फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Mahendragarh/Narnaul News ›   प्रशासन के कैटल फ्री के दावों की निकली हवा

प्रशासन के कैटल फ्री के दावों की निकली हवा

Mon, 18 Jun 2018 12:25 AM IST
Updated Mon, 18 Jun 2018 12:25 AM IST
विज्ञापन
प्रशासन के कैटल फ्री के दावों की निकली हवा
अमर उजाला ब्यूरो
विज्ञापन

नारनौल। बेशक प्रशासन ने नारनौल शहर को कागजों में कैटल फ्री कर दिया हो, लेकिन शहर के हालात अभी भी जस के तस बने हुए हैं। शहर में पहले की भांति अब भी मुख्य बाजारों व मोहल्लों में लावारिस पशु खुले घूमते हुए दिखाई दे रहे हैं। इससे न केवल लोगों को परेशानी हो रही है बल्कि खुले में घूम रहे इन लावारिस पशुओं से हादसा होने का भय बना रहता है। कुछ वर्ष पूर्व भी एक सांड़ ने शहर उत्पात मचाकर कई लोगों को घायल कर दिया था, वहीं एक महिला को मौत के घाट उतार दिया था। हालांकि ऐसे पशुओं को रखने के लिए शहर में तीन बड़ी गोशालाएं बनाई गई हैं। इसमें रघुनाथपुरा स्थित नंदी गोशाला स्वयं प्रशासन अर्थात नगर परिषद चला रहा है। जबकि दो अन्य गोशालाएं भी चंदे पर चलाई जा रही है। तीनों गोशालाओं में हजारों पशु रखे जा रहे है, लेकिन देखरेख के अभाव में पशु गोशालाओं से बाहर निकल जाते हैं।
कुछ समय पूर्व प्रदेश के मुख्यमंत्री ने लावारिस पशुओं को रखने के लिए प्रदेश के सभी जिलों नगर परिषद की जमीन पर गोशाला खोलने के आदेश दिए थे। जिसके बाद प्रशासन ने नारनौल में रघुनाथपुरा की पहाड़ी पर नगर परिषद की खाली पड़ी भूमि पर नंदी गोशाला का निर्माण करवाया गया। इसमें केवल शहर के लावारिस पशुओं को ही रखने का फैसला लिया। इन पशुओं को पकड़ने के लिए नगर परिषद द्वारा टेंडर भी छोड़े गए। इसके बाद ठेकेदार ने शहर से पशुओं को पकड़कर गोशाला भिजवाया गया था, लेकिन कुछ बाद ही दोबारा से शहर में लावारिस पशुओं को जमावड़ा लगने लगा है। शहर के मुख्य सड़क मार्ग, बाजार व गली मोहल्लों में भी अब लावारिस पशु दिखाई देने लगे है। वहीं प्रशासन कागजों में शहर को कैटल फ्री कर चुका है।
विज्ञापन


प्रशासन द्वारा कई बार करवाई गई कार्रवाई
शहरवासियों की मांग पर इन लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए प्रशासन अनेक योजनाएं बना चुका है। इस प्रकार नगर परिषद द्वारा वर्ष 2006 में इन पशुओं को पकड़ने के लिए पशुबाड़ा बनाने की योजना तैयार की थी। जिसके तहत परिषद परिसर में ही बाड़ा बनाकर वहां ऐसे पशुओं को बांधने की योजना थी। मगर बजट कम होने के कारण योजना तीन-चार माह में ही दम तोड़ गई। इसके बाद वर्ष 2010 में बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए ठेके भी छोड़े गए। इसके तहत ठेकेदार को प्रति पशु 100 से 200 रुपये तक देने का प्रावधान किया गया था, मगर गोशाला ने इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई। वहीं 2011 में उपायुक्त के आदेश पर योजना बनाकर गायों व सांड़ों को पकडने के लिए गोशाला को पैसे देने का प्रावधान किया गया। परंतु गोशालाओं द्वारा इसमें कोई रुचि नहीं दिखाई गई। जबकि गत वर्ष पूर्व इन बेसहारा पशुओं को पकड़कर टैग लगाकर गोशालाओं में भिजवाने की योजना तैयार की गई। ताकि पता लग सके की यह पशु गोशाला से छोड़ा गया है या फिर अन्य जगह से आया है। परंतु हर बार ये योजनाएं सिरे नहीं चढ़ पाया। यही कारण है की शहर में अनेक स्थानों पर अभी भी ऐसे पशु दिख रहे है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इन गोशालाओं में है इतने पशु
लावारिस पशुओं को रखने के लिए शहर में तीन गोशालाएं बनाई गई है। इनमें रेवाड़ी रोड स्थित गोपाल गोशाला व निजामपुर रोड स्थित अनाथ गोशाला चंदे की सहायता से चलाई जा रही है, जबकि रघुनाथपुरा की पहाड़ी के नजदीक स्थित नंदी गोशाला नगर परिषद द्वारा चलाई जा रही है। इनमें सबसे अधिक 1200 पशु गोपाल गोशाला में है। इसके बाद 550 के करीब पशु अनाथ गोशाला में रखे गए। वहीं, 450-500 के लगभग नंदी में रखे जा रहे है।

शहर में घूमने वाले बेसहारा पशुओं को पकड़ने के लिए नगर परिषद द्वारा चलाए गए अभियान के दौरान 745 के करीब पशुओं को पकड़कर अलग-अलग गोशालाओं में छोड़ा गया। इसमें रेवाड़ी रोड स्थित गोपाल गोशाला में 250 के करीब ही पशुओं को छोड़ा गया, क्योंकि गोशाला से अधिक पशुओं को लेने से मना कर दिया था। इसके बाद नप ने 45 के करीब बेसहारा पशुओं को निजामपुर रोड स्थित अनाथ गोशाला में छोड़ा गया। वहीं, 450 के लगभग पशुओं को नंदी गोशाला में रखा गया है।

एक पशु के लिए 400 से 500 किए गए निर्धारित
नगर परिषद अधिकारियों के अनुसार शहर में लावारिस पशुओं को पकड़ने के लिए कुछ माह पूर्व टेंडर छोड़े गए थे। जिसमें शहर के ही डायमंड नाम के व्यक्ति को टेंडर दिया गया है। जिसे प्रत्येक पशु को पकड़कर गोशाला में छोड़ने के लिए उसे 400-500 रुपये का भुगतान किया गया है। नगर परिषद अधिकारियों की माने तो इस दौरान शहर में घूमने वाली सभी लावारिस पशुओं को पकड़कर विभिन्न गोशालाओं में छोड़ा जा चुका है। परंतु इस समय शहर में दिखाई दे रहे लावारिस पशु आस-पास के गांवों से छोड़े जा रहे है।

वर्जन
शहर में घूमने वाले बेसहारा पशुओं को रखने के लिए नगर परिषद द्वारा रघुनाथपुरा की पहाड़ी के नजदीक नंदी गोशाला का निर्माण करवाया गया है। इसमें शहर में घूमने वाले बेसहारा पशुओं को पकड़कर रखा जा रहा है। शहर में घूम रहे लावारिस पशु आसपास के गांवों से छोड़े जा रहे है। इन्हें पकड़ने के लिए भी नगर परिषद योजना बना रही है।
- अभय सिंह यादव, ईओ नगर परिषद नारनौल।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed