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महाविद्यालय की गलती, इस बार केवल 60 सीटों पर ही दिया प्रवेश
Updated Thu, 27 Jul 2017 12:40 AM IST
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महाविद्यालय की गलती, इस बार केवल 60 सीटों पर ही दिया प्रवेश
अमर उजाला ब्यूरो
मंडी अटेली। अटेली स्थित राजकीय महाविद्यालय प्रशासन की गलती के चलते इस बार साइंस संकाय की 160 सीटों में से केवल 60 सीटों पर ही प्रवेश किया गया है। इससे क्षेत्र के लोगों में विद्यालय प्रशासन के प्रति रोष पनप रहा है। इसका कारण बढ़ी हुई सीटों की फीस उच्चतर विभाग में जमा न होना बताया जा रहा है।
महाविद्यालय में पिछले चार साल से साइंस संकाय में 160 सीटों में प्रवेश होता आ रहा है। इस बार विश्वविद्यालय में बढ़ी सीटों पर रोक का पत्र आने से प्राचार्य ने केवल 60 सीटों पर ही प्रवेश किया है। साइंस संकाय के सभी विद्यार्थियों को इसका नुकसान हो रहा है। साइंस संकाय में 77 प्रतिशत से ऊपर प्रवेश करने वालों की मेरिट है। अब सवाल उठता है कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ का दोषी कौन है। विद्यालय प्रशासन है या विश्वविद्यालय प्रशासन। पिछले चार सालों से 160 सीटों पर प्रवेश हो रहा था। अब इस बार 60 सीटों पर ही प्रवेश क्यों किया गया। इस बारे में नोडल अधिकारी डॉ. सतीश सैनी ने बताया कि कॉलेज में नया विषय शुरू करने के लिए विश्वविद्यालय में फीस भेजी तो उनको पीछे की बकाया फीस ध्यान आई। उन्होंने 100 सीटों पर प्रवेश अविलंब रोकने का आदेश दे दिया। हमने पिछली बकाया फीस जमा करा दी है। शेष सीटों पर प्रवेश की अनुमति मिलते ही प्रवेश किए जाएंगे।
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अमर उजाला ब्यूरो
मंडी अटेली। अटेली स्थित राजकीय महाविद्यालय प्रशासन की गलती के चलते इस बार साइंस संकाय की 160 सीटों में से केवल 60 सीटों पर ही प्रवेश किया गया है। इससे क्षेत्र के लोगों में विद्यालय प्रशासन के प्रति रोष पनप रहा है। इसका कारण बढ़ी हुई सीटों की फीस उच्चतर विभाग में जमा न होना बताया जा रहा है।
महाविद्यालय में पिछले चार साल से साइंस संकाय में 160 सीटों में प्रवेश होता आ रहा है। इस बार विश्वविद्यालय में बढ़ी सीटों पर रोक का पत्र आने से प्राचार्य ने केवल 60 सीटों पर ही प्रवेश किया है। साइंस संकाय के सभी विद्यार्थियों को इसका नुकसान हो रहा है। साइंस संकाय में 77 प्रतिशत से ऊपर प्रवेश करने वालों की मेरिट है। अब सवाल उठता है कि विद्यार्थियों के भविष्य के साथ हो रहे खिलवाड़ का दोषी कौन है। विद्यालय प्रशासन है या विश्वविद्यालय प्रशासन। पिछले चार सालों से 160 सीटों पर प्रवेश हो रहा था। अब इस बार 60 सीटों पर ही प्रवेश क्यों किया गया। इस बारे में नोडल अधिकारी डॉ. सतीश सैनी ने बताया कि कॉलेज में नया विषय शुरू करने के लिए विश्वविद्यालय में फीस भेजी तो उनको पीछे की बकाया फीस ध्यान आई। उन्होंने 100 सीटों पर प्रवेश अविलंब रोकने का आदेश दे दिया। हमने पिछली बकाया फीस जमा करा दी है। शेष सीटों पर प्रवेश की अनुमति मिलते ही प्रवेश किए जाएंगे।
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