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कककेंद्र पर जल्द ही मधुमक्खी पालन इकाई (बी कीपिंग यूनिट) होगी स्थापित
Updated Tue, 02 Jan 2018 09:29 PM IST
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केंद्र पर जल्द ही मधुमक्खी पालन इकाई होगी स्थापित
महेंद्रगढ़। कृषि विज्ञान केंद्र पर जल्द ही मधुमक्खी पालन इकाई (बी कीपिंग यूनिट) बनाई जाएगी है। इसके लिए बजट मंजूर हो चुका है। इसके अतिरिक्त मशरूम यूनिट भी लगाई जाएगी जिसकी जगह फाइनल हो चुकी है। इनके जरिये खेती की जमीन कम होने के बावजूद किसान अपनी आय बढ़ा सकेंगे। इसके अलावा केंद्र पर जल्द ही किसानों को आधुनिक खेती के प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा उनके सहायक धंधों की जानकारियां भी दी जाएंगी। इस प्रशिक्षण से न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2022 तक किसानों की आय दोगुनी होने का सपना पूरा होगा बल्कि किसानों को भी इससे फायदा होगा। आगामी छह माह में यह कार्रवाई केंद्र पर शुरू की जाएगी।
इसके नजदीक ही मधुमक्खी पालन इकाई (बी कीपिंग यूनिट) बनाई जानी है। इसके लिए बजट मंजूर हो चुका है। मशरूम यूनिट लगाने की जगह फाइनल हो चुकी है। इनके जरिये खेती की जमीन कम होने के बावजूद किसान अपनी आय बढ़ा सकेंगे।
डॉ. सुधा ने बताया कि केंद्र में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी प्रयास किया जाएगा। महिलाएं घर के काम के साथ-साथ पास की जमीन पर किचन गार्डन विकसित कर घर के लिए ताजी सब्जियों की पैदावार कर सकती हैं। इससे एक ओर जहां उनके घर का बजट संतुलित होगा, वहीं बाजार में कीटनाशक दवा के प्रभाव वाली सब्जियों की बजाय पारिवारिक सदस्यों को ताजी और पौष्टिक सब्जियां मिल सकेंगी।
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महेंद्रगढ़। कृषि विज्ञान केंद्र पर जल्द ही मधुमक्खी पालन इकाई (बी कीपिंग यूनिट) बनाई जाएगी है। इसके लिए बजट मंजूर हो चुका है। इसके अतिरिक्त मशरूम यूनिट भी लगाई जाएगी जिसकी जगह फाइनल हो चुकी है। इनके जरिये खेती की जमीन कम होने के बावजूद किसान अपनी आय बढ़ा सकेंगे। इसके अलावा केंद्र पर जल्द ही किसानों को आधुनिक खेती के प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके अलावा उनके सहायक धंधों की जानकारियां भी दी जाएंगी। इस प्रशिक्षण से न केवल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2022 तक किसानों की आय दोगुनी होने का सपना पूरा होगा बल्कि किसानों को भी इससे फायदा होगा। आगामी छह माह में यह कार्रवाई केंद्र पर शुरू की जाएगी।
इसके नजदीक ही मधुमक्खी पालन इकाई (बी कीपिंग यूनिट) बनाई जानी है। इसके लिए बजट मंजूर हो चुका है। मशरूम यूनिट लगाने की जगह फाइनल हो चुकी है। इनके जरिये खेती की जमीन कम होने के बावजूद किसान अपनी आय बढ़ा सकेंगे।
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डॉ. सुधा ने बताया कि केंद्र में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी प्रयास किया जाएगा। महिलाएं घर के काम के साथ-साथ पास की जमीन पर किचन गार्डन विकसित कर घर के लिए ताजी सब्जियों की पैदावार कर सकती हैं। इससे एक ओर जहां उनके घर का बजट संतुलित होगा, वहीं बाजार में कीटनाशक दवा के प्रभाव वाली सब्जियों की बजाय पारिवारिक सदस्यों को ताजी और पौष्टिक सब्जियां मिल सकेंगी।
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