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Kurukshetra News: दस साल से प्रतिमाओं में आस्था का रंग भर रहे पिता-पुत्र
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कुरुक्षेत्र। जिंदल हाउस के निकट मार्बल कलर वाली गणेश जी की प्रतिमा दिखाते मूर्ति कलाकार राहुल क
कुरुक्षेत्र। झांसा के निकटवर्ती गांव श्रीनगर के रहने वाले पिता-पुत्र पिछले 10 वर्षों से हाथों के हुनर से देवताओं की मूर्तियां तैयार कर रहे हैं। खास बात ये है कि इस जोड़ी में पहले पुत्र ने मूर्ति बनाने का काम सीखा और बाद में अपने पिता को भी हुनर सिखाया। अब दोनों एक-दूसरे का सहारा बनकर प्रतिमाओं को अंतिम रूप दे रहे हैं।
मूर्ति कलाकार राहुल ने बताया कि पिता ईशम सिंह के साथ उन्होंने गणेश महोत्सव को लेकर 50 से अधिक वैरायटी की छोटी-बड़ी सैकड़ों प्रतिमाएं तैयार की हैं। इनमें 3 इंच से लेकर करीब 5 फीट तक की प्रतिमाएं शामिल हैं।
छोटी की कीमत 50 रुपये और विशेष रूप से तैयार बड़ी प्रतिमाओं की 5 हजार रुपये तक है। मूर्तियां गांव श्रीनगर स्थित घर पर तैयार होती हैं और श्रद्धालुओं के लिए जिंदल हाउस के निकट शोभा बढ़ाती हैं। मिट्टी वाली 4 इंच से एक फुट तक की मूर्ति बनाने में पूरा दिन लगता है, जबकि 5 फीट वाली एक सप्ताह में तैयार होती है। रख-रखाव बेहतर हो तो मिट्टी वाली मूर्ति तीन साल तो पीओपी वाली पांच से सात साल तक रह सकती है।
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त्योहार से लगभग छह महीने पहले से मूर्ति बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। परना, स्टोन वर्क, मार्बल कलर वाली गणेश जी की मूर्तियां बनीं आकर्षण केंद्र
ईशम सिंह ने बताया कि वर्षों अभ्यास से दोनों ने कई डिजाइन और मांग के अनुरूप मूर्तियां तैयार करने में दक्षता हासिल की है। गणेश जी और उनकी सवारी मूषक के अलावा भगवान शिव-पार्वती, विष्णु-लक्ष्मी, मां दुर्गा, श्रीराम दरबार, कुबेर, राधा-कृष्ण, गुरु रविदास, महर्षि वाल्मीकि और साईं बाबा की प्रतिमाएं भी तैयार करते हैं। संवाद
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मूर्ति कलाकार राहुल ने बताया कि पिता ईशम सिंह के साथ उन्होंने गणेश महोत्सव को लेकर 50 से अधिक वैरायटी की छोटी-बड़ी सैकड़ों प्रतिमाएं तैयार की हैं। इनमें 3 इंच से लेकर करीब 5 फीट तक की प्रतिमाएं शामिल हैं।
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छोटी की कीमत 50 रुपये और विशेष रूप से तैयार बड़ी प्रतिमाओं की 5 हजार रुपये तक है। मूर्तियां गांव श्रीनगर स्थित घर पर तैयार होती हैं और श्रद्धालुओं के लिए जिंदल हाउस के निकट शोभा बढ़ाती हैं। मिट्टी वाली 4 इंच से एक फुट तक की मूर्ति बनाने में पूरा दिन लगता है, जबकि 5 फीट वाली एक सप्ताह में तैयार होती है। रख-रखाव बेहतर हो तो मिट्टी वाली मूर्ति तीन साल तो पीओपी वाली पांच से सात साल तक रह सकती है।
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त्योहार से लगभग छह महीने पहले से मूर्ति बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है। परना, स्टोन वर्क, मार्बल कलर वाली गणेश जी की मूर्तियां बनीं आकर्षण केंद्र
ईशम सिंह ने बताया कि वर्षों अभ्यास से दोनों ने कई डिजाइन और मांग के अनुरूप मूर्तियां तैयार करने में दक्षता हासिल की है। गणेश जी और उनकी सवारी मूषक के अलावा भगवान शिव-पार्वती, विष्णु-लक्ष्मी, मां दुर्गा, श्रीराम दरबार, कुबेर, राधा-कृष्ण, गुरु रविदास, महर्षि वाल्मीकि और साईं बाबा की प्रतिमाएं भी तैयार करते हैं। संवाद

कुरुक्षेत्र। जिंदल हाउस के निकट मार्बल कलर वाली गणेश जी की प्रतिमा दिखाते मूर्ति कलाकार राहुल क