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Kurukshetra News: अब इंद्र देव के साथ महर्षि दधीचि की विशालकाय प्रतिमा बनेगी सन्निहित सरोवर की पहचान
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कुरुक्षेत्र। देश-विदेश में विख्यात एवं गहरी आस्था के प्रतीक रहे सन्निहित सरोवर को अब एक और नई पहचान मिलेगी। समस्त संसार के कल्याण के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले महामानव महर्षि दधीचि की विशालकाय प्रतिमा लगेगी। कांस्य से निर्मित इस प्रतिमा को देश के प्रख्यात मूर्तिकार राम सुतार आकार देने में लगे हैं और अगले छह माह में बनकर तैयार हो जाएगी, जिसके बाद इसे सरोवर के कमल कुंज में स्थापित किया जाएगा। इस पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होंगे।
यह प्रतिमा स्थापित होने के बाद धर्मनगरी में जहां पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा वहीं उनके बीच सन्निहित सरोवर से एक विशेष संदेश भी जाएगा। बता दें कि वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान सन्निहित सरोवर पर ऐसी प्रतिमा लगाए जाने का एलान किया था, जिसका इस सरोवर से सीधा संबंध हो। इसके बाद कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने महर्षि दधीचि की प्रतिमा लगाने को लेकर प्रस्ताव तैयार किया, जिसे मंजूरी मिलते ही अमलीजामा पहनाया जाना शुरू कर दिया गया है। यह प्रतिमा स्थापित होने के बाद धर्मनगरी का सौंदर्य भी बढ़ जाएगा। इस प्रतिमा पर आकर्षक लाइटें भी लगाई जाएंगी। सन्निहित सरोवर के कमलकुंज का उद्घाटन 29 मार्च 2000 में तत्कालीन राज्यपाल महावीर प्रसाद ने किया था।
महर्षि दधीचि की प्रतिमा में पीछे सूर्य तो साथ है इंद्र देव
इस प्रतिमा में तप करते महर्षि दधीचि के पीछे सूर्य है तो साथ इंद्र देव भी है। बताया जाता है कि एक समय वृत्रासुर से संसार को बचाने के लिए जब देवताओं के किसी शस्त्र का प्रहार सफल नहीं हो पा रहा था तो भगवान शिव के बताए अनुसार इंद्र देव महर्षि दधीचि के पास पहुंचे थे, जहां उन्होंने उनके समक्ष अस्थि दान करने का आग्रह किया था। महर्षि दधीचि ने यह आग्रह स्वीकार किया और अपना जीवन त्यागकर अस्थियां दान कर दी थी, जिनसे देवताओं के लिए अस्त्र-शस्त्र बनाए गए और वज्र नामक अस्त्र से ही वृत्रासुर का वध किया जा सका था। इस पूरे प्रसंग का संदेश इस प्रतिमा के जरिए दिया जाएगा।
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सन्निहित सरोवर की चार करोड़ की लागत से बदलेगी दशा
सन्निहित सरोवर की लंबे समय से उपेक्षा ही रही है, लेकिन पिछले कुछ समय से इस तीर्थ की दशा बदलने लगी है। जहां पहले श्रीकृष्णा सर्किट के तहत चार करोड़ रुपये खर्च कर परिक्रमा व अन्य कार्य किए गए थे वहीं अब फिर इस पर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इसमें महर्षि दधीचि की प्रतिमा लगाए जाने के अलावा पूरे सरोवर का सुंदरीकरण किया जाएगा। विशेष आरती स्थल तैयार होगा तो वहीं ऐसा म्यूजिकल सिस्टम भी लगाया जाना है, जिससे हर समय आरती यहां आने वाले श्रद्धालु व पर्यटकों को सुनाई देगी।
अगले छह माह में बदलने लगेगा सरोवर का रूप : छाबड़ा
केडीबी के निवर्तमान मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा बताते हैं कि सरोवर को नया रूप देने के लिए योजना को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इसी में महर्षि दधीचि की प्रतिमा भी शामिल है। अगले छह माह बाद सरोवर का नया रूप दिखाई देने लगेगा।
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यह प्रतिमा स्थापित होने के बाद धर्मनगरी में जहां पर्यटकों की संख्या में इजाफा होगा वहीं उनके बीच सन्निहित सरोवर से एक विशेष संदेश भी जाएगा। बता दें कि वर्ष 2021 में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अंतरराष्ट्रीय गीता महोत्सव के दौरान सन्निहित सरोवर पर ऐसी प्रतिमा लगाए जाने का एलान किया था, जिसका इस सरोवर से सीधा संबंध हो। इसके बाद कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड ने महर्षि दधीचि की प्रतिमा लगाने को लेकर प्रस्ताव तैयार किया, जिसे मंजूरी मिलते ही अमलीजामा पहनाया जाना शुरू कर दिया गया है। यह प्रतिमा स्थापित होने के बाद धर्मनगरी का सौंदर्य भी बढ़ जाएगा। इस प्रतिमा पर आकर्षक लाइटें भी लगाई जाएंगी। सन्निहित सरोवर के कमलकुंज का उद्घाटन 29 मार्च 2000 में तत्कालीन राज्यपाल महावीर प्रसाद ने किया था।
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महर्षि दधीचि की प्रतिमा में पीछे सूर्य तो साथ है इंद्र देव
इस प्रतिमा में तप करते महर्षि दधीचि के पीछे सूर्य है तो साथ इंद्र देव भी है। बताया जाता है कि एक समय वृत्रासुर से संसार को बचाने के लिए जब देवताओं के किसी शस्त्र का प्रहार सफल नहीं हो पा रहा था तो भगवान शिव के बताए अनुसार इंद्र देव महर्षि दधीचि के पास पहुंचे थे, जहां उन्होंने उनके समक्ष अस्थि दान करने का आग्रह किया था। महर्षि दधीचि ने यह आग्रह स्वीकार किया और अपना जीवन त्यागकर अस्थियां दान कर दी थी, जिनसे देवताओं के लिए अस्त्र-शस्त्र बनाए गए और वज्र नामक अस्त्र से ही वृत्रासुर का वध किया जा सका था। इस पूरे प्रसंग का संदेश इस प्रतिमा के जरिए दिया जाएगा।
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सन्निहित सरोवर की चार करोड़ की लागत से बदलेगी दशा
सन्निहित सरोवर की लंबे समय से उपेक्षा ही रही है, लेकिन पिछले कुछ समय से इस तीर्थ की दशा बदलने लगी है। जहां पहले श्रीकृष्णा सर्किट के तहत चार करोड़ रुपये खर्च कर परिक्रमा व अन्य कार्य किए गए थे वहीं अब फिर इस पर करीब पांच करोड़ रुपये खर्च किए जाने हैं। इसमें महर्षि दधीचि की प्रतिमा लगाए जाने के अलावा पूरे सरोवर का सुंदरीकरण किया जाएगा। विशेष आरती स्थल तैयार होगा तो वहीं ऐसा म्यूजिकल सिस्टम भी लगाया जाना है, जिससे हर समय आरती यहां आने वाले श्रद्धालु व पर्यटकों को सुनाई देगी।
अगले छह माह में बदलने लगेगा सरोवर का रूप : छाबड़ा
केडीबी के निवर्तमान मानद सचिव मदन मोहन छाबड़ा बताते हैं कि सरोवर को नया रूप देने के लिए योजना को अंतिम रूप दिया जा चुका है। इसी में महर्षि दधीचि की प्रतिमा भी शामिल है। अगले छह माह बाद सरोवर का नया रूप दिखाई देने लगेगा।