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प्रदूषण विभाग की टीम ने मोखूता नदी में मारा छापा, करीब आधा दर्ज प्लांट चालू मिले
Updated Tue, 07 Nov 2017 10:10 PM IST
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प्रदूषण विभाग की टीम ने मोखूता नदी में मारा छापा, करीब आधा दर्ज प्लांट चालू मिले
- बिना कार्रवाई वापस लौटे अधिकारी, आक्रोशित ग्रामीणों ने की प्रशासन के विरोध में नारेबाजी
फोटो नंबर 24 व 25
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल।
निजामपुर के नजदीक मौखूता की नदी में धड़ल्ले से चल रहे बजरी वाशिंग प्लांटों से परेशान ग्रामीणों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की गुहार लगाई थी। ग्रामीणों की मांग पर मंगलवार शाम प्रदूषण विभाग की टीम नदी में पहुंची। जहां टीम को 8-9 प्लांट चालू हालात में मिले, लेकिन टीम अधिकारी बिना कार्रवाई किए ही वापस लौटे गए। इससे गुस्साएं ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने बताया कि निजामपुर और नांगल चौधरी में भूजल स्रोत सूख गया। बोरवेल ठप होने के कारण गांवों में पेयजल संकट उत्पन्न हो गया। रिचार्ज को लेकर सरकार द्वारा 8 दिसंबर 2006 को नारनौल, निजामपुर, नांगल चौधरी ब्लॉक डार्क जोन घोषित कर दिया। जिसमें तहत पानी की अनावश्यक बर्बादी और बोरवेल लगाने पर प्रति बंद लगा दिया गया। बावजूद खनन माफियाओं ने मौखूता नदी में वाशिंग प्लांट स्थापित कर लिए। जिन पर धल्लड़े से कृषि बोरवेलों का पानी इस्तेमाल किया जा रहा है। अंधाधुंध दोहन होने के कारण अधिकांश गांवों में पेयजल समस्या बढ़ गई। ग्रामीणों ने पहले प्लांट संचालकों को पानी इस्तेमाल नहीं करने की चेतावनी दी थी। किंतु उन्होंने उच्चाधिकारियों की धौंस दिखाकर चेतावनी को नजरंदाज कर दिया। इसके बाद उपायुक्त डॉ. गरिमा मित्तल को ज्ञापन सौंपा गया। उन्होंने खनन व प्रदूषण विभाग को तत्परता पूर्वक कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके निर्देशानुसार मंगलवार को प्रदूषण विभाग के एसडीओ अपनी टीम के साथ निरीक्षण करने प्लांटों पर पहुंचे। परंतु कार्रवाई से बेखौफ संचालकों ने टीम को देखकर भी अवैध बजरी वाशिंग करना बंद नहीं किया। संचालकों के साथ 15-20 मिनट वार्तालाप करने के बाद अधिकारी बैरंग वापस लौट गए। ग्रामीणों ने बताया कि निरीक्षण के दौरान माफिया व अधिकारी खिल खिलाकर हंसते हुए देखे गए। जिससे साबित होता है, विभागीय मिलीभगत से ही अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि माफिया प्रतिबंधित क्षेत्र में भी बजरी खनन करता है, जिससे अदालती आदेशों की अवहेलना होने के अलावा सरकार के राजस्व की चोरी हो रही है।
कार्रवाई नहीं हुई, तो धरने की बनेगी रूपरेखा
ग्रामीणों ने बताया कि वाशिंग प्लांटों से पेयजल समस्या के साथ प्रदूषण भी बढ़ रहा है। इस समस्या से जिला प्रशासन व विभागीय अधिकारियों को कई बार अवगत करवा दिया गया। किंतु मिलीभगत व राजनीतिक पहुंच के चलते इन माफियाओं पर कार्रवाई नहीं होती। अब स्थिति गंभीर हो चुकी, जल्द ही जिला मुख्यालय पर धरने की रूपरेखा बनाई जाएगी।
हरे पेड़ों को नुकसान हुआ है, कार्रवाई करेंगे
निरीक्षण के दौरान खनन अधिकारी राजेश सांगवान, एसडीओ प्रदूषण विभाग से कार्रवाई के संदर्भ में पूछाथ गया, किंतु उन्होंने जवाब नहीं दिया। इसके बाद फारेस्टर सुरेंद्र सिंह ने बताया कि बजरी खनन के दौरान प्लांट संचालकों ने हरे पेड़ों को नुकसान पहुंचाया है। जांच के बाद कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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- सीएम को सौंपगें ज्ञापन
फर्जी कार्रवाई से आक्रोशित मौखूता के ग्रामीणों की बैठक हुई। जिसमें प्रशासन व विभाग की कार्यशैली पर रोष व्यक्त किया गया। उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह सीएम मनोहरलाल जिले दो दिन प्रवास करेंगे। इस दौरान उन्हें ओवरलोड, अवैध खनन तथा वाशिंग प्लांटों के खिलाफ ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसको लेकर जल्द ही पांच गांवों का प्रतिनिधि मंडल चुना जाएगा।
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- बिना कार्रवाई वापस लौटे अधिकारी, आक्रोशित ग्रामीणों ने की प्रशासन के विरोध में नारेबाजी
फोटो नंबर 24 व 25
अमर उजाला ब्यूरो
नारनौल।
निजामपुर के नजदीक मौखूता की नदी में धड़ल्ले से चल रहे बजरी वाशिंग प्लांटों से परेशान ग्रामीणों ने उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की गुहार लगाई थी। ग्रामीणों की मांग पर मंगलवार शाम प्रदूषण विभाग की टीम नदी में पहुंची। जहां टीम को 8-9 प्लांट चालू हालात में मिले, लेकिन टीम अधिकारी बिना कार्रवाई किए ही वापस लौटे गए। इससे गुस्साएं ग्रामीणों ने प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने बताया कि निजामपुर और नांगल चौधरी में भूजल स्रोत सूख गया। बोरवेल ठप होने के कारण गांवों में पेयजल संकट उत्पन्न हो गया। रिचार्ज को लेकर सरकार द्वारा 8 दिसंबर 2006 को नारनौल, निजामपुर, नांगल चौधरी ब्लॉक डार्क जोन घोषित कर दिया। जिसमें तहत पानी की अनावश्यक बर्बादी और बोरवेल लगाने पर प्रति बंद लगा दिया गया। बावजूद खनन माफियाओं ने मौखूता नदी में वाशिंग प्लांट स्थापित कर लिए। जिन पर धल्लड़े से कृषि बोरवेलों का पानी इस्तेमाल किया जा रहा है। अंधाधुंध दोहन होने के कारण अधिकांश गांवों में पेयजल समस्या बढ़ गई। ग्रामीणों ने पहले प्लांट संचालकों को पानी इस्तेमाल नहीं करने की चेतावनी दी थी। किंतु उन्होंने उच्चाधिकारियों की धौंस दिखाकर चेतावनी को नजरंदाज कर दिया। इसके बाद उपायुक्त डॉ. गरिमा मित्तल को ज्ञापन सौंपा गया। उन्होंने खनन व प्रदूषण विभाग को तत्परता पूर्वक कार्रवाई के निर्देश दिए। उनके निर्देशानुसार मंगलवार को प्रदूषण विभाग के एसडीओ अपनी टीम के साथ निरीक्षण करने प्लांटों पर पहुंचे। परंतु कार्रवाई से बेखौफ संचालकों ने टीम को देखकर भी अवैध बजरी वाशिंग करना बंद नहीं किया। संचालकों के साथ 15-20 मिनट वार्तालाप करने के बाद अधिकारी बैरंग वापस लौट गए। ग्रामीणों ने बताया कि निरीक्षण के दौरान माफिया व अधिकारी खिल खिलाकर हंसते हुए देखे गए। जिससे साबित होता है, विभागीय मिलीभगत से ही अवैध कारोबार को बढ़ावा मिल रहा है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि माफिया प्रतिबंधित क्षेत्र में भी बजरी खनन करता है, जिससे अदालती आदेशों की अवहेलना होने के अलावा सरकार के राजस्व की चोरी हो रही है।
कार्रवाई नहीं हुई, तो धरने की बनेगी रूपरेखा
ग्रामीणों ने बताया कि वाशिंग प्लांटों से पेयजल समस्या के साथ प्रदूषण भी बढ़ रहा है। इस समस्या से जिला प्रशासन व विभागीय अधिकारियों को कई बार अवगत करवा दिया गया। किंतु मिलीभगत व राजनीतिक पहुंच के चलते इन माफियाओं पर कार्रवाई नहीं होती। अब स्थिति गंभीर हो चुकी, जल्द ही जिला मुख्यालय पर धरने की रूपरेखा बनाई जाएगी।
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हरे पेड़ों को नुकसान हुआ है, कार्रवाई करेंगे
निरीक्षण के दौरान खनन अधिकारी राजेश सांगवान, एसडीओ प्रदूषण विभाग से कार्रवाई के संदर्भ में पूछाथ गया, किंतु उन्होंने जवाब नहीं दिया। इसके बाद फारेस्टर सुरेंद्र सिंह ने बताया कि बजरी खनन के दौरान प्लांट संचालकों ने हरे पेड़ों को नुकसान पहुंचाया है। जांच के बाद कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
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- सीएम को सौंपगें ज्ञापन
फर्जी कार्रवाई से आक्रोशित मौखूता के ग्रामीणों की बैठक हुई। जिसमें प्रशासन व विभाग की कार्यशैली पर रोष व्यक्त किया गया। उन्होंने कहा कि अगले सप्ताह सीएम मनोहरलाल जिले दो दिन प्रवास करेंगे। इस दौरान उन्हें ओवरलोड, अवैध खनन तथा वाशिंग प्लांटों के खिलाफ ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसको लेकर जल्द ही पांच गांवों का प्रतिनिधि मंडल चुना जाएगा।