{"_id":"86115d2f135fad738af8e96a2a225961","slug":"3000-thirsty-in-turn-three-feet","type":"story","status":"publish","title_hn":"तीन फीट के फेर में 3000 प्यासे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तीन फीट के फेर में 3000 प्यासे
narnaul
Updated Sun, 20 Jul 2014 12:40 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
तीन फीट का पाइप न जुड़ने से शहर के दो मोहल्लों मालीटिब्बा और नई बस्ती के लोग प्यासे हैं। जनस्वास्थ्य विभाग और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की खींचतान के कारण यह तीन फीट का पाइप लाइन में नहीं जोड़ा जा सका है। योजना पर करीब 35 लाख रुपये का खर्च होने के बाद भी करीब डेढ़ माह से यह काम रुका हुआ है और दो साल से पानी की आस लगाकर बैठे लोग अफसरों को कोस रहे हैं।
जनस्वास्थ्य विभाग ने दो साल पहले पेयजल आपूर्ति के लिए पांच बूस्टिंग स्टेशन निर्माण के लिए 1.95 करोड़ का टेंडर छोड़ा था। एक बूस्टिंग स्टेशन की लागत करीब 35 लाख रुपये आई।
टेंडर भिवानी के ठेकेदार नरेंद्र कुमार ने लिया। मालीटिब्बा में लगाए गए बूस्टिंग स्टेशन से करीब 400 मीटर दूर रेलवे लाइन तक 10 इंची पाइपलाइन बिछाई गई। इसके बाद रेलवे लाइन (बहरोड़ रोड रेलवे फाटक) के नीचे से पाइप दबाने के लिए परमिशन मिलने में समय लग गया।
विज्ञापन
करीब 12 लाख रुपये जमा कराने पर रेलवे ने क्रॉसिंग का टेंडर छोड़ यह कार्य करवाया। इस पाइप को आगे टीबी अस्पताल में बने पुराने बूस्टिंग स्टेशन में आ रही पटीकरा वाटर सप्लाई लाइन से जोड़ना था।
इसे जोड़ने के दो रास्ते थे, एक तो बहरोड रोड रेलवे फाटक से सीधेे गर्ल्स कालेज, अशोक प्लाजा के सामने से टीबी अस्पताल के बूस्टिंग तक जाने का और दूसरा टीबी अस्पताल के अंदर बनी चारदीवारी के साथ-साथ बिछाकर। अस्पताल की चारदीवारी का दूसरा छोर रेलवे फाटक के नजदीक होने के कारण इसे चुना गया।
दोनों विभागों के बीच उलझा मामला
सूत्रों के मुताबिक जनस्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन एक्सईएन जेके बंसल (फिलहाल सेवानिवृत्त) ने सीएमओ डा. गुलशन अरोड़ा से व्यक्तिगत मीटिंग कर टीबी अस्पताल की चारदीवारी के साथ-साथ पाइप बिछाने की मंजूरी ली। टीबी अस्पताल में बूस्टिंग के साथ ही सीएमओ का सरकारी आवास है।
ठेकेदार ने बूस्टिंग से सीएमओ आवास के अंदर से होते हुए चारदीवारी के साथ 10 इंच लाइन बिछा दी। जैसे ही अस्पताल परिसर में ही बने सामान्य नर्सिंग प्रसूतिविद्या (जीएनएम) भवन को पार कर अंतिम छोर तक लाइन पहुंची तो काम रुकवा दिया गया।
इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने तर्क दिया कि पाइप लाइन बिछाने से जीएनएम सेंटर में पानी सप्लाई नहीं हो रही है। छत पर रखी टंकियों तक भी पानी नहीं पहुंच रहा है। इसलिए टीबी अस्पताल के बाहर से पाइप लाइन दबाई जाए। स्वास्थ्य विभाग ने जनस्वास्थ्य विभाग को 27 जून को बाकायदा पत्र लिख यह आदेश दिए।
‘पहले क्यों नहीं जताया एतराज’
जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ गोपाल सिंह ने बताया कि उनके अधीक्षक अभियंता जेके बंसल के आदेश पर टीबी अस्पताल के अंदर चारदीवारी के साथ लाइन दबाई गई है।
अगर विभाग को एतराज था तो खुद सीएमओ के आवास के अंदर से जब पाइप लाइन दबाई गई, तब मना क्यों नहीं किया गया। अब जीएनएम सेंटर में पानी नहीं आने की बात कही जा रही है, लाइन बिछाते समय कोई दूसरी लाइन सामने नहीं आई तो सप्लाई कैसे बाधित हो सकती है।
ऐसा है तो भी नई लाइन में पानी आने पर एएनएम सेंटर में नया कनेक्शन कर देंगे। वह खुद सीएमओ से दो बार मिल चुके हैं, स्वास्थ्य मंत्री से भी सीएमओ की बात फोन पर करवा चुके हैं।
अब केवल तीन फीट का एक पाइप जुड़ना है, बाकी लाइन पूरी तरह टीबी अस्पताल की चारदीवारी के साथ बिछाई जा चुकी है। तीन फुट के पाइप के फेर में मालीटिब्बा और नई बस्ती के 3000 लोगों को पानी नसीब नहीं हो रहा।
विज्ञापन
जनस्वास्थ्य विभाग ने दो साल पहले पेयजल आपूर्ति के लिए पांच बूस्टिंग स्टेशन निर्माण के लिए 1.95 करोड़ का टेंडर छोड़ा था। एक बूस्टिंग स्टेशन की लागत करीब 35 लाख रुपये आई।
विज्ञापन
टेंडर भिवानी के ठेकेदार नरेंद्र कुमार ने लिया। मालीटिब्बा में लगाए गए बूस्टिंग स्टेशन से करीब 400 मीटर दूर रेलवे लाइन तक 10 इंची पाइपलाइन बिछाई गई। इसके बाद रेलवे लाइन (बहरोड़ रोड रेलवे फाटक) के नीचे से पाइप दबाने के लिए परमिशन मिलने में समय लग गया।
विज्ञापन
करीब 12 लाख रुपये जमा कराने पर रेलवे ने क्रॉसिंग का टेंडर छोड़ यह कार्य करवाया। इस पाइप को आगे टीबी अस्पताल में बने पुराने बूस्टिंग स्टेशन में आ रही पटीकरा वाटर सप्लाई लाइन से जोड़ना था।
इसे जोड़ने के दो रास्ते थे, एक तो बहरोड रोड रेलवे फाटक से सीधेे गर्ल्स कालेज, अशोक प्लाजा के सामने से टीबी अस्पताल के बूस्टिंग तक जाने का और दूसरा टीबी अस्पताल के अंदर बनी चारदीवारी के साथ-साथ बिछाकर। अस्पताल की चारदीवारी का दूसरा छोर रेलवे फाटक के नजदीक होने के कारण इसे चुना गया।
दोनों विभागों के बीच उलझा मामला
सूत्रों के मुताबिक जनस्वास्थ्य विभाग के तत्कालीन एक्सईएन जेके बंसल (फिलहाल सेवानिवृत्त) ने सीएमओ डा. गुलशन अरोड़ा से व्यक्तिगत मीटिंग कर टीबी अस्पताल की चारदीवारी के साथ-साथ पाइप बिछाने की मंजूरी ली। टीबी अस्पताल में बूस्टिंग के साथ ही सीएमओ का सरकारी आवास है।
ठेकेदार ने बूस्टिंग से सीएमओ आवास के अंदर से होते हुए चारदीवारी के साथ 10 इंच लाइन बिछा दी। जैसे ही अस्पताल परिसर में ही बने सामान्य नर्सिंग प्रसूतिविद्या (जीएनएम) भवन को पार कर अंतिम छोर तक लाइन पहुंची तो काम रुकवा दिया गया।
इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने तर्क दिया कि पाइप लाइन बिछाने से जीएनएम सेंटर में पानी सप्लाई नहीं हो रही है। छत पर रखी टंकियों तक भी पानी नहीं पहुंच रहा है। इसलिए टीबी अस्पताल के बाहर से पाइप लाइन दबाई जाए। स्वास्थ्य विभाग ने जनस्वास्थ्य विभाग को 27 जून को बाकायदा पत्र लिख यह आदेश दिए।
‘पहले क्यों नहीं जताया एतराज’
जनस्वास्थ्य विभाग के एसडीओ गोपाल सिंह ने बताया कि उनके अधीक्षक अभियंता जेके बंसल के आदेश पर टीबी अस्पताल के अंदर चारदीवारी के साथ लाइन दबाई गई है।
अगर विभाग को एतराज था तो खुद सीएमओ के आवास के अंदर से जब पाइप लाइन दबाई गई, तब मना क्यों नहीं किया गया। अब जीएनएम सेंटर में पानी नहीं आने की बात कही जा रही है, लाइन बिछाते समय कोई दूसरी लाइन सामने नहीं आई तो सप्लाई कैसे बाधित हो सकती है।
ऐसा है तो भी नई लाइन में पानी आने पर एएनएम सेंटर में नया कनेक्शन कर देंगे। वह खुद सीएमओ से दो बार मिल चुके हैं, स्वास्थ्य मंत्री से भी सीएमओ की बात फोन पर करवा चुके हैं।
अब केवल तीन फीट का एक पाइप जुड़ना है, बाकी लाइन पूरी तरह टीबी अस्पताल की चारदीवारी के साथ बिछाई जा चुकी है। तीन फुट के पाइप के फेर में मालीटिब्बा और नई बस्ती के 3000 लोगों को पानी नसीब नहीं हो रहा।