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बीरबल की नगरी का सबसे पुराना पीजी कॉलेज हुआ बदहाल

Sat, 25 Aug 2018 12:54 AM IST
Updated Sat, 25 Aug 2018 12:54 AM IST
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बीरबल की नगरी का सबसे पुराना पीजी कॉलेज हुआ बदहाल
अमर उजाला ब्यूरो
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नारनौल। बीरबल की नगरी नारनौल का सबसे पुराना राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय आज सुविधाओं के अभाव में बदहाली के आंसू बहा रहा है। कॉलेज प्रबंधन अपने स्तर पर समस्याओं का समाधान करने का प्रयास करता है तो उसे भी प्रशासन का सहयोग नहीं मिल पा रहा है। इसका मलाल कॉलेज प्रबंधन का अखर रहा है।
कॉलेज प्रबंधन द्वारा महाविद्यालय के भवन का जीर्णोद्धार करने, बिजली, सीवर, शौचालय व पानी की व्यवस्था को ठीक करने के लिए लिए पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों को छह माह में कई बार लिखित रूप से गुहार लगा चुका है लेकिन विभाग इस ओर ध्यान देने को तैयार ही नहीं है। इतना ही संबंधित विभाग द्वारा कॉलेज की समस्याओं का समाधान नहीं करने पर कॉलेज प्रबंधन डीसी से भी गुहार लगा चुका है। परंतु हालात जस की तस है। इस प्रकार कॉलेज में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं, कॉलेज प्रबंधन पीडब्ल्यूडी विभाग की अनुमति बगैर अपने स्तर पर कोई भी कार्य नहीं करवा सकता है। सन 1953 में बनी कालेज की बिल्डिंग के कमरे जर्जर हो चुके है। इससे बारिश के दौरान छतों से पानी टपकता है। इस प्रकार विद्यार्थी भी भय के साये में पढ़ाई करने को मजबूर है।
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कॉलेज की चारदीवारी टूटी होने से चोरी का भय
कार्यवाहक प्राचार्य एनएन यादव ने बताया कि कॉलेज परिसर की चारदीवारी जगह-जगह से टूटी पड़ी हुई है। वहीं स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था नहीं होने से रात के समय कालेज परिसर में अंधेरा होता जाता है। जिससे रात के समय कालेज में चोरी होने का भय बना रहता है। वहीं कॉलेज में बिजली की तारे भी जगह-जगह लटक रही है। जिससे भी हादसा होने का भय बना रहता है।
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सीवर व पानी की व्यवस्था भी ठप
कॉलेज कैंपस में काफी वर्ष पूर्व सीवर लाइन डाली गई थी। परंतु देखरेख के अभाव में वह भी ब्लॉक हो चुकी है। इस प्रकार कालेज में सीवर व्यवस्था का बुरा हाल है। वहीं कॉलेज कैंपस में पानी स्टोरेज के लिए भी पानी का कोई टैंक नहीं है। इस प्रकार केवल मेन पानी की लाइन चालू रहने पर ही कॉलेज में पानी आता है। इस प्रकार अगर जिस दिन पानी की सप्लाई नहीं आती है तो कॉलेज में बच्चों के लिए पीने के पानी की समस्या बन जाती है। यहीं नहीं पानी की कमी के कारण कई बार प्रयोगशालाओं में प्रयोग भी नहीं हो पाती है।

कॉलेज के मुख्य द्वार के साथ डेरा डाल कर पड़े लुहार
कॉलेज के मुख्य द्वार पर लुहार समाज के लोग काफी वर्षों से डेरा डाले पड़े है। जिनके बच्चे कालेज में आकर विद्यार्थियों व स्टाफ सदस्यों से भीख मांगते है। यहीं नहीं लुहार समाज की महिलाएं भी कॉलेज से पानी भरने के लिए लगी रहती है। इससे भी कॉलेज की सुंदरता को भी ग्रहण लग रहा है।

कई बार अधिकारियों को करवाया अवगत, नहीं हुआ समाधान
कॉलेज प्रशासन द्वारा कॉलेज भवन के जीर्णोद्धार करने, सीवर, पानी, बिजली आदि की व्यवस्था करने के लिए पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों को कोई बार लिखित रूप से पत्र भेजकर अवगत करवाया गया है, लेकिन अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे है। समस्याओं का समाधान नहीं करने पर उक्त के दिशा-निर्देशा जारी करने के लिए डीसी के अलावा उच्चतर शिक्षा विभाग के महानिदेशक को भी लिखा गया है।

भवन हो चुका खंडहर
कॉलेज का 63 साल पुराना 80 कमरों का भवन खंडहर होता जा रहा है। कॉलेज के पुराने भवन के कमरों की हालत बहुत ही खराब हो गई है। कई कमरों के फर्नीचर को दीमक चाट ंगई है। वहीं कालेज में बनी साइंस लैब के कमरे भी खंडहर होते जा रहे हैं, जहां पर बच्चे जाने से डरने लगे हैं।


कॉलेज का भवन कई वर्ष पुराना होने के कारण जर्जर हो चुका है। वहीं कालेज कैंपस में पानी व सीवर की उचित व्यवस्था नहीं है। इन सभी समस्या के लिए संबंधित विभाग के अधिकारियों को लिखा गया है। लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है।
- एनएन यादव, कार्यवाहक प्राचार्य, राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय नारनौल।
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