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मांगों को लेकर नारनौल में जुटे देश भर के रिटायर्ड अर्ध सैनिक

Mon, 06 Nov 2017 09:30 PM IST
Updated Mon, 06 Nov 2017 09:30 PM IST
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मांगों को लेकर नारनौल में जुटे देश भर के रिटायर्ड अर्ध सैनिक
मांगों को लेकर नारनौल में जुटे देश भर के रिटायर्ड अर्ध सैनिक
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- सरकार के सामने रखी अपनी मांगे
- मांगे नहीं मानी तो पांच दिसंबर से दिल्ली में शुरू करेंगे अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल
फोटो नंबर 19 व 20

अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल। देश भर के पैरामिलिट्री रिटायर्ड सैनिकों की एक बैठक सोमवार को नारनौल की यादव धर्मशाला में सरदारा राम बलावा की अध्यक्षता में आयोजित की गई। बैठक में बंतसिंह व प्रीतपाल सिंह अध्यक्ष (पंजाब) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थेे। जबकि बैठक में रघुनंदन उत्तरप्रदेश, विनोद कुमार राजस्थान, रामबीर सिंह तोमर व रामअवतार शर्मा मध्यप्रेदश, मोहम्द अयूम खान और एसएम खान जम्मू कश्मीर, उमेद सिंह मलिक दिल्ली तथा मनवीर हिमाचल आदि मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित थे। बैठक में उपस्थित पैरामिलिट्री सैनिकों को संबोधित करते हुए बंत सिंह ने कहा कि देश की 18 हजार किमी लंबी सीमा रेखाओं की चाक चौकसी करने वाले जवानों, उत्तरी पूर्वी राज्यों में तैनात व कश्मीर घटी व नक्सल बहुल्य राज्यों व हर रोज देश के लिए शहीद होने वाले पैरा मिलिट्री के जवानों के बारे में 7 वें वेतन आयोग और ईसीओएस द्वारा पूरी तरह से जवानों के वेतन भत्ते व सुविधाएं को नकार दिया गया। उन्होंने कहा कि अर्ध सैनिकों की सिविल के चपरासी व क्लर्क से तुलना की गई है। जोकि मात्र आठ घंटे ड्यूटी देकर परिवार के साथ आराम से रहते हैं। जबकि पैरामिलिट्री जवान की ड्यूटी 16 से 20 घंटे की होती है। उन्होंने कहा कि आजादी के बाद ऐसा पहली बार हुआ है। जब लाखों अर्ध सैनिक बलों ने सामूहिक रूप से होली का बहिष्कार किया तो सरकार के पसीने छूट गए। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा अर्धसैनिक बलों की ओर कोई ध्यान न देने के कारण पिछले 5 सालों में 51000 से ऊपर जवान नौकरी छोड़ कर चल गए या वालंटियर पेंशन चले गए। आजादी से लेकर आजतक हजारों जवान नक्सलवाद आतंकवाद, उम्रवाद की भेंट चढ़ गए तथा यह सिलसिला आज भी बदस्तूर जारी है और देश है कि हमें शहीद का दर्जा ही नहीं देता। जब पूरे देश की 15 हजार किमी लंबी सरहद पर बीएसएफ, आईटीबीपी व एसएसबी तैनात है तो हमें पैरामिलिट्री स्पेशल पे क्यों नहीं दे रही है। जब सेना के जवान को सरकार 16 हजार हाइट पर भत्ते के तौर 30-42 हजार रुपये दे रहे हैं तो आईटीबीपी के हिमवीरों को इस तरह का भत्ता क्यों नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि 18 हजार हाइट बर्फीले हिमालय में तैनात है। उन्होंने कहा कि सीआईएसएफ के जवान को मात्र साल में 30 दिन की छुट्टी मिलती है। जबकि सेना और देश के सभी अर्ध सैनिक बलों को 60 दिन का वार्षिक अवकाश मिलता है। इसके चलते आए दिन जवानों में आत्म हत्या तक की नौबत आ रही है। उन्होंने कहा कि गृह राज्य मंत्री द्वारा राज्य सभा में दिए गए बयान की ओर दिलाना चाहते है। जब मंत्री ने संसद में कहा कि अब पैरामिलिट्री स्पेशल पे केंद्रीय अर्ध सैनिक बलों को दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर मंत्री इस प्रकार की झूठी बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 14 अक्टूबर 2016 भोपाल में शौर्य स्मारक के उद्घाटन के मौके पर अनेक घोषणा की थी। जोकि आजतक लागू नही की गई। उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने हमारी उचित मांगे नहीं मानी तो हजारों रिटायर्ड अर्धसैनिक परिवार राज घाट पर 5 दिसंबर को सामूहिक भूख हड़ताल करेंगे तथा अपनी मांगों का एक ज्ञापन प्रधानमंत्री को साैंपेंगे। इस अवसर पर सतबीर सिंह, विरेंद्र सिंह, शिवलाल, जगदीश, राजेंद्र, सुलतान ङ्क्षसह व बीडी यादव आदि उपस्थित थे।
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