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सरकार के तमाम दावे फैल, नहरी पानी के अभाव में खेती बनी घाटे का सौदा

Mon, 04 Feb 2019 12:39 AM IST
Rohtak Bureau रोहतक ब्यूरो
Updated Mon, 04 Feb 2019 12:39 AM IST
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सरकार के तमाम दावे फैल, नहरी पानी के अभाव में खेती बनी घाटे का सौदा
अमर उजाला ब्यूरो
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सतनाली मंडी। प्रदेश सरकार भले ही अंतिम टेल तक नहरी पानी पहुंचाने के दावे कर रही हो लेकिन उनके ये दावे सतनाली खंड में खोखले साबित हो रहे है। पिछले 40 वर्षो से यहां के किसान भूमिगत जल से धरती की प्यास बुझाते आ रहे है। सतनाली क्षेत्र में हालात यह है कि यहां निकट भविष्य में खेती तो दूर लोगों को पेयजल के लाले भी पड़ सकते है। भाजपा सरकार के आने के बाद किसानों में उम्मीद की किरण जगी थी कि अब उनकी प्यासी धरती की प्यास नहरी पानी से बुझ सकेगी। सरकार के चार साल के कार्यकाल के दौरान अंतिम टेल तक नहरी पानी पहुंचाने के दावे किए जाते रहे है परन्तु चार साल के दौरान में सतनाली खंड की नहरों में पानी नही छोड़ा गया। ऐसे में सरकार के तमाम दावे कोरे साबित हो रहे है।
ध्यान रहे कि दक्षिण हरियाणा के अंतिम छोर पर राजस्थान की सीमा से सटे सतनाली क्षेत्र में नहरी पानी मुख्य मुद्दा रहा है। पिछले 40 सालों के दौरान प्रदेश में अनेक सरकारें आई और गई, लेकिन नहरी पानी से इलाके की धरती की प्यास बुझाने के दावे पूरे नहीं हो पाए। दरअसल, इन्हें पूरा करने के लिए धरातल पर कोई प्रयास नहीं किए गए। ऐसे में क्षेत्र के किसानों के लिए नहरी पानी एक कोरा स्वप्न बनकर रह गया।
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नहरी पानी के आभाव में न केवल क्षेत्र में किसानों के फसल उत्पादन में कमी आई बल्कि खेती करना किसानों के लिए घाटे का सौदा बनकर रह गया है। कृषि में मुनाफा न होने के कारण यहां के किसानों की आर्थिक स्थिति भी दयनीय हो गई है और किसान लगातार कर्ज के बोझ तले दबता चला गया। पेयजल और खेती के लिए यहां के किसान भूमिगत जल पर ही आश्रित है।
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प्राचीन काल से ही यहां के लोग कुओं के माध्यम से पीने के पानी के रूप में भूमिगत जल का ही प्रयोग किया जाता रहा है। समय बदलने के साथ-साथ सरकारी योजनाओं के चलते क्षेत्र में ट्यूबवेल स्थापित किए गए तथा गांवों में बिजली पहुंचाई गई। जिन किसानों ने उस दौर में ट्यूबवेल स्थापित किए थे उनके लिए भी वे अब ज्यादा लाभकारी नहीं रहे है, क्योंकि भूमिगत जल के लगातार दोहन के कारण स्तर गहरा गया जो क्षेत्र के लिए वर्तमान में चिता का विषय बन गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री चौ. बंसीलाल ने 1982 में क्षेत्र के गांवों में नहरों का जाल बिछाया था। इसके बावजूद नहरों में पानी नहीं आ पाया तथा वर्षा की कमी से समस्या और बढ़ गई। क्षेत्र की नहरों में पानी लाने के दावे हर राजनीतिक दल द्वारा किए गए लेकिन 40 वर्ष बीत जाने के बाद भी क्षेत्र की नहरों में पानी नहीं आ पाया। हालात यह है कि क्षेत्र की भूमि बंजर होती जा रही है तथा बरसात की कमी के चलते यहां खेती करना घाटे का सौदा बनकर रह गया है।

इसमें खास बात यह है कि सतनाली की नहरों में पानी छोड़ने का कार्य भिवानी जिले के चरखी दादरी में बैठे नहर विभाग के अधिकारी का है जबकि सतनाली का विधानसभा क्षेत्र महेंद्रगढ़ पड़ता है। इस वजह से सतनाली की नहरों में पानी लाने के लिए न कोई प्रशासनिक अधिकारी दिलचस्पी ले रहे है और न ही स्थानीय विधायक एवं कैबिनेट मंत्री प्रो रामबिलास कोई प्रयास कर रहे है।
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