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Kurukshetra News: एक राग दो स्वर नाटक देख दर्शक भावविभोर
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कुरुक्षेत्र। दो स्वर नाटक का मंचन करते कलाकार। विज्ञप्ति
कुरुक्षेत्र। नाट्यम पंजाब की ओर से हर वर्ष की भांति भटिंडा के नवनिर्मित बलवंत गार्गी ऑडिटोरियम में 13वें नाट्यम नेशनल थियेटर फेस्टिवल का आयोजन किया गया, जिसमें हरियाणा कला परिषद की ओर से नाटक एक राग दो स्वर का मंचन हुआ।
कीर्ति कृपाल और उनकी टीम द्वारा आयोजित नाट्य उत्सव में विकास शर्मा के निर्देशन और राजेंद्र कुमार शर्मा के लेखन में प्रस्तुत नाटक एक राग दो स्वर के मंचन के दौरान मुख्यअतिथि के रूप में पंजाब राज्य व्यापारी आयोग निर्यात और कराधान विभाग के अध्यक्ष अनिल कुमार ठाकुर और विशिष्ट अतिथि सिल्वर ओक्स स्कूल के निदेशक इंद्रजीत बराड़ ने शिरकत की।
न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप के कलाकारों द्वारा अभिनीत नाटक के जरिए आधुनिक परिवेश में पति-पत्नी के रिश्ते को दर्शाया गया। नाटक में दिखाया गया कि सुरेंद्र और सरला हमेशा लड़ते-झगड़ते रहते हैं, जिससे उनकी बेटी पिंकी को भी माता-पिता का प्यार नहीं मिल पाता।
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वहीं सुरेंद्र का मित्र अनिल उनके बीच आए दिन हो रहे झगड़े से दुखी रहता है। इसी बीच जब सुरेंद्र के पिताजी उसके घर पर रहने के लिए आते हैं तो वो भी झगड़े का दृश्य देखकर काफी निराश हो जाते हैं और वापस लौट जाते हैं।
पति-पत्नी के इस झगड़े को समाप्त करने के लिए सुरेंद्र का दोस्त अनिल और पिताजी मिलकर एक योजना बनाते हैं। अनिल बाबा जी का भेष बनाकर सुरेंद्र और सरला के पास आता है और उन दोनों का हाथ देखकर सुरेंद्र को बताते हैं कि आज से तीन महीने बाद उसकी पत्नी का देहांत हो जाएगा।
इसी प्रकार सरला को भी बताता है कि उसके पति का देहांत हो जाएगा। ये सुनकर दोनों पति-पत्नी काफी परेशान हो जाते हैं। इस समस्या के निदान के लिए वे दोनों बाबा जी से उपाय पूछते हैं।
बाबा जी उपाय में बताते हैं कि तुम दोनों तीन महीने तक कोई झगड़ा नहीं करोगे और प्रेमपूर्वक रहोगे। बाबा की बतायी हुई शर्त को वे स्वीकार कर लेते हैं और तीन महीने सुख से रहते हैं। जब अष्टमी के दिन उनको कुछ नहीं होता है तभी अनिल बाबा का भेष बदलकर सामने आता है और सारी कहानी को बयां करता है।
नाटक में एक ओर जहां कलाकारों ने अपने अभिनय से सभी को बांधे रखा, वहीं हास्य-व्यंग्य से भरे संवाद लोगों को गुदगुदाया। नाटक में सुरेंद्र की भूमिका सागर शर्मा ने निभाई वहीं पत्नी सरला मनू महक माल्यान बनी। अनिल दीपक जांगड़ा, पिता जी अमरदीप जांगड़ा, नौकरानी राजकुमारी, पिंकी नव्या मेहता, फूलचंद चंचल बने।
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कीर्ति कृपाल और उनकी टीम द्वारा आयोजित नाट्य उत्सव में विकास शर्मा के निर्देशन और राजेंद्र कुमार शर्मा के लेखन में प्रस्तुत नाटक एक राग दो स्वर के मंचन के दौरान मुख्यअतिथि के रूप में पंजाब राज्य व्यापारी आयोग निर्यात और कराधान विभाग के अध्यक्ष अनिल कुमार ठाकुर और विशिष्ट अतिथि सिल्वर ओक्स स्कूल के निदेशक इंद्रजीत बराड़ ने शिरकत की।
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न्यू उत्थान थियेटर ग्रुप के कलाकारों द्वारा अभिनीत नाटक के जरिए आधुनिक परिवेश में पति-पत्नी के रिश्ते को दर्शाया गया। नाटक में दिखाया गया कि सुरेंद्र और सरला हमेशा लड़ते-झगड़ते रहते हैं, जिससे उनकी बेटी पिंकी को भी माता-पिता का प्यार नहीं मिल पाता।
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वहीं सुरेंद्र का मित्र अनिल उनके बीच आए दिन हो रहे झगड़े से दुखी रहता है। इसी बीच जब सुरेंद्र के पिताजी उसके घर पर रहने के लिए आते हैं तो वो भी झगड़े का दृश्य देखकर काफी निराश हो जाते हैं और वापस लौट जाते हैं।
पति-पत्नी के इस झगड़े को समाप्त करने के लिए सुरेंद्र का दोस्त अनिल और पिताजी मिलकर एक योजना बनाते हैं। अनिल बाबा जी का भेष बनाकर सुरेंद्र और सरला के पास आता है और उन दोनों का हाथ देखकर सुरेंद्र को बताते हैं कि आज से तीन महीने बाद उसकी पत्नी का देहांत हो जाएगा।
इसी प्रकार सरला को भी बताता है कि उसके पति का देहांत हो जाएगा। ये सुनकर दोनों पति-पत्नी काफी परेशान हो जाते हैं। इस समस्या के निदान के लिए वे दोनों बाबा जी से उपाय पूछते हैं।
बाबा जी उपाय में बताते हैं कि तुम दोनों तीन महीने तक कोई झगड़ा नहीं करोगे और प्रेमपूर्वक रहोगे। बाबा की बतायी हुई शर्त को वे स्वीकार कर लेते हैं और तीन महीने सुख से रहते हैं। जब अष्टमी के दिन उनको कुछ नहीं होता है तभी अनिल बाबा का भेष बदलकर सामने आता है और सारी कहानी को बयां करता है।
नाटक में एक ओर जहां कलाकारों ने अपने अभिनय से सभी को बांधे रखा, वहीं हास्य-व्यंग्य से भरे संवाद लोगों को गुदगुदाया। नाटक में सुरेंद्र की भूमिका सागर शर्मा ने निभाई वहीं पत्नी सरला मनू महक माल्यान बनी। अनिल दीपक जांगड़ा, पिता जी अमरदीप जांगड़ा, नौकरानी राजकुमारी, पिंकी नव्या मेहता, फूलचंद चंचल बने।

कुरुक्षेत्र। दो स्वर नाटक का मंचन करते कलाकार। विज्ञप्ति