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नारनौल को मिला मेडिकल कॉलेज का उपहार,महेंद्रगढ़ से किया वादा रह गया अधूरा
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अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। वर्ष 2018 जिले को मेडिकल कॉलेज का उपहार दे गया। सीएम ने प्रदेश के 19वें मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखकर क्षेत्र की जनता को सौगात दी। अहीरवाल क्षेत्र के पिछड़े हुए जिले महेंद्रगढ़ में दो साल बाद एमबीबीएस के लिए एडमिशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उप नागरिक अस्पताल महेंद्रगढ़ शहर से किया गया
वादा अधूरा रह गया।
चिकित्सा के क्षेत्र की बात करें तो यह साल जिले के लिए अच्छा साबित हुआ। जिले में अब तक कोई मेडिकल कॉलेज नहीं है। सीएम मनोहरलाल ने साल के आखिरी सप्ताह में गांव कोरियावास में मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया। करीब 500 करोड़ की लागत से अगले दो साल में मेडिकल कॉलेज का भवन बनकर तैयार होगा। अगर सभी कुछ सही रहा तो वर्ष 2022 में नारनौल जिले में एमबीबीएस की क्लास शुरू हो जाएंगी। महेंद्रगढ़ जिले से किया गया वादा अधूरा रह गया। सीएम मनोहरलाल की ओर से महेंद्रगढ़ उप नागरिक अस्पताल को 100 बेड का करने का एलान किया गया था। यहां अल्ट्रासाउंड मशीन, वेंटिलेटर शुरू करने की घोषणा प्रदेश के शिक्षामंत्री ने की थी। यह दोनों की घोषणा अधूरी रह गई। जिले के सभी अस्पताल साल भर चिकित्सकों की कमी से जूझते रहे। साल भर में पैरा मेडिकल स्टाफ भी पूरा नहीं हो सका।
एक नर्स के सहारे सीएचसी
गांव सेहलंग की पीएचसी को अपग्रेड कर सीएचसी बनाया गया था। डिप्टी स्पीकर संतोष यादव ने इस गांव को गोद ले रखा है। सीएचसी को नए भवन में भी ट्रांसफर नहीं किया जा सका। यहां साल भर मरीज दर्द के साथ वापस लौटते रहे।
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नारनौल के अस्पताल में आग--
इस साल नारनौल मुख्यालय स्थित नागरिक अस्पताल में आग लगने की घटना को याद रखा जाएगा। अस्पताल परिसर में बने पावर केबल ब्लास्ट होने के कारण पूरे अस्पताल में हड़कंप मच गया। यहां 200 बेड के अस्पताल की मंजूरी मिलने के बाद नए भवन के लिए अभी तक काम शुरू नहीं हो सका।
जच्चा-बच्चा की मौत
जिला मुख्यालय पर सुविधाओं की कमी के कारण कई गर्भवती महिलाओं व नवजात की मौत हो चुकी है। मैन पावर की कमी के कारण यहां बेहद कम मरीज ही आते हैं। अधिकतर मरीज निजी अस्पतालों में ही उपचार कराने को मजबूर होते हैं। जच्चा-बच्चा की मौत होने के बाद अस्पताल कई दिन सुर्खियों में बना रहा था।
नहीं मिल सका इंसाफ
निजी अस्पताल में सात साल के बच्चे दीपांशुु की मौत हो गई। तीन डीसी से लेकर सीएम तक, मानव अधिकार आयोग को शिकायत करने के बाद भी किसी दीपांशु की मौत के मामले में अस्पताल प्रशासन ने रिपोर्ट नहीं दी। पीड़ित परिवार ने नागरिक अस्पताल के सामने धरना देकर विरोध जताया।
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महेंद्रगढ़। वर्ष 2018 जिले को मेडिकल कॉलेज का उपहार दे गया। सीएम ने प्रदेश के 19वें मेडिकल कॉलेज की आधारशिला रखकर क्षेत्र की जनता को सौगात दी। अहीरवाल क्षेत्र के पिछड़े हुए जिले महेंद्रगढ़ में दो साल बाद एमबीबीएस के लिए एडमिशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। उप नागरिक अस्पताल महेंद्रगढ़ शहर से किया गया
वादा अधूरा रह गया।
चिकित्सा के क्षेत्र की बात करें तो यह साल जिले के लिए अच्छा साबित हुआ। जिले में अब तक कोई मेडिकल कॉलेज नहीं है। सीएम मनोहरलाल ने साल के आखिरी सप्ताह में गांव कोरियावास में मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया। करीब 500 करोड़ की लागत से अगले दो साल में मेडिकल कॉलेज का भवन बनकर तैयार होगा। अगर सभी कुछ सही रहा तो वर्ष 2022 में नारनौल जिले में एमबीबीएस की क्लास शुरू हो जाएंगी। महेंद्रगढ़ जिले से किया गया वादा अधूरा रह गया। सीएम मनोहरलाल की ओर से महेंद्रगढ़ उप नागरिक अस्पताल को 100 बेड का करने का एलान किया गया था। यहां अल्ट्रासाउंड मशीन, वेंटिलेटर शुरू करने की घोषणा प्रदेश के शिक्षामंत्री ने की थी। यह दोनों की घोषणा अधूरी रह गई। जिले के सभी अस्पताल साल भर चिकित्सकों की कमी से जूझते रहे। साल भर में पैरा मेडिकल स्टाफ भी पूरा नहीं हो सका।
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एक नर्स के सहारे सीएचसी
गांव सेहलंग की पीएचसी को अपग्रेड कर सीएचसी बनाया गया था। डिप्टी स्पीकर संतोष यादव ने इस गांव को गोद ले रखा है। सीएचसी को नए भवन में भी ट्रांसफर नहीं किया जा सका। यहां साल भर मरीज दर्द के साथ वापस लौटते रहे।
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नारनौल के अस्पताल में आग--
इस साल नारनौल मुख्यालय स्थित नागरिक अस्पताल में आग लगने की घटना को याद रखा जाएगा। अस्पताल परिसर में बने पावर केबल ब्लास्ट होने के कारण पूरे अस्पताल में हड़कंप मच गया। यहां 200 बेड के अस्पताल की मंजूरी मिलने के बाद नए भवन के लिए अभी तक काम शुरू नहीं हो सका।
जच्चा-बच्चा की मौत
जिला मुख्यालय पर सुविधाओं की कमी के कारण कई गर्भवती महिलाओं व नवजात की मौत हो चुकी है। मैन पावर की कमी के कारण यहां बेहद कम मरीज ही आते हैं। अधिकतर मरीज निजी अस्पतालों में ही उपचार कराने को मजबूर होते हैं। जच्चा-बच्चा की मौत होने के बाद अस्पताल कई दिन सुर्खियों में बना रहा था।
नहीं मिल सका इंसाफ
निजी अस्पताल में सात साल के बच्चे दीपांशुु की मौत हो गई। तीन डीसी से लेकर सीएम तक, मानव अधिकार आयोग को शिकायत करने के बाद भी किसी दीपांशु की मौत के मामले में अस्पताल प्रशासन ने रिपोर्ट नहीं दी। पीड़ित परिवार ने नागरिक अस्पताल के सामने धरना देकर विरोध जताया।