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पक्षियों के विलुप्त होने का कारण रेडिएशन नहीं
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मोबाइल रेडिएशन पर विद्यार्थियों को जानकारी देते शिक्षक। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
संवाद न्यूज एजेंसी
कुरुक्षेत्र। मोबाइल टावरों से निकलने वाले विकिरण गैर आयनकारी विकिरण है। उनका उत्सर्जन का स्तर डीओटी केंद्र सरकार की निर्धारित सीमा से नीचे है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित सीमा का 1/10वां हिस्सा है। ये जानकारी केयू के यूआईईटी में मोबाइल रेडिएशन पर आयोजित जागरूकता से संबंधित व्याख्यान में निदेशक डीओटी पंचकूला अमर रिलन ने व्यक्त किए।
उन्होंने बताया पक्षियों की विलुप्त होने की भ्रांतियां भी मिथक हैं, क्योंकि जब भी हम मोबाइल टावरों का निरीक्षण करते हैं तो बहुत सारे पक्षियों के घोंसले में अंडे व पक्षियों के चूजे मिलते हैं । पेड़ों पर पक्षियों को छाया मिल जाती है परंतु मोबाइल टावरों पर छाया नहीं मिलती फिर भी पक्षी घोंसला बनाकर मोबाइल टावर पर प्रजनन करते हैं, जिन पर रेडिएशन से संबंधित किसी प्रकार का कोई प्रभाव नहीं होता।
रिलन ने बताया कि टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर द्वारा सेल्फ सर्टिफिकेशन के अलावा टावरों से निकलने वाले रेडिएशन लेवल की डीओटी टीमों द्वारा रैंडम तरीके से जांच की जाती है। रेडिएशन का स्तर निम्न होता है। इसका स्वास्थ्य पर किसी प्रकार का हानिकारक प्रभाव नही होता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल टावर लगाने के लिए परिसर को किराए पर देने में डीओटी, ट्राई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं है। यदि कोई व्यक्ति व एजेंसी टावर की वास्तविक स्थापना से पहले अग्रिम या आवेदन शुल्क या किसी रूप में पैसे के लिए पूछ रहा है तो जनता को अधिक अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। कंपनी की साख को सत्यापित करने के लिए आगाह किया जाता है ।
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उन्होंने बताया कि टीएससी या आईपी किसी भी कर के भुगतान के लिए या किसी अन्य कारण से कोई अग्रिम राशि या कोई पैसा नहीं मांगता है। केयू के डीन इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी तथा निदेशक यूआईईटी प्रो सुनील ढींगरा ने कहा कि आजकल मोबाइल टावर को लेकर शिक्षित समाज में भी भ्रांतियां हैं। इन्हीं भ्रांतियों के लिए लेकर हमने मोबाइल टावर पर जाकर उनसे निकलने वाली रेडिएशन का प्रयोगात्मक अध्ययन किया । तकनीकी संस्थान का यह मौलिक दायित्व बनता है जब भी इस प्रकार तकनीक से जुड़ी भ्रांतियां समाज में आती हैं इसके लिए लिए समाज में बीच में तकनीकी संस्थानों को एक कड़ी बनना चाहिए।
व्याख्यान के संयोजक ट्रेनिंग प्लेसमेंट अधिकारी डॉ. निखिल मारीवाला ने कहा कि ऐसे व्याख्यान समय के साथ समाज के लिए बहुत जरूरी है। रेडियेशन से संबंधित वोडाफोन से एजीएम मनोज भास्कर व अभिषेक व गगन ने प्रयोगात्मक अध्ययन करवाया। इस मौके पर डॉ. राजेश अग्निहोत्री, डॉ. पवन दिवान, फैकल्टी इंचार्ज डॉ. प्रियंका जांगड़ा, ट्रेनिंग ओर प्लेसमेंट अधिकारी डॉ. संजीव आहूजा डॉ. विशाल अहलावत, डॉ. रीटा दहिया, डॉ. सविता, डॉ. पूनम डब्बास, डा. कृष्ण गोपाल, एकता, प्रिया, शिवानी, कीर्ति रामकुमार, हरिकेश पपोसा मौजूद रहे।
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कुरुक्षेत्र। मोबाइल टावरों से निकलने वाले विकिरण गैर आयनकारी विकिरण है। उनका उत्सर्जन का स्तर डीओटी केंद्र सरकार की निर्धारित सीमा से नीचे है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित सीमा का 1/10वां हिस्सा है। ये जानकारी केयू के यूआईईटी में मोबाइल रेडिएशन पर आयोजित जागरूकता से संबंधित व्याख्यान में निदेशक डीओटी पंचकूला अमर रिलन ने व्यक्त किए।
उन्होंने बताया पक्षियों की विलुप्त होने की भ्रांतियां भी मिथक हैं, क्योंकि जब भी हम मोबाइल टावरों का निरीक्षण करते हैं तो बहुत सारे पक्षियों के घोंसले में अंडे व पक्षियों के चूजे मिलते हैं । पेड़ों पर पक्षियों को छाया मिल जाती है परंतु मोबाइल टावरों पर छाया नहीं मिलती फिर भी पक्षी घोंसला बनाकर मोबाइल टावर पर प्रजनन करते हैं, जिन पर रेडिएशन से संबंधित किसी प्रकार का कोई प्रभाव नहीं होता।
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रिलन ने बताया कि टेलीकॉम सर्विस प्रोवाइडर द्वारा सेल्फ सर्टिफिकेशन के अलावा टावरों से निकलने वाले रेडिएशन लेवल की डीओटी टीमों द्वारा रैंडम तरीके से जांच की जाती है। रेडिएशन का स्तर निम्न होता है। इसका स्वास्थ्य पर किसी प्रकार का हानिकारक प्रभाव नही होता है। उन्होंने कहा कि मोबाइल टावर लगाने के लिए परिसर को किराए पर देने में डीओटी, ट्राई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शामिल नहीं है। यदि कोई व्यक्ति व एजेंसी टावर की वास्तविक स्थापना से पहले अग्रिम या आवेदन शुल्क या किसी रूप में पैसे के लिए पूछ रहा है तो जनता को अधिक अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। कंपनी की साख को सत्यापित करने के लिए आगाह किया जाता है ।
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उन्होंने बताया कि टीएससी या आईपी किसी भी कर के भुगतान के लिए या किसी अन्य कारण से कोई अग्रिम राशि या कोई पैसा नहीं मांगता है। केयू के डीन इंजीनियरिंग एवं टेक्नोलॉजी तथा निदेशक यूआईईटी प्रो सुनील ढींगरा ने कहा कि आजकल मोबाइल टावर को लेकर शिक्षित समाज में भी भ्रांतियां हैं। इन्हीं भ्रांतियों के लिए लेकर हमने मोबाइल टावर पर जाकर उनसे निकलने वाली रेडिएशन का प्रयोगात्मक अध्ययन किया । तकनीकी संस्थान का यह मौलिक दायित्व बनता है जब भी इस प्रकार तकनीक से जुड़ी भ्रांतियां समाज में आती हैं इसके लिए लिए समाज में बीच में तकनीकी संस्थानों को एक कड़ी बनना चाहिए।
व्याख्यान के संयोजक ट्रेनिंग प्लेसमेंट अधिकारी डॉ. निखिल मारीवाला ने कहा कि ऐसे व्याख्यान समय के साथ समाज के लिए बहुत जरूरी है। रेडियेशन से संबंधित वोडाफोन से एजीएम मनोज भास्कर व अभिषेक व गगन ने प्रयोगात्मक अध्ययन करवाया। इस मौके पर डॉ. राजेश अग्निहोत्री, डॉ. पवन दिवान, फैकल्टी इंचार्ज डॉ. प्रियंका जांगड़ा, ट्रेनिंग ओर प्लेसमेंट अधिकारी डॉ. संजीव आहूजा डॉ. विशाल अहलावत, डॉ. रीटा दहिया, डॉ. सविता, डॉ. पूनम डब्बास, डा. कृष्ण गोपाल, एकता, प्रिया, शिवानी, कीर्ति रामकुमार, हरिकेश पपोसा मौजूद रहे।