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एचसीएस अनिल नागर के बाद अब एचपीएस अधिकारी भ्रष्टाचार में फंसा
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एचसीएस अनिल नागर के बाद अब एचपीएस अधिकारी कुलदीप हुड्डा भ्रष्टाचार के मामले में फंसते नजर आ रहे हैं। शिकायतकर्ता ने जेल के डीएसपी कुलदीप हुड्डा का नाम भी दर्शाया है। टीम को जेल के बड़े अधिकारी के खिलाफ सबूत भी मिले हैं। हुड्डा भी इस मामले में फंसते नजर आ रहे हैं। शुक्रवार को टीम रात्रि तक नसीबपुर जेल में इस मामले की जांच जुटी हुई थी।
नूहं विजिलेंस टीम के इंचार्ज निरीक्षक अजीत कुमार ने बताया कि हंसराज ने पुलिस को शिकायत में बताया है कि उसका भाई संदीप सिंधिया नसीबपुर जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। जेल के उप अधीक्षक कुलदीप हुड्डा हर महीने उसके भाई से चक्की से बचने के लिए एक लाख रुपये की मांग करता है। इसके अलावा वो उसको प्रताड़ित भी करते हैं। इनको रिश्वत देेने के चक्कर में उसकी मां ने अपने नाम डेढ़ एकड़ जमीन भी 21 लाख रुपये में बेच दी। हंजराज ने अपनी शिकायत में जेल वार्डन गजे सिंह, राजन, विवेक और डीएसपी कुलदीप हुड्डा पर रिश्वत के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने डीएसपी कुलदीप हुड्डा के खिलाफ अंडर 7 पीसी एक्ट पीएस एसवीबी के तहत मामला दर्ज हो चुका है।
कॉल डिटेल की मांगी जानकारी
टीम ने निरीक्षक अजीत सिंह ने लेटर लिखकर एसटीडी कॉल, सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य रिकॉर्ड मांगा गया है। फोन पर किस-किस से और क्या-क्या बातें होती थीं, किसने बात करवाई, सभी एकत्रित की है। इस संबंध में कुछ और बातें भी सामने आई हैं। लेकिन वो जांच का हिस्सा होने की वजह से बताई नहीं जा सकती हैं।
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विवेक पर नहीं हुआ आरोप सिद्ध
शिकायतकर्ता ने विवेक पर भी एक लाख रुपये लिए जाने का आरोप लगाया था। इस वजह से उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में आरोपी विवेक के साथ टीम गहनता से पूछताछ कर ली, लेकिन उस पर आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। ऐसे में टीम ने उनको छोड़ दिया है, लेकिन विवेक इस मामले में सरकारी गवाह बन गया है।
दो दिन का मिला पुलिस रिमांड
टीम ने बुधवार को मुख्य आरोपी राजन एवं गजे सिंह को नारनौल कोर्ट में पेश किया है जहां से दोनों को दो दिन का पुलिस रिमांड मिला है। पुलिस आरोपियों से गहनता से पूछताछ करेगी तथा लाखों रुपये की रिकवरी भी करेगी।
यह था मामला
बता दें कि गैंगस्टर विक्रम उर्फ पपला का साथी संदीप सिंधिया उम्र कैद की सजा काट रहा है। संदीप से जेल में हर महीने पैसों की मांग की जाती थी। उसके छोटे भाई हंसराज ने इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक को दी। पुलिस अधीक्षक ने आरोपियों को रंगे हाथों को पकड़वाने के लिए मुख्य संपर्क किया। इस दौरान इंस्पेक्टर अजीत सिंह के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई थी। टीम ने वीरवार को योजनाबद्ध तरीके से जेल वार्डन राजन को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया था। इस मामले में विवेक और गजे सिंह को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था।
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नूहं विजिलेंस टीम के इंचार्ज निरीक्षक अजीत कुमार ने बताया कि हंसराज ने पुलिस को शिकायत में बताया है कि उसका भाई संदीप सिंधिया नसीबपुर जेल में उम्रकैद की सजा काट रहा है। जेल के उप अधीक्षक कुलदीप हुड्डा हर महीने उसके भाई से चक्की से बचने के लिए एक लाख रुपये की मांग करता है। इसके अलावा वो उसको प्रताड़ित भी करते हैं। इनको रिश्वत देेने के चक्कर में उसकी मां ने अपने नाम डेढ़ एकड़ जमीन भी 21 लाख रुपये में बेच दी। हंजराज ने अपनी शिकायत में जेल वार्डन गजे सिंह, राजन, विवेक और डीएसपी कुलदीप हुड्डा पर रिश्वत के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने डीएसपी कुलदीप हुड्डा के खिलाफ अंडर 7 पीसी एक्ट पीएस एसवीबी के तहत मामला दर्ज हो चुका है।
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कॉल डिटेल की मांगी जानकारी
टीम ने निरीक्षक अजीत सिंह ने लेटर लिखकर एसटीडी कॉल, सीसीटीवी फुटेज तथा अन्य रिकॉर्ड मांगा गया है। फोन पर किस-किस से और क्या-क्या बातें होती थीं, किसने बात करवाई, सभी एकत्रित की है। इस संबंध में कुछ और बातें भी सामने आई हैं। लेकिन वो जांच का हिस्सा होने की वजह से बताई नहीं जा सकती हैं।
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विवेक पर नहीं हुआ आरोप सिद्ध
शिकायतकर्ता ने विवेक पर भी एक लाख रुपये लिए जाने का आरोप लगाया था। इस वजह से उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। इस मामले में आरोपी विवेक के साथ टीम गहनता से पूछताछ कर ली, लेकिन उस पर आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। ऐसे में टीम ने उनको छोड़ दिया है, लेकिन विवेक इस मामले में सरकारी गवाह बन गया है।
दो दिन का मिला पुलिस रिमांड
टीम ने बुधवार को मुख्य आरोपी राजन एवं गजे सिंह को नारनौल कोर्ट में पेश किया है जहां से दोनों को दो दिन का पुलिस रिमांड मिला है। पुलिस आरोपियों से गहनता से पूछताछ करेगी तथा लाखों रुपये की रिकवरी भी करेगी।
यह था मामला
बता दें कि गैंगस्टर विक्रम उर्फ पपला का साथी संदीप सिंधिया उम्र कैद की सजा काट रहा है। संदीप से जेल में हर महीने पैसों की मांग की जाती थी। उसके छोटे भाई हंसराज ने इसकी शिकायत पुलिस अधीक्षक को दी। पुलिस अधीक्षक ने आरोपियों को रंगे हाथों को पकड़वाने के लिए मुख्य संपर्क किया। इस दौरान इंस्पेक्टर अजीत सिंह के नेतृत्व में एक टीम गठित की गई थी। टीम ने वीरवार को योजनाबद्ध तरीके से जेल वार्डन राजन को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ लिया था। इस मामले में विवेक और गजे सिंह को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था।