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घूंघट प्रथा को खत्म करने के लिए म्हारा बाणा पर्दा मुक्त हरियाणा की शुरुआत

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 26 Aug 2021 01:38 AM IST
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To end the practice of veil, the beginning of Mhara Bana Purdah Mukt Haryana
प्रदेश में लैंगिक असमानता मिटाने को महिलाओं की सजग प्रहरी बनी डॉ. संतोष दहिया लगातार उनकी आवाज उठाने का काम कर रही हैं। इन्होंने प्रदेश में घूंघट प्रथा खत्म करने के लिए अभियान चलाया जो पूरे प्रदेश में पहुंचा। सर्व जातीय सर्व खाप महिला महापंचायत की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष दहिया ने अपने इस अभियान से पूरे प्रदेश में हजारों महिलाओं को पर्दे से मुक्ति दिलाई। इसी अभियान को आंदोलन का रूप देने के लिए उन्होंने कई वर्षों तक कड़ी मेहनत की और इसका असर भी दिखा। पर्दा मुक्त व कन्या भ्रूण हत्या के खिलाफ अभियान के लिए उन्हें तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने सम्मानित भी किया।
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डॉ. संतोष दहिया ने वर्ष 2014 में कुरुक्षेत्र के पिपली गांव से म्हारा बाणा पर्दा मुक्त हरियाणा की शुरुआत की। उस समय कुरुक्षेत्र का पिपली गांव डॉ. दहिया के प्रयासों से प्रदेश का पहला ऐसा गांव बना जो पूर्ण रूप से पर्दा मुक्त हुआ। कैथल के मानस गांव में देश की पहली महिला महापंचायत की गई, जिसमें गांव की दोनों सरपंचों को घूंघट से बाहर निकलकर लोगों के लिए काम करने के लिए प्रेरित किया। वर्ष 2010 में देश की सर्व जातीय सर्व खाप महापंचायत की पहली महिला राष्ट्रीय अध्यक्ष होने का गौरव हासिल किया। खाप पंचायतों के साथ मिलकर ऑनर किलिंग के विरुद्ध एक बड़ा जागरूकता अभियान चलाया।
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डॉ. दहिया ने बताया कि उन्होंने 22 वर्ष पहले कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए हस्ताक्षर अभियान चलाया। उस वक्त कुरुक्षेत्र में 1000 लड़कों के अनुपात में केवल 756 लड़कियां थी। डॉक्टर संतोष दहिया ने गांव, स्कूल, कॉलेज और पंचायतों में जा जाकर एक हस्ताक्षर अभियान शुरू किया, जिसमें सभी से बढ़चढ़कर भाग लिया। वर्ष 2013 में प्रदेश के सबसे कम लिंगानुपात वाले गांव मुजादपुर को गोद लिया, जहां पर 1000 लड़कों के अनुपात में केवल 273 लड़कियां थी। गांव में जाकर लोगों को प्रेरित किया और आज वहां का लिंगानुपात लगातार बढ़ रहा है।
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डॉ. संतोष दहिया को देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय हरियाणा सरकार, पूर्व उप प्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल, राज्यसभा सांसद दारा सिंह, राज्यसभा सांसद विजय तरुण, हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, चौधरी ओम प्रकाश चौटाला, पूर्व राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी, हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल, राज्यपाल आचार्य देवव्रत सहित अनेक सामाजिक एवं राजनीतिक संस्थाएं सम्मानित कर चुकी हैं।

डॉ. दहिया ने बताया कि बज वह 17 साल की थीं। सिरसा में वॉलीबॉल पुरुष और महिला नेशनल प्रतियोगिता हुई। जिसमें वह लड़कियों में हरियाणा की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बनी और लड़कों में भी एक लड़का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी बना, लेकिन यहां भी भेदभाव हुआ। लड़के को इनाम के तौर पर 500 और उसे 200 रुपये दिए गए। उसने तुरंत इसका विरोध किया। तत्कालीन मुख्यमंत्री ताऊ देवीलाल को पता लगने पर उन्होंने मुझे बुलाकर 500 रुपये इनाम दिया और प्रोत्साहित किया कि इसी तरह बच्चियों के साथ होने वाले भेदभाव के विरुद्ध आवाज उठाती रहे। स्विमिंग कॉस्टयूम पहनने की इजाजत नहीं थी इसलिए स्कूल स्टेट चैंपियनशिप में 4 गोल्ड मेडल जीतने के बावजूद स्विमिंग छोड़नी पड़ी थी। स्विमिंग छोड़ी, लेकिन संघर्ष नहीं छोड़ा।
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