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हिंदी दिवस पर हुई काव्य गोष्ठी
Updated Sat, 16 Sep 2017 01:52 PM IST
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हिंदी दिवस पर हुई काव्य गोष्ठी
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की जिला इकाई द्वारा हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में रेलवे रोड स्थित गीता भवन में विचार एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में मुख्य वक्ता डॉ. रामनिवास मानव ने हिंदी भाषा के इतिहास की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि हिंदी विश्व में तीसरी सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा होने के बावजूद सात दशकों बाद भी राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई है। वहीं अशोक शास्त्री ने ‘हर बार छली जाती हूं अपनी पीड़ा बिसराकर, भारत भूषण तायल ने हे राम रवि सम अनुपम तेज तुम्हारा हे राम चंद्र भी शीतलता से हारा, डा. जितेंद्र भारद्वाज ने हिंदी को अगर है बढ़ाना, राज की भाषा बनाना पड़ेगा कविता प्रस्तुत की।इनके अलावा शिव हरिओम, डा. पंकज गौड़, परमानंद दीवान, हितेंद्र शर्मा, डा. दीपक वर्मा, पुरुषोत्तम आर्य, सुनील शर्मा व मनीष कुमार ने भी हिंदी के प्रचार प्रसार के पक्ष में अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर जय भारद्वाज, गीता शर्मा, सोनू, निधि जयंती आदि मौजूद रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। अखिल भारतीय साहित्य परिषद की जिला इकाई द्वारा हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में रेलवे रोड स्थित गीता भवन में विचार एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। गोष्ठी में मुख्य वक्ता डॉ. रामनिवास मानव ने हिंदी भाषा के इतिहास की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि हिंदी विश्व में तीसरी सबसे अधिक बोले जाने वाली भाषा होने के बावजूद सात दशकों बाद भी राष्ट्रभाषा नहीं बन पाई है। वहीं अशोक शास्त्री ने ‘हर बार छली जाती हूं अपनी पीड़ा बिसराकर, भारत भूषण तायल ने हे राम रवि सम अनुपम तेज तुम्हारा हे राम चंद्र भी शीतलता से हारा, डा. जितेंद्र भारद्वाज ने हिंदी को अगर है बढ़ाना, राज की भाषा बनाना पड़ेगा कविता प्रस्तुत की।इनके अलावा शिव हरिओम, डा. पंकज गौड़, परमानंद दीवान, हितेंद्र शर्मा, डा. दीपक वर्मा, पुरुषोत्तम आर्य, सुनील शर्मा व मनीष कुमार ने भी हिंदी के प्रचार प्रसार के पक्ष में अपने विचार व्यक्त किए। इस मौके पर जय भारद्वाज, गीता शर्मा, सोनू, निधि जयंती आदि मौजूद रहे।
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