फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Haryana ›   Kurukshetra News ›   Research will be done on producing medicinal plants from cow dung, Kurukshetra

गाय के गोबर से औषधीय पौधे उपजाने पर होगा शोध

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 03 Feb 2022 01:00 AM IST
विज्ञापन
Research will be done on producing medicinal plants from cow dung, Kurukshetra
कार्यक्रम में हिस्सा लेते कुलपति डॉ. बलदेव कुमार धीमान व अन्य। संवाद - फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
विज्ञापन

कुरुक्षेत्र। श्रीकृष्णा आयुष विश्वविद्यालय और हरियाणा गो सेवा आयोग पंचगव्य औषधियों पर शोध करेंगे। शोध के साथ-साथ रोजगार स्वावलंबन के लिए गाय के गोबर आधारित खाद से औषधीय पौधों के उपजाने और उनकी गुणवत्ता जांचने पर भी कार्य किया जाएगा।
बुधवार को श्रीकृष्णा आयुष विवि के कुलपति डॉ. बलदेव कुमार और हरियाणा गो सेवा आयोग के चेयरमैन श्रवण कुमार गर्ग के बीच ऑनलाइन समझौता हुआ। इस दौरान शोध कार्य के लिए विश्वविद्यालय से रिसर्च एंड इनोवेशन विभाग के निदेशक डॉ. अनिल शर्मा, डॉ. रजनीकांत और आयोग की ओर से तकनीकी सलाहकार सुधीर राणा को सदस्य नियुक्त किया गया है। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बलदेव कुमार ने आयोग द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की और कहा कि गोवंश के संवर्धन और उत्पाद पर दोनों संस्थान मिलकर अच्छा काम कर सकते हैं, जिसमें शोध के सभी पैरामीटर आयुर्वेद और भारतीय परंपरा के अनुसार हों। कहा कि विश्वविद्यालय का मकसद वैदिक परंपरा और विज्ञान को बढ़ावा देना है।
विज्ञापन

बताया कि एक शोध में पाया गया है कि गेहूं के कारण कुछ लोगों के शरीर में एलर्जी होने लगी है। ये एलर्जी गेहूं के छिलके में पाई गई है। बताया कि पंचगव्य घृत और गो आर्क से रोग को ठीक किया जा सकता है। इसी तरह बहुत सारे रोग हैं, जिन पर मिलकर काम किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रिसर्च एवं इनोवेशन विभाग के सहायक प्रो. मनीष सैनी ने कहा कि विश्वविद्यालय का रिसर्च एंड इनोवेशन विभाग ऑफ्टीकल इंटेलिजेंसी द्वारा इलेक्ट्रानिक डिवाइस बनाई जा सकती है, इसके माध्यम से पंचगव्य आधारित औषधियों की प्रमाणिकता की जांच की जा सकती है। इस अवसर पर हरियाणा गो सेवा आयोग के चेयरमैन श्रवण कुमार ने कहा कि आयुर्वेद व पंचगव्य आधारित औषधि दोनों ही विषय एक दूसरे से जुड़े हैं। कहा कि हरियाणा गो सेवा आयोग द्वारा पंचकूला के सुखदर्शनपुर में एक अनुसंधान केंद्र हरियाणा सरकार द्वारा स्थापित किया गया है। यहां गाय के गोबर व मूत्र से औषधि निर्माण, बीएएमएस के विद्यार्थियों को प्रशिक्षण एवं प्रोडक्ट बनाने का काम चल रहा है।

हरियाणा गो सेवा आयोग और आयुष विश्वविद्यालय अगर मिलकर काम करता है। तो निश्चित ही पंचगव्य आधारित औषधियों की विश्वसनीयता कायम होगी। इस ऑनलाइन बैठक में हरियाणा गो आयोग पंचकूला से सदस्य अखिलेश गुप्ता, विश्वविद्यालय से डीन एकेडमिक अफेयर डॉ. शंभू दयाल, कुलसचिव डॉ. नरेश कुमार, डॉ. अनिल शर्मा, डॉ. अमित कटारिया व डॉ. रजनीकांत शर्मा सहित अन्य उपस्थित रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed