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Kurukshetra News: पदक की दौड़ से बाहर हुई रमिता पर जीता हर देशवासी का दिल
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परिजनों बोले- बेटी पर नाज, एक अगस्त को स्वदेश लौटने पर करेंगे भव्य स्वागत
संजीव शर्मा
लाडवा। पेरिस ओलंपिक में 10 मीटर एयर राइफल निशानेबाजी स्पर्धा में रमिता जिंदल बेशक हार कर पदक दौड़ से बाहर हो गई लेकिन उन्होंने हर हिंदुस्तानी का दिल जीत लिया। पेरिस ओलंपिक 2024 में भाग लेने वाली 20 वर्षीय खिलाड़ी रमिता ने सोमवार को हुए 10 मीटर एयर राइफल मुकाबले में 124.9 अंक हासिल किए और वह सातवें स्थान पर रही।
पहले ओलंपिक में हारने के बाद रमिता व उसके परिजनों को दुख तो हुआ लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा है। पिता अरविंद जिंदल कहते हैं कि बेटी ने ओलंपिक में पूरी मेहनत से खेला। इस बार फाइनल में चूकी तो कोई बात नहीं। इस बार नहीं तो अगली बार सही लेकिन बेटी देश के लिए ओलंपिक से पदक जरूर लाएगी। परिजनों ने बताया कि रमिता ने फोन कर उन्हें अपने मैच के बारे में बताया। उसने कहा कि देश की झोली में एक दिन मेडल जरूर डालेगी। उधर पिता अरविंद जिंदल ने बताया कि रमिता पर हमें नाज है। छोटे से कस्बे लाडवा से ओलंपिक में जाना कोई छोटी बात नहीं। माता-पिता व अन्य परिजन बेटी का मैच देखने के लिए सुबह से ही टेलीविजन के आगे बैठे रहे। अरविंद जिंदल का कहना है कि बेटी रमिता एक अगस्त को स्वदेश लौटेगी और उसका स्वागत करेंगे। सरस्वती बोर्ड के चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमिच भी रमिता के परिजनों से मुलाकात करने पहुंचे और उन्होंने उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने रमिता को भविष्य में होने वाली प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दी।
देश के लिए जीतूंगी पदक : रमिता
रमिता ने मोबाइल पर बातचीत के दौरान अपने इंटरव्यू में कहा कि यह उनका पहला ओलंपिक था। वह निराश जरूर है पर खुश भी है। वह मजबूती के साथ वापसी करेगी। इस हार से उन्हें आने वाले समय में प्रेरणा मिलेगी और एक दिन वह देश के लिए पदक जरूर लेकर आएगी। रमिता ने कहा कि उसे पेरिस ओलंपिक में देश की झोली में पहला पदक डालने वाली मनु भाकर से काफी प्रेरणा मिली है। वह वाकई मेडल की हकदार है।
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संजीव शर्मा
लाडवा। पेरिस ओलंपिक में 10 मीटर एयर राइफल निशानेबाजी स्पर्धा में रमिता जिंदल बेशक हार कर पदक दौड़ से बाहर हो गई लेकिन उन्होंने हर हिंदुस्तानी का दिल जीत लिया। पेरिस ओलंपिक 2024 में भाग लेने वाली 20 वर्षीय खिलाड़ी रमिता ने सोमवार को हुए 10 मीटर एयर राइफल मुकाबले में 124.9 अंक हासिल किए और वह सातवें स्थान पर रही।
पहले ओलंपिक में हारने के बाद रमिता व उसके परिजनों को दुख तो हुआ लेकिन उनका हौसला नहीं टूटा है। पिता अरविंद जिंदल कहते हैं कि बेटी ने ओलंपिक में पूरी मेहनत से खेला। इस बार फाइनल में चूकी तो कोई बात नहीं। इस बार नहीं तो अगली बार सही लेकिन बेटी देश के लिए ओलंपिक से पदक जरूर लाएगी। परिजनों ने बताया कि रमिता ने फोन कर उन्हें अपने मैच के बारे में बताया। उसने कहा कि देश की झोली में एक दिन मेडल जरूर डालेगी। उधर पिता अरविंद जिंदल ने बताया कि रमिता पर हमें नाज है। छोटे से कस्बे लाडवा से ओलंपिक में जाना कोई छोटी बात नहीं। माता-पिता व अन्य परिजन बेटी का मैच देखने के लिए सुबह से ही टेलीविजन के आगे बैठे रहे। अरविंद जिंदल का कहना है कि बेटी रमिता एक अगस्त को स्वदेश लौटेगी और उसका स्वागत करेंगे। सरस्वती बोर्ड के चेयरमैन धुम्मन सिंह किरमिच भी रमिता के परिजनों से मुलाकात करने पहुंचे और उन्होंने उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने रमिता को भविष्य में होने वाली प्रतियोगिताओं के लिए शुभकामनाएं दी।
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देश के लिए जीतूंगी पदक : रमिता
रमिता ने मोबाइल पर बातचीत के दौरान अपने इंटरव्यू में कहा कि यह उनका पहला ओलंपिक था। वह निराश जरूर है पर खुश भी है। वह मजबूती के साथ वापसी करेगी। इस हार से उन्हें आने वाले समय में प्रेरणा मिलेगी और एक दिन वह देश के लिए पदक जरूर लेकर आएगी। रमिता ने कहा कि उसे पेरिस ओलंपिक में देश की झोली में पहला पदक डालने वाली मनु भाकर से काफी प्रेरणा मिली है। वह वाकई मेडल की हकदार है।
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