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हड़ताल पर निजी चिकित्सक, मरीज परेशान
Updated Fri, 15 Dec 2017 09:37 PM IST
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हड़ताल पर निजी चिकित्सक, मरीज परेशान
नारनौल। क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के विरोध में शुक्रवार को आहूत प्रदेश व्यापी हड़ताल में स्थानीय इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हरियाणा चैप्टर से संबंधित सभी निजी चिकित्सक हड़ताल पर रहे। इस कारण जिलेभर के निजी अस्पताल व क्लीनिक यहां तक की दंत चिकित्सकों ने भी अपने अस्पतालों को बंद रखा। हड़ताल के कारण शुक्रवार को लोगों ने सरकारी अस्पताल में इलाज कराना ही बेहतर समझा तथा अन्य दिनों के मुकाबले शुक्रवार को सरकारी अस्पताल में ओपीडी की संख्या में इजाफा रहा। शुक्रवार को सरकारी अस्पताल में 650 मरीजों ने अपना इलाज कराया, जबकि अन्य दिनों 450 से 500 मरीज नागरिक अस्पताल में आते हैं। वहीं एक्ट के विरोध में निजी चिकित्सकों ने प्रदर्शन कर डीडीपीओ को एक ज्ञापन भी सौंपा।
आईएमए के जिला प्रधान एमआर मक्कड़ ने बताया कि 2010 में केंद्र सरकार ने इस एक्ट को प्रभावी किया तथा राज्य सरकार ने 2014 इसे नोटिफाई किया। आईएमए हरियाणा ने इसमें कुछ बदलाव करने का सुझाव दिया था। जिनको मुख्यमंत्री तथा स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार भी कर लिया था। परंतु एनसीआर के कुछ कारपोरेट अस्पतालों की गलतियों की वजह से सभी सुझाव रद्द करके पुराना एक्ट ही फिर से लागू करने का निर्णय ले लिया गया है।
छोटे व मंझले अस्पताल संचालकों को होगा नुकसान
जिला प्रधान ने बताया कि यथारूप में ये एक्ट लागू होने से छोटे एवं मझोले अस्पतालों को बहुत सारी औपचारिकता और नियमों को निभाना होगा। जिसमें अस्पताल में निवेश को कई गुना बढ़ाना होगा साथ ही अस्पताल को चलाने में कई गुना खर्च बढ़ जाएगा। इससे इलाज आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाएगा। और ज्यादातर छोटे निजी अस्पताल बंद होने के कगार पर पहुंच जाएंगे। वहीं आईएमए के सचिव डा. ओपी यादव ने बताया कि आज प्रदेश में 80 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवा छोटे निजी अस्पतालों द्वारा विश्व में सबसे किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जाती हैं। परंतु इस एक्ट के प्रभावी होने से मरीजों को या तो सरकारी अस्पतालों में या महंगे कॉरपोरेट अस्पतालों में जाने को मजबूर होना पड़ेगा।
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मरीजों को हुई परेशानी
निजी चिकित्सकों के हड़ताल पर चले जाने के कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। जिभिन्न दूर दराज से आए मरीज चिकित्सक न मिलने के कारण निराश ही लौटे। वहीं सरकारी अस्पताल में शुक्रवार को अन्य दिनों के मुकाबले अधिक मरीज पहुंचे। वहीं कई मरीज अस्पतालों के चक्कर काटते हुए भी नजर आये।
चिकित्सकों ने प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन
इस एक्ट में जरूरी बदलाव व पुनर्विचार करने के लिए चिकित्सकों ने शहर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद चिकित्सक उपायुक्त निवास पर गए, मगर वहां उपायुक्त न होने के कारण वे पंचायत भवन चले गए। जहां पर उन्होंने डीडीपीओ दीपक यादव को ज्ञापन सौंपा। इस अवसर डा. दीपक सिंघल, डा. राजकुमार शर्मा, डा. एमएम रावत, हितेन्द्र मित्तल, डा. ओपी यादव, डा. दिनेश शर्मा, डा. कमल यादव, डा. मनोज सिंघल, डा. सुरेंद्र यादव डा. रामगोपाल गर्ग, डा. रामावतार यादव आदि रहे।
हड़ताल की जानकारी नहीं थी। इसके कारण वे अपना इलाज कराने के लिए आए थे, मगर यहां देखा तो चिकित्सक हड़ताल पर मिले। इससे काफी परेशानी हुई है।
-मधु
चिकित्सक को दिखाने के लिए नारनौल आया था, पर हड़ताल होने के कारण चिकित्सक नहीं मिले। अब दुबारा शनिवार को आना पड़ेगा।
-धर्मवीर
सरकार जो नया एक्ट लागू करने जा रही है। इससे चिकित्सा महंगी हो जाएगी और निजी अस्पताल बंद होने के कगार पर पहुंच जाएंगे।
-डा. गजराज
सरकार मनमर्जी कर रही है। अगर एक्ट लागू किया जाए तो आईएमए द्वारा सुझाये गए नियमों के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
-डा. राजेंद्र प्रसाद नरूला
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नारनौल। क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के विरोध में शुक्रवार को आहूत प्रदेश व्यापी हड़ताल में स्थानीय इंडियन मेडिकल एसोसिएशन हरियाणा चैप्टर से संबंधित सभी निजी चिकित्सक हड़ताल पर रहे। इस कारण जिलेभर के निजी अस्पताल व क्लीनिक यहां तक की दंत चिकित्सकों ने भी अपने अस्पतालों को बंद रखा। हड़ताल के कारण शुक्रवार को लोगों ने सरकारी अस्पताल में इलाज कराना ही बेहतर समझा तथा अन्य दिनों के मुकाबले शुक्रवार को सरकारी अस्पताल में ओपीडी की संख्या में इजाफा रहा। शुक्रवार को सरकारी अस्पताल में 650 मरीजों ने अपना इलाज कराया, जबकि अन्य दिनों 450 से 500 मरीज नागरिक अस्पताल में आते हैं। वहीं एक्ट के विरोध में निजी चिकित्सकों ने प्रदर्शन कर डीडीपीओ को एक ज्ञापन भी सौंपा।
आईएमए के जिला प्रधान एमआर मक्कड़ ने बताया कि 2010 में केंद्र सरकार ने इस एक्ट को प्रभावी किया तथा राज्य सरकार ने 2014 इसे नोटिफाई किया। आईएमए हरियाणा ने इसमें कुछ बदलाव करने का सुझाव दिया था। जिनको मुख्यमंत्री तथा स्वास्थ्य मंत्री ने स्वीकार भी कर लिया था। परंतु एनसीआर के कुछ कारपोरेट अस्पतालों की गलतियों की वजह से सभी सुझाव रद्द करके पुराना एक्ट ही फिर से लागू करने का निर्णय ले लिया गया है।
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छोटे व मंझले अस्पताल संचालकों को होगा नुकसान
जिला प्रधान ने बताया कि यथारूप में ये एक्ट लागू होने से छोटे एवं मझोले अस्पतालों को बहुत सारी औपचारिकता और नियमों को निभाना होगा। जिसमें अस्पताल में निवेश को कई गुना बढ़ाना होगा साथ ही अस्पताल को चलाने में कई गुना खर्च बढ़ जाएगा। इससे इलाज आम आदमी की पहुंच से बाहर हो जाएगा। और ज्यादातर छोटे निजी अस्पताल बंद होने के कगार पर पहुंच जाएंगे। वहीं आईएमए के सचिव डा. ओपी यादव ने बताया कि आज प्रदेश में 80 प्रतिशत स्वास्थ्य सेवा छोटे निजी अस्पतालों द्वारा विश्व में सबसे किफायती दरों पर उपलब्ध कराई जाती हैं। परंतु इस एक्ट के प्रभावी होने से मरीजों को या तो सरकारी अस्पतालों में या महंगे कॉरपोरेट अस्पतालों में जाने को मजबूर होना पड़ेगा।
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मरीजों को हुई परेशानी
निजी चिकित्सकों के हड़ताल पर चले जाने के कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। जिभिन्न दूर दराज से आए मरीज चिकित्सक न मिलने के कारण निराश ही लौटे। वहीं सरकारी अस्पताल में शुक्रवार को अन्य दिनों के मुकाबले अधिक मरीज पहुंचे। वहीं कई मरीज अस्पतालों के चक्कर काटते हुए भी नजर आये।
चिकित्सकों ने प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन
इस एक्ट में जरूरी बदलाव व पुनर्विचार करने के लिए चिकित्सकों ने शहर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद चिकित्सक उपायुक्त निवास पर गए, मगर वहां उपायुक्त न होने के कारण वे पंचायत भवन चले गए। जहां पर उन्होंने डीडीपीओ दीपक यादव को ज्ञापन सौंपा। इस अवसर डा. दीपक सिंघल, डा. राजकुमार शर्मा, डा. एमएम रावत, हितेन्द्र मित्तल, डा. ओपी यादव, डा. दिनेश शर्मा, डा. कमल यादव, डा. मनोज सिंघल, डा. सुरेंद्र यादव डा. रामगोपाल गर्ग, डा. रामावतार यादव आदि रहे।
हड़ताल की जानकारी नहीं थी। इसके कारण वे अपना इलाज कराने के लिए आए थे, मगर यहां देखा तो चिकित्सक हड़ताल पर मिले। इससे काफी परेशानी हुई है।
-मधु
चिकित्सक को दिखाने के लिए नारनौल आया था, पर हड़ताल होने के कारण चिकित्सक नहीं मिले। अब दुबारा शनिवार को आना पड़ेगा।
-धर्मवीर
सरकार जो नया एक्ट लागू करने जा रही है। इससे चिकित्सा महंगी हो जाएगी और निजी अस्पताल बंद होने के कगार पर पहुंच जाएंगे।
-डा. गजराज
सरकार मनमर्जी कर रही है। अगर एक्ट लागू किया जाए तो आईएमए द्वारा सुझाये गए नियमों के अनुसार ही किया जाना चाहिए।
-डा. राजेंद्र प्रसाद नरूला