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बवानिया गांव के सत्यनारायण के पास है 500 वर्ष पुरानी देशी एवं विदेशी मुद्राएं
Updated Sat, 16 Dec 2017 10:29 PM IST
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सत्यनारायण ने मुद्राओं के संग्रह को बना लिया शौक
महेंद्रगढ़। शौक में आदमी क्या-क्या नहीं करता है। एक ऐसा की शौक चढ़ा गांव बवानियां के सत्यनारायण अग्रवाल को, जिन्होंने 10 वर्ष की उम्र से ही देश-विदेश की मुद्राओं का संग्रह करना शुरू कर दिया। उन्होंने वर्ष 1958 से मुद्राओं का संग्रह करना शुरू कर दिया। उस समय उनके पास इंडिया की कुछ मुद्राएं ही थीं।
सत्यनारायण ने जब भी कोई विदेशी या देशी पुरानी मुद्राएं किसी के पास देखीं तो उनसे प्रार्थना कर खरीद ली। वर्ष 1717 के दो सिक्के चार सौ रुपये में खरीदे। इस प्रकार उन्होंने मुद्राओं को एकत्रित करने का काम जारी रखा। अभी उनकी उम्र 69 वर्ष की हो चुकी है और उनके पास 500 वर्ष तक की पुरानी देसी-विदेशी मुद्राएं हैं। वर्तमान में सत्यनारायण के पास इंडिया, कनाडा, मैक्सिको, पाकिस्तान, फ्रांस, सिंगापुर, यूएई, कुवैत, बहरीन, बेल्जियम, इराक, श्रीलंका, इटली, बेल्जियम, इराक, भूटान, इंग्लैंड, नीदरलैंड और थाईलैंड की नई और पुरानी 280 मुद्राएं हैं। वे स्कूलों में जाकर पुरानी मुद्राओं की प्रदर्शनी करते हैं और बच्चों को इन मुद्राओं के बारे में बताते हैं। इतना ही नहीं ये मुद्राएं खराब न हो जाएं, इसके लिए उन्होंने थैली में पैक करके सुरक्षित रखा है।
जब ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में व्यापार करने के लिए आई थी तो उस समय यहां नई मुद्राएं बनाई थीं। सत्यनारायण के पास 1808 ई. की मुद्रा है। ईस्ट इंडिया कंपनी की उनके पास 21 सिक्के हैं। इन सिक्कों का साइज जो विजेता खिलाड़ियों को मेडल दिया जाता है, उस साइज का है। इन मुद्राओं पर भगवान शिव, राम, हनुमान आदि की तस्वीरें प्रकाशित हो रखी हैं। इसके अलावा देश के पैसे दमड़ी, धेला, छदामी, पाई, एक आना, दो आना, चवन्नी, एकी, दुग्गी, तीन पैसे, पांच पैसे, दस पैसे, बीस पैसे आदि भी उनके पास हैं।
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500 वर्ष पुरानी मुद्रा है आज भी
सत्यनारायण के पास 500 वर्ष तक की विदेशी मुद्राएं है। उस मुद्रा का साइज ब्रांज मेडल जितना ही है और कांस्य धातु की बनी हुई है। इस मुद्रा पर 768 लिखा हुआ है। इसके अलावा 1751 और 1873 फ्रांस के डालर, 1905 के कनाडा डालर हैं। चांदी के 177 वर्ष पुराने सिक्के भी उनके पास हैं। इसके अतिरिक्त 9 के सिक्के 29 प्रकार का, 2 के सिक्के 22, 5 के सिक्के 49, अठन्नी 17, दस पैसे 12 प्रकार के हैं।
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महेंद्रगढ़। शौक में आदमी क्या-क्या नहीं करता है। एक ऐसा की शौक चढ़ा गांव बवानियां के सत्यनारायण अग्रवाल को, जिन्होंने 10 वर्ष की उम्र से ही देश-विदेश की मुद्राओं का संग्रह करना शुरू कर दिया। उन्होंने वर्ष 1958 से मुद्राओं का संग्रह करना शुरू कर दिया। उस समय उनके पास इंडिया की कुछ मुद्राएं ही थीं।
सत्यनारायण ने जब भी कोई विदेशी या देशी पुरानी मुद्राएं किसी के पास देखीं तो उनसे प्रार्थना कर खरीद ली। वर्ष 1717 के दो सिक्के चार सौ रुपये में खरीदे। इस प्रकार उन्होंने मुद्राओं को एकत्रित करने का काम जारी रखा। अभी उनकी उम्र 69 वर्ष की हो चुकी है और उनके पास 500 वर्ष तक की पुरानी देसी-विदेशी मुद्राएं हैं। वर्तमान में सत्यनारायण के पास इंडिया, कनाडा, मैक्सिको, पाकिस्तान, फ्रांस, सिंगापुर, यूएई, कुवैत, बहरीन, बेल्जियम, इराक, श्रीलंका, इटली, बेल्जियम, इराक, भूटान, इंग्लैंड, नीदरलैंड और थाईलैंड की नई और पुरानी 280 मुद्राएं हैं। वे स्कूलों में जाकर पुरानी मुद्राओं की प्रदर्शनी करते हैं और बच्चों को इन मुद्राओं के बारे में बताते हैं। इतना ही नहीं ये मुद्राएं खराब न हो जाएं, इसके लिए उन्होंने थैली में पैक करके सुरक्षित रखा है।
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जब ईस्ट इंडिया कंपनी भारत में व्यापार करने के लिए आई थी तो उस समय यहां नई मुद्राएं बनाई थीं। सत्यनारायण के पास 1808 ई. की मुद्रा है। ईस्ट इंडिया कंपनी की उनके पास 21 सिक्के हैं। इन सिक्कों का साइज जो विजेता खिलाड़ियों को मेडल दिया जाता है, उस साइज का है। इन मुद्राओं पर भगवान शिव, राम, हनुमान आदि की तस्वीरें प्रकाशित हो रखी हैं। इसके अलावा देश के पैसे दमड़ी, धेला, छदामी, पाई, एक आना, दो आना, चवन्नी, एकी, दुग्गी, तीन पैसे, पांच पैसे, दस पैसे, बीस पैसे आदि भी उनके पास हैं।
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500 वर्ष पुरानी मुद्रा है आज भी
सत्यनारायण के पास 500 वर्ष तक की विदेशी मुद्राएं है। उस मुद्रा का साइज ब्रांज मेडल जितना ही है और कांस्य धातु की बनी हुई है। इस मुद्रा पर 768 लिखा हुआ है। इसके अलावा 1751 और 1873 फ्रांस के डालर, 1905 के कनाडा डालर हैं। चांदी के 177 वर्ष पुराने सिक्के भी उनके पास हैं। इसके अतिरिक्त 9 के सिक्के 29 प्रकार का, 2 के सिक्के 22, 5 के सिक्के 49, अठन्नी 17, दस पैसे 12 प्रकार के हैं।