{"_id":"6a481a546f61339e220526e7","slug":"saint-kabir-showed-the-path-to-society-gyananand-kurukshetra-news-c-45-1-kur1009-157282-2026-07-04","type":"story","status":"publish","title_hn":"संत कबीर ने समाज को दिखाई राह : ज्ञानानंद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
संत कबीर ने समाज को दिखाई राह : ज्ञानानंद
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। गीता ज्ञान संस्थानम के सभागार में संत कबीर दास को समर्पित सम्मेलन में मंचासीन स्वा
कुरुक्षेत्र। संत कबीर भारतीय संस्कृति की सर्वधर्म समभाव और वसुधैव कुटुंबकम परंपरा के संवाहक के साथ इतिहास के अनमोल रत्न थे। उन्होंने किसी भी धर्म, संप्रदाय और जाति की परवाह किए बिना खरी बात कही। यह विचार स्वामी ज्ञानानंद ने रखे। वह संत कबीर के 629वें राज्य स्तरीय प्रकाश उत्सव के उपलक्ष्य में सामाजिक समरसता सम्मेलन में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे।
गीता ज्ञान संस्थानम के सभागार में आयोजित सम्मेलन में सामजिक समरसता का संदेश दिया गया। सभी धर्मों एवं जाति के लोगों ने संत कबीर के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। श्री कबीर धानक समाज धर्मशाला के प्रधान जयनारायण खटक बतौर संयोजक शामिल हुए। भजन कीर्तन का सिलसिला चला। महाराणा प्रताप स्कूल की छात्रा वैष्णवी और गीता निकेतन स्कूल से काव्या चौधरी ने कबीर के दोहे सुनाए। स्वामी ने कहा कि ज्ञान की प्राप्ति तीन तरह से होती है। इसमें शास्त्र, गुरु और साधना शामिल है। संत कबीर ने साधना के जरिये ज्ञान की प्राप्ति की और गुरु ग्रंथ साहिब में संत कबीर की वाणी को सम्मान दिया गया है। परम तत्व ही गुरु तत्व होता है, जोकि समाज में बदलाव की अलख जगाता है। जब समाज अंधविश्वास, पाखंड, छुआछूत और रूढ़िवादिता के गहरे अंधकार में डूबा हुआ था। ऐसे में संत कबीर दास का जन्म ज्योति स्वरूप हुआ, जिन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी से पूरे समाज को नई राह दिखाई।
प्रो. विजय कायत ने कहा कि संत शिरोमणि कबीर दास का जीवन सत्य की खोज और असत्य के निर्भीक खंडन में बीता। वे बाहरी दिखावे से दूर, भीतर के प्रकाश के साधक थे। संत कबीर दास का व्यक्तित्व साधारण नहीं था। वे फक्कड़, बेबाक और सत्य के पक्षधर थे। जीओ गीता सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने कहा कि संत कबीर दास जैसी महान विभूतियों की शिक्षाएं पूरे मानव समाज की धरोहर हैं।
विज्ञापन
इस अवसर पर चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो विजय कायत, कुरुक्षेत्र सांसद कार्यालय प्रभारी धर्मवीर सिंह और स्वामी संगम नाथ सहित प्रो आरके देशवाल, एडवोकेट महेंद्र सिंह तंवर, प्रो शुचिसुमिता, डॉ. संगीता, डॉ. सुनील भारती, डॉ. सुरेंद्र वर्मा, डॉ. देवेंद्र बीबीपुर, डॉ. ऋषिपाल, हरि सिंह, राजेश सैन, अमित शर्मा, श्री कबीर धानक समाज धर्मशाला सभा से महासचिव नरेंद्र खटक सहित अन्य मौजूद रहे।
विज्ञापन
गीता ज्ञान संस्थानम के सभागार में आयोजित सम्मेलन में सामजिक समरसता का संदेश दिया गया। सभी धर्मों एवं जाति के लोगों ने संत कबीर के आदर्शों पर चलने का संकल्प लिया। श्री कबीर धानक समाज धर्मशाला के प्रधान जयनारायण खटक बतौर संयोजक शामिल हुए। भजन कीर्तन का सिलसिला चला। महाराणा प्रताप स्कूल की छात्रा वैष्णवी और गीता निकेतन स्कूल से काव्या चौधरी ने कबीर के दोहे सुनाए। स्वामी ने कहा कि ज्ञान की प्राप्ति तीन तरह से होती है। इसमें शास्त्र, गुरु और साधना शामिल है। संत कबीर ने साधना के जरिये ज्ञान की प्राप्ति की और गुरु ग्रंथ साहिब में संत कबीर की वाणी को सम्मान दिया गया है। परम तत्व ही गुरु तत्व होता है, जोकि समाज में बदलाव की अलख जगाता है। जब समाज अंधविश्वास, पाखंड, छुआछूत और रूढ़िवादिता के गहरे अंधकार में डूबा हुआ था। ऐसे में संत कबीर दास का जन्म ज्योति स्वरूप हुआ, जिन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी से पूरे समाज को नई राह दिखाई।
विज्ञापन
प्रो. विजय कायत ने कहा कि संत शिरोमणि कबीर दास का जीवन सत्य की खोज और असत्य के निर्भीक खंडन में बीता। वे बाहरी दिखावे से दूर, भीतर के प्रकाश के साधक थे। संत कबीर दास का व्यक्तित्व साधारण नहीं था। वे फक्कड़, बेबाक और सत्य के पक्षधर थे। जीओ गीता सचिव मदन मोहन छाबड़ा ने कहा कि संत कबीर दास जैसी महान विभूतियों की शिक्षाएं पूरे मानव समाज की धरोहर हैं।
विज्ञापन
इस अवसर पर चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो विजय कायत, कुरुक्षेत्र सांसद कार्यालय प्रभारी धर्मवीर सिंह और स्वामी संगम नाथ सहित प्रो आरके देशवाल, एडवोकेट महेंद्र सिंह तंवर, प्रो शुचिसुमिता, डॉ. संगीता, डॉ. सुनील भारती, डॉ. सुरेंद्र वर्मा, डॉ. देवेंद्र बीबीपुर, डॉ. ऋषिपाल, हरि सिंह, राजेश सैन, अमित शर्मा, श्री कबीर धानक समाज धर्मशाला सभा से महासचिव नरेंद्र खटक सहित अन्य मौजूद रहे।