{"_id":"5bef170ebdec226999177e73","slug":"201542395662-mahendragarh-narnaul-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"रेजांगला की शौर्यगाथा हरियाणा शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में लागू होगी : शिक्षामंत्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रेजांगला की शौर्यगाथा हरियाणा शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में लागू होगी : शिक्षामंत्री
Updated Sat, 17 Nov 2018 12:47 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने यादव धर्मशाला में रेजांगला शौर्य दिवस के मौके पर रेजांगला की वीरता की कथा को हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की कक्षाओं में लागू करने का एलान किया। उन्होंने कहा कि महेंद्रगढ़ में शहीदी स्मारक के लिए भी एक महीने में जमीन उपलब्ध कराएंगे। भूतपूर्व सैनिक संघ महेंद्रगढ़ की ओर से शुक्रवार को यादव धर्मशाला में रेजांगला शौर्य दिवस समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर मुख्यातिथि शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने शहीदों को पुष्प अर्पित किए। उन्होंने रेजांगला की लड़ाई में शामिल रहे हवलदार गजे सिंह सहित अन्य शहीद परिवारों और वीरांगनाओं को सम्मानित किया।
प्रो. रामबिलास शर्मा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश की रक्षा की खातिर शहीद होने वाले सैनिकों के पार्थिव शरीर को उनके घर पहुंचाने की परंपरा शुरू कर सैनिकों को सम्मान दिया। कारगिल में शहादत देने वाले सैनिक की पत्नी सुधा यादव को गुरुग्राम लोकसभा से प्रत्याशी बनाकर संसद भेजने का काम किया। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले रेवाड़ी में सैनिक सम्मान रैली में शिरकत की। सैनिकों की वर्षों पुरानी मांग वन रैंक-वन पेंशन को मंजूरी दी। सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान को सबक सिखाने का काम किया। जांबाज कमांडोंज ने चार घंटे तक पाकिस्तान में घुस कर आतंकवादियों के शिविरों को नष्ट करते हुए 90 आतंकियों को मार गिराया। भूतपूर्व सैनिक संघ के अध्यक्ष कर्नल ओपी यादव की ओर से रखी गई संघ की मांग पर शिक्षामंत्री ने कहा कि महेंद्रगढ़ में शहीदी स्मारक के लिए एक महीने में जमीन उपलब्ध कराएंगे। रेजांगला के शहीदों की वीरता को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए इसे अगले सत्र से हरियाणा शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद धर्मबीर सिंह ने की।
ये है रेजांगला का इतिहास
18 नवंबर 1962 को 13 कुमांऊ रेजिमेंट के 120 जवानों की टुकड़ी पर रेजांगला में करीब 1350 चीनी सैनिकों ने हमला कर दिया था। 18 हजार फुट ऊंची पहाड़ियों पर माइनस 40 डिग्री तापमान में लड़ते हुए इस टुकड़ी के 114 जवान शहीद हो गए थे, जिसमें अधिकतर जवान रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, झुंझुनू क्षेत्र की अहीरवाल बेल्ट के थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
महेंद्रगढ़। शिक्षामंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने यादव धर्मशाला में रेजांगला शौर्य दिवस के मौके पर रेजांगला की वीरता की कथा को हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की कक्षाओं में लागू करने का एलान किया। उन्होंने कहा कि महेंद्रगढ़ में शहीदी स्मारक के लिए भी एक महीने में जमीन उपलब्ध कराएंगे। भूतपूर्व सैनिक संघ महेंद्रगढ़ की ओर से शुक्रवार को यादव धर्मशाला में रेजांगला शौर्य दिवस समारोह आयोजित किया गया। इस मौके पर मुख्यातिथि शिक्षा मंत्री प्रो. रामबिलास शर्मा ने शहीदों को पुष्प अर्पित किए। उन्होंने रेजांगला की लड़ाई में शामिल रहे हवलदार गजे सिंह सहित अन्य शहीद परिवारों और वीरांगनाओं को सम्मानित किया।
प्रो. रामबिलास शर्मा ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने देश की रक्षा की खातिर शहीद होने वाले सैनिकों के पार्थिव शरीर को उनके घर पहुंचाने की परंपरा शुरू कर सैनिकों को सम्मान दिया। कारगिल में शहादत देने वाले सैनिक की पत्नी सुधा यादव को गुरुग्राम लोकसभा से प्रत्याशी बनाकर संसद भेजने का काम किया। नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री बनने से पहले रेवाड़ी में सैनिक सम्मान रैली में शिरकत की। सैनिकों की वर्षों पुरानी मांग वन रैंक-वन पेंशन को मंजूरी दी। सर्जिकल स्ट्राइक कर पाकिस्तान को सबक सिखाने का काम किया। जांबाज कमांडोंज ने चार घंटे तक पाकिस्तान में घुस कर आतंकवादियों के शिविरों को नष्ट करते हुए 90 आतंकियों को मार गिराया। भूतपूर्व सैनिक संघ के अध्यक्ष कर्नल ओपी यादव की ओर से रखी गई संघ की मांग पर शिक्षामंत्री ने कहा कि महेंद्रगढ़ में शहीदी स्मारक के लिए एक महीने में जमीन उपलब्ध कराएंगे। रेजांगला के शहीदों की वीरता को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए इसे अगले सत्र से हरियाणा शिक्षा बोर्ड के पाठ्यक्रम में शामिल किया जाएगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता सांसद धर्मबीर सिंह ने की।
विज्ञापन
ये है रेजांगला का इतिहास
18 नवंबर 1962 को 13 कुमांऊ रेजिमेंट के 120 जवानों की टुकड़ी पर रेजांगला में करीब 1350 चीनी सैनिकों ने हमला कर दिया था। 18 हजार फुट ऊंची पहाड़ियों पर माइनस 40 डिग्री तापमान में लड़ते हुए इस टुकड़ी के 114 जवान शहीद हो गए थे, जिसमें अधिकतर जवान रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, झुंझुनू क्षेत्र की अहीरवाल बेल्ट के थे।
विज्ञापन