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करवा चौथ 2
Updated Sat, 07 Oct 2017 11:03 PM IST
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पूजा का मुहूर्त शाम 5.55 बजे से शाम7.09 मिनट तक रहेगा शुभ
अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। करवा चौथ पर इस बार महिलाओं को पूजा के लिए सिर्फ 1 घंटा 14 मिनट का समय ही मिलेगा। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि में रखा जाता है। पति की लंबी आयु के लिए रखा जाने वाला यह व्रत चंद्रोदय व्यापिनी तिथि में करना चाहिए। चतुर्थी तिथि की शुरुआत आठ अक्तूबर को शाम 4.58 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन नौ अक्तूबर को मध्याह्न 2.16 मिनट पर होगा। इस बार चंद्रोदय 8 अक्तूबर को रात्रि 8.20 मिनट पर हो रहा है। पंडित रवि दत्त शर्मा के अनुसार करवा चौथ पर पूजा का मुहूर्त शाम 5.55 मिनट से शाम 7.09 मिनट तक शुभ रहेगा।
इस अवधि में शुभ की चौघड़िया और सूर्य की होरा रहेगी। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर इस व्रत का समापन किया जाता है। चतुर्थी के देवता भगवान गणेश हैं। इस व्रत में गणेश जी के अलावा शिव-पार्वती, कार्तिकेय और चंद्रमा की भी पूजा की जाती है।
ऐसे करें पूजा
इस दिन गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर कथा सुननी चाहिए। मिट्टी के करवे में गेहूं, ढक्कन में चीनी एवं उसके ऊपर वस्त्र आदि रखकर सास, जेठानी को देना चाहिए। रात में चंद्रमा उदय होने पर छलनी की ओट में चंद्रमा का दर्शन करके अर्घ्य देने के पश्चात व्रत खोलना शुभप्रद रहता है। शास्त्रों के अनुसार महाभारत काल में द्रौपदी ने अर्जुन के लिए यह व्रत किया था।
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अमर उजाला ब्यूरो
महेंद्रगढ़। करवा चौथ पर इस बार महिलाओं को पूजा के लिए सिर्फ 1 घंटा 14 मिनट का समय ही मिलेगा। यह व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि में रखा जाता है। पति की लंबी आयु के लिए रखा जाने वाला यह व्रत चंद्रोदय व्यापिनी तिथि में करना चाहिए। चतुर्थी तिथि की शुरुआत आठ अक्तूबर को शाम 4.58 मिनट पर होगी। इस तिथि का समापन नौ अक्तूबर को मध्याह्न 2.16 मिनट पर होगा। इस बार चंद्रोदय 8 अक्तूबर को रात्रि 8.20 मिनट पर हो रहा है। पंडित रवि दत्त शर्मा के अनुसार करवा चौथ पर पूजा का मुहूर्त शाम 5.55 मिनट से शाम 7.09 मिनट तक शुभ रहेगा।
इस अवधि में शुभ की चौघड़िया और सूर्य की होरा रहेगी। रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देकर इस व्रत का समापन किया जाता है। चतुर्थी के देवता भगवान गणेश हैं। इस व्रत में गणेश जी के अलावा शिव-पार्वती, कार्तिकेय और चंद्रमा की भी पूजा की जाती है।
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ऐसे करें पूजा
इस दिन गेहूं या चावल के 13 दाने हाथ में लेकर कथा सुननी चाहिए। मिट्टी के करवे में गेहूं, ढक्कन में चीनी एवं उसके ऊपर वस्त्र आदि रखकर सास, जेठानी को देना चाहिए। रात में चंद्रमा उदय होने पर छलनी की ओट में चंद्रमा का दर्शन करके अर्घ्य देने के पश्चात व्रत खोलना शुभप्रद रहता है। शास्त्रों के अनुसार महाभारत काल में द्रौपदी ने अर्जुन के लिए यह व्रत किया था।
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