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लक्ष्मण व मेघनाथ के बीच हुआ भयंकर युद्ध
Updated Sun, 01 Oct 2017 12:39 AM IST
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लक्ष्मण और मेघनाद के बीच हुआ भीषण युद्ध
फोटो नंबर 13
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। श्री धार्मिक रामलीला चांदुवाड़ा के रंगमंच पर शुक्रवार रात मेघनाद वध, कुंभकरण वध तथा चंडी की भेंट आदि लीला का सुंदर मंचन किया गया। रात रामलीला में बतौर मुख्यातिथि व्यापार कल्याण बोर्ड के चेयरमैन गोपाल शरण गर्ग ने शिरकत की।
चेयरमैन गोपाल शरण नेे कहा कि यह रामलीला युवाओं को इस मंच से जोड़कर उनमें जो संस्कार पैदा कर रही है यह बहुत ही सराहनीय है। रामलीला में विशिष्ट अतिथि के रूप में भाजपा युवा मोर्चा के राकेश शर्मा व भूगर्भ वैज्ञानिक वासुदेव यादव मौजूद रहे। रामलीला के मंच पर जैसे ही लक्ष्मण की मुर्छा टूटने का समाचार रावण के दरबार में आया तो रावण बहुत क्रोधित हुए और उसका वध करने के लिए अपने भाई कुंभकरण के पास गए। छह महीनों से गहरी नींद में सोये कुंभकरण को नींद से उठाया जाता है। इसके बाद रावण कुंभकरण को राम से युद्ध करने की बात कहते हैं। इस बीच रावण व कुंभकरण के बीच बड़े ही मार्मिक संवाद होते हैं। कुल की शान रखने के लिए कुंभकरण युद्ध में जाता है और भगवान राम के हाथों उसका वध हो जाता है। इसके बाद रावण पुन: मेघनाद को युद्ध में भेजते हैं। इससे पहले मेघनाद अपनी कुल देवी पूजा करने जाता है। यह सूचना जब भगवान राम के पास पहुंचती है तो वे लक्ष्मण व हनुमान को वहां भेजते हैं और मेघनाद के हवन को सफल नहीं होने देते। इससे गुस्से में आए मेघनाद और लक्ष्मण के बीच भयंकर युद्ध होता है और मेघनाद मारा जाता है। इसके बाद अहिरावण को भेजा जाता है जो राम-लक्ष्मण को मूर्छित कर पाताल में ले जाता है और चंडी की भेंट चढ़ाने को तैयार हो जाता है। इतने में वहां हनुमानजी पहुंचते हैं और अहिरावण का वध कर राम-लक्ष्मण को उसकी कैद से छुड़वाते हैं।
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नारनौल। श्री धार्मिक रामलीला चांदुवाड़ा के रंगमंच पर शुक्रवार रात मेघनाद वध, कुंभकरण वध तथा चंडी की भेंट आदि लीला का सुंदर मंचन किया गया। रात रामलीला में बतौर मुख्यातिथि व्यापार कल्याण बोर्ड के चेयरमैन गोपाल शरण गर्ग ने शिरकत की।
चेयरमैन गोपाल शरण नेे कहा कि यह रामलीला युवाओं को इस मंच से जोड़कर उनमें जो संस्कार पैदा कर रही है यह बहुत ही सराहनीय है। रामलीला में विशिष्ट अतिथि के रूप में भाजपा युवा मोर्चा के राकेश शर्मा व भूगर्भ वैज्ञानिक वासुदेव यादव मौजूद रहे। रामलीला के मंच पर जैसे ही लक्ष्मण की मुर्छा टूटने का समाचार रावण के दरबार में आया तो रावण बहुत क्रोधित हुए और उसका वध करने के लिए अपने भाई कुंभकरण के पास गए। छह महीनों से गहरी नींद में सोये कुंभकरण को नींद से उठाया जाता है। इसके बाद रावण कुंभकरण को राम से युद्ध करने की बात कहते हैं। इस बीच रावण व कुंभकरण के बीच बड़े ही मार्मिक संवाद होते हैं। कुल की शान रखने के लिए कुंभकरण युद्ध में जाता है और भगवान राम के हाथों उसका वध हो जाता है। इसके बाद रावण पुन: मेघनाद को युद्ध में भेजते हैं। इससे पहले मेघनाद अपनी कुल देवी पूजा करने जाता है। यह सूचना जब भगवान राम के पास पहुंचती है तो वे लक्ष्मण व हनुमान को वहां भेजते हैं और मेघनाद के हवन को सफल नहीं होने देते। इससे गुस्से में आए मेघनाद और लक्ष्मण के बीच भयंकर युद्ध होता है और मेघनाद मारा जाता है। इसके बाद अहिरावण को भेजा जाता है जो राम-लक्ष्मण को मूर्छित कर पाताल में ले जाता है और चंडी की भेंट चढ़ाने को तैयार हो जाता है। इतने में वहां हनुमानजी पहुंचते हैं और अहिरावण का वध कर राम-लक्ष्मण को उसकी कैद से छुड़वाते हैं।
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