{"_id":"60fc5f058ebc3e580831eae1","slug":"post-office-workers-will-sell-gangajal-brought-from-gomukh-and-haridwar-kurukshetra-news-knl776288192","type":"story","status":"publish","title_hn":"श्रावण में भगवान शिव का अभिषेक व पूजन करके मिलेंगी कालसर्प दोष से मुक्ति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
श्रावण में भगवान शिव का अभिषेक व पूजन करके मिलेंगी कालसर्प दोष से मुक्ति
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
आज से भगवान शिव का अति प्रिय श्रावण शुरू हो जाएगा। इसमें भगवान शिव की पूजा अर्चना करने से सभी कष्ट दूर होंगे। श्रावण में कालसर्प दोष के निवारण के लिए पूजा अर्चना करने का महत्व है। वहीं श्रावण को देखते हुए शिवालयों को दुल्हन की तरह सजाया जा रहा है। ऐतिहासिक स्थानेश्वर महादेव, कालेश्चर महादेव, प्रसिद्ध दु:ख भंजन, संगमेश्वर महादेव मंदिर अरुणाय, पशुपतिनाथ मंदिर, पृथ्वेश्वर महादेव मंदिर (बड़ा शिवालय), आशुतोष महादेव मंदिर में श्रावण के प्रत्येक दिन धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। सभी मंदिर में कोरोना गाइडलाइन का पालन करते हुए पूजा अर्चना होगी। उधर, कांवड़ यात्रा पर रोक लगने के बाद डाकघर के कर्मी शिवालयों के बाहर ही गंगा जल बेचेंगे। श्री पंचायती अखाड़ा महानिर्वाणी शाखा श्री संगमेश्वर महादेव मंदिर के सचिव महंत विश्वनाथ गिरी व सेवादल प्रबंधक भूषण गौतम मंदिर में सुबह 4 बजे 11 हजार बिल्वपत्र संगमेश्वर महादेव को अर्पित कर धार्मिक कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। वहीं श्रावण के प्रत्येक दिन 11 पार्थेश्वर शिवलिंग का रुद्राभिषेक किया जाएगा। शाम के समय शिवलिंग का तरह-तरह से भव्य श्रृंगार किया जाएगा। सेवादल प्रबंधक भूषण गौतम ने बताया कि कोरोना को देखते हुए श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए सेवादल के 50 सदस्यों की ड्यूटी लगाई गई। मंदिर में स्क्रीनिंग के बाद ही प्रवेश होगा तथा एक समय में मंदिर में सिर्फ पांच श्रद्घालु ही पूजन करेंगे। मंदिर की ओर से 19 अगस्त को भव्य शोभा यात्रा मंदिर से चलकर सरस्वती तीर्थ पहुंचेगी। श्रावण की समाप्ति पर 21 अगस्त को भंडारे का आयोजन किया जाएगा। मंदिर के पुरोहित शंभूदत्त गौतम ने बताया कि श्रावण में कालसर्प दोष से मुक्ति के लिए पूजा अर्चना की जाती है। राहू को अधिदेवता काल और केतू को प्रत्यधि देवता सर्प माना गया है। कुंडली में कालसर्प दोष होने से व्यक्ति के जीवन संघर्षमय होता है। छोटी-छोटी सफलता के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। मंदिर में कालसर्प दोष निवारण के लिए विशेष पूजा अर्चना की जाती है। श्रावण में यह पूजा अर्चना करने का अपना महत्व है।
एक लोक कथानुसार जब ऋषि वशिष्ठ और ऋषि विश्वामित्र में श्रेष्ठता की होड लगी, तब ऋषि विश्वामित्र ने मां सरस्वती की सहायता से बहा कर लाए गए ऋषि वशिष्ठ को मारने के लिए शस्त्र उठाया, तभी मां सरस्वती ऋषि वशिष्ठ को वापस बहा कर ले गई। तब ऋषि विश्वामित्र ने सरस्वती को रक्त व पीप के साथ बहने का श्राप दिया। तब भगवान शिव की प्रेरणा से 88 हजार ऋषियों ने यज्ञ द्वारा अरुणा नदी व सरस्वती का संगम कराकर सरस्वती को शाप से मुक्ति दिलाई। इन नदियों के संगम से ही तीर्थ संगमेश्वर महादेव के नाम से विख्यात हुए।
कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगने के बाद श्रद्धालुओं डाकघर से गंगा जल खरीद सकेंगे। वहीं श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए डाकघर के अधिकारियों ने फैसला लिया है कि डाकघर के कर्मी शिवालयों के बाहर गोमुख व हरिद्वार से लाए गए गंगा जल को बेचेंगे। हालांकि डाकघर में भी गंगाजल उपलब्ध होगा। इसे लेकर श्रद्धालुओं काफी प्रसन्न है।
विज्ञापन
विज्ञापन
एक लोक कथानुसार जब ऋषि वशिष्ठ और ऋषि विश्वामित्र में श्रेष्ठता की होड लगी, तब ऋषि विश्वामित्र ने मां सरस्वती की सहायता से बहा कर लाए गए ऋषि वशिष्ठ को मारने के लिए शस्त्र उठाया, तभी मां सरस्वती ऋषि वशिष्ठ को वापस बहा कर ले गई। तब ऋषि विश्वामित्र ने सरस्वती को रक्त व पीप के साथ बहने का श्राप दिया। तब भगवान शिव की प्रेरणा से 88 हजार ऋषियों ने यज्ञ द्वारा अरुणा नदी व सरस्वती का संगम कराकर सरस्वती को शाप से मुक्ति दिलाई। इन नदियों के संगम से ही तीर्थ संगमेश्वर महादेव के नाम से विख्यात हुए।
विज्ञापन
कांवड़ यात्रा पर प्रतिबंध लगने के बाद श्रद्धालुओं डाकघर से गंगा जल खरीद सकेंगे। वहीं श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए डाकघर के अधिकारियों ने फैसला लिया है कि डाकघर के कर्मी शिवालयों के बाहर गोमुख व हरिद्वार से लाए गए गंगा जल को बेचेंगे। हालांकि डाकघर में भी गंगाजल उपलब्ध होगा। इसे लेकर श्रद्धालुओं काफी प्रसन्न है।
विज्ञापन