजे, प्रधान व सचिव को चंडीगढ़ तलब किया था। 15 नवंबर को सुनवाई के बाद बार काउंसिल ने आदेश को सुरक्षित रख लिया था। बार काउंसिल ने अपने आदेश में जिला बार एसोसिएशन के संविधान के प्रावधान के अनुरूप, समाधिकार रखने वाले ओम प्रकाश यादव, रविंद्र यादव व प्रवीण चौधरी आधारित तीन सदस्यीय चुनाव समिति गठित की है।
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क्या था विवाद
बार काउंसिल पंजाब एवं हरियाणा के पत्र दिनांक 20 अगस्त में दिए गए निर्देशानुसार, जिला बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव संपन्न करवाने के लिए 29 सितंबर को बार एसोसिएशन की बैठक बुलाई गई थी। बैठक में सचिव ने चुनाव अधिकारी की नियुक्ति के बारे में सदस्यों को विचार रखने के लिए आमंत्रित किया था। इस पर जिला बार एसोसिएशन के पूर्व प्रधान एडवोकेट मनीष वशिष्ठ ने बार काउंसिल के उक्त पत्र की तरफ ध्यान आकर्षित करवाते हुए कहा कि उक्त पत्र में बार काउंसिल ने संबंधित बार एसोसिएशन के नियमानुसार चुनाव अधिकारी या चुनाव समिति की नियुक्ति का निर्देश दिया है। वशिष्ठ ने कहा था कि जिला बार एसोसिएशन नारनौल का लिखित संविधान है, जिसके नियम, अनुच्छेद 7 (डी) के अनुसार जिला बार एसोसिएशन नारनौल के चुनाव करवाने के लिए चुनाव अधिकारी नियुक्त नहीं किया जा सकता। उसके लिए 5 सदस्यीय चुनाव समिति बननी चाहिए, जिसके नाम भी प्रस्तावित किए थे। उन्होंने नाम प्रस्तावित किया था, जिसका यशवंत यादव व महेश दीक्षित ने अनुमोदन किया था। बार के दो सदस्यों सुधीर यादव व कृष्ण कुमार यादव ने ओम प्रकाश यादव का नाम चुनाव अधिकारी के लिए प्रस्तावित किया था।
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बैठक में हुई चर्चा के दौरान कई सदस्यों ने ओम प्रकाश यादव की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उन्हें नैतिकता के आधार पर चुनावी प्रक्रिया से दूर रहने की सलाह दी थी। कई अधिवक्ताओं ने हर बार ओम प्रकाश यादव को ही चुनाव अधिकारी बनाने पर सवाल उठाते हुए कहा था कि इस कई योग्य अधिवक्ता हैं, जो बार का चुनाव निष्पक्षता एवं पारदर्शिता से संपन्न करवा सकते हैं।
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शिकायत में यशवंत यादव का आरोप था कि 29 सितंबर की बैठक के बाद प्रधान एवं सचिव ने जो प्रस्ताव पारित किया, उसमें मनीष वशिष्ठ द्वारा चुनाव समिति के लिए प्रस्तावित किए गए नामों की चर्चा ही नहीं की गई। उस प्रस्ताव को ऐसे लिखा जैसे मात्र एक व्यक्ति ओम प्रकाश यादव का नाम चुनाव अधिकारी के लिए ही आया हो तथा शिकायतकर्ता ने भी उसी नाम को अनुमोदित कर दिया हो।
यशवंत यादव एडवोकेट ने एक प्रतिवेदन के जरिये आरोप लगाया था कि 29 सितंबर की बैठक का प्रस्ताव, बैठक में हुई कार्रवाई, सदस्यों की भावनाओं तथा बार एसोसिएशन के संविधान के अनुरूप नहीं है। उन्होंने बार काउंसिल पंजाब एवं हरियाणा को प्रतिवेदन प्रेषित करते हुए अनुरोध किया था कि 29 सितंबर की बैठक के प्रस्ताव को संशोधित किया जाए तथा ओम प्रकाश यादव को चुनाव अधिकारी के पद से हटा कर 5 सदस्यीय चुनाव समिति बना कर चुनाव संपन्न करवाया जाए। जिस पर सुनवाई के लिए बार काउंसिल ने 15 नवंबर को 3 बजे, प्रधान व सचिव को चंडीगढ़ तलब किया था। 15 नवंबर को सुनवाई के बाद बार काउंसिल ने आदेश को सुरक्षित रख लिया था। बार काउंसिल ने अपने आदेश में जिला बार एसोसिएशन के संविधान के प्रावधान के अनुरूप, समाधिकार रखने वाले ओम प्रकाश यादव, रविंद्र यादव व प्रवीण चौधरी आधारित तीन सदस्यीय चुनाव समिति गठित की है।