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Mahendragarh-Narnaul News: शोभायात्रा में राम-रावण की सेना बनीं आकर्षण का केंद्र, 51 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन
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फोटो नंबर-17दशहरा पर्व पर चांदुवाड़ा रामलीला के पात्रों द्वारा निकाली गई भगवान राम की शोभायात
नारनौल। बुराई पर अच्छाई की जीत के दिन शहर में पूरे उत्साह और धूमधाम से मनाया गया। शहर के दो स्थानों से भव्य शोभायात्राएं निकलीं और रावण के पुतलों का दहन हुआ। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और शहरवासी इस नजारे के गवाह बने। जैसे ही रावण जला, पूरा माहौल जय श्रीराम के नारों से गूंज उठा।
श्री धार्मिक रामलीला चांदुवाड़ा ट्रस्ट ने श्री सनातन धर्म सभा के सहयोग से एसडी स्कूल से भगवान राम की शोभायात्रा निकाली। इसमें भगवान सूर्य नारायण का डोला खास आकर्षण रहा। परंपरा के मुताबिक यात्रा पहले सूर्य नारायण मंदिर पहुंची, जहां पूजा-अर्चना के बाद भगवान को साथ लेकर आगे बढ़ी। राम की सेना के साथ रावण और उसकी सेना के पात्र भी झांकी में शामिल थे। आजाद चौक और मेहता चौक से होती हुई यात्रा नई अनाज मंडी पहुंची।
यहां रामलीला के मंचन में राम-रावण संवाद के बाद दोनों सेनाओं के बीच भीषण युद्ध दिखाया गया। अंत में 51 फीट ऊंचे रावण के पुतले को अग्नि के हवाले किया गया। गौड़ ब्राह्मण सभा सहित कई सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों ने बाजार में भगवान सूर्य नारायण और श्रीराम की आरती उतारी।
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दूसरी ओर, पुरानी अनाज मंडी में श्री कृष्णा ड्रैमेटिक क्लब के मंच पर रामलीला चल रही थी। यहां भगवान नारायण सेवा संस्था के पात्रों ने श्री आदर्श सनातन ड्रामेटिक क्लब के साथ शोभायात्रा निकाली। इसमें लंकापति रावण अपनी सेना के साथ आगे चल रहे थे, जबकि भगवान राम और उनकी सेना भव्य रथों पर सवार होकर पीछे थी। यात्रा पुल बाजार से निकलकर आजाद चौक, किला रोड और बहारोड़ रोड होते हुए शोभासागर पहुंची।
शोभासागर पर राम-रावण संवाद के बाद धर्म और अधर्म के युद्ध का मंचन हुआ। रावण की हार के बाद उसके पुतले का दहन किया गया। दशहरे के इस आयोजन ने लोगों को सत्य, धर्म और सदाचार के रास्ते पर चलने का संदेश दिया।
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श्री धार्मिक रामलीला चांदुवाड़ा ट्रस्ट ने श्री सनातन धर्म सभा के सहयोग से एसडी स्कूल से भगवान राम की शोभायात्रा निकाली। इसमें भगवान सूर्य नारायण का डोला खास आकर्षण रहा। परंपरा के मुताबिक यात्रा पहले सूर्य नारायण मंदिर पहुंची, जहां पूजा-अर्चना के बाद भगवान को साथ लेकर आगे बढ़ी। राम की सेना के साथ रावण और उसकी सेना के पात्र भी झांकी में शामिल थे। आजाद चौक और मेहता चौक से होती हुई यात्रा नई अनाज मंडी पहुंची।
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यहां रामलीला के मंचन में राम-रावण संवाद के बाद दोनों सेनाओं के बीच भीषण युद्ध दिखाया गया। अंत में 51 फीट ऊंचे रावण के पुतले को अग्नि के हवाले किया गया। गौड़ ब्राह्मण सभा सहित कई सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों ने बाजार में भगवान सूर्य नारायण और श्रीराम की आरती उतारी।
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दूसरी ओर, पुरानी अनाज मंडी में श्री कृष्णा ड्रैमेटिक क्लब के मंच पर रामलीला चल रही थी। यहां भगवान नारायण सेवा संस्था के पात्रों ने श्री आदर्श सनातन ड्रामेटिक क्लब के साथ शोभायात्रा निकाली। इसमें लंकापति रावण अपनी सेना के साथ आगे चल रहे थे, जबकि भगवान राम और उनकी सेना भव्य रथों पर सवार होकर पीछे थी। यात्रा पुल बाजार से निकलकर आजाद चौक, किला रोड और बहारोड़ रोड होते हुए शोभासागर पहुंची।
शोभासागर पर राम-रावण संवाद के बाद धर्म और अधर्म के युद्ध का मंचन हुआ। रावण की हार के बाद उसके पुतले का दहन किया गया। दशहरे के इस आयोजन ने लोगों को सत्य, धर्म और सदाचार के रास्ते पर चलने का संदेश दिया।