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मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान विवाद : कर्मचारियों के चार माह से अटके वेतन पर कानून का संकट, एचएसजीएमसी की भी बढ़ी चुनौती
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कुरुक्षेत्र/शाहाबाद। मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान के कर्मचारियों का चार माह से लंबित वेतन कानूनी पेच में उलझ कर रह गया है। एक ओर कर्मचारियों में वेतन भुगतान को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है, वहीं दूसरी ओर हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन समिति (एचएसजीएमसी) के सामने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस ने नई चुनौती खड़ी कर दी है। मामले में आगे की कार्रवाई को लेकर एचएसजीएमसी कानूनी विशेषज्ञों से राय लेने में जुटी है।
जानकारी के अनुसार, मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान के संचालन और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर चल रहे विवाद के बीच कर्मचारियों का वेतन पिछले चार माह से लंबित है। इस बीच एसजीपीसी की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस के बाद एचएसजीएमसी फिलहाल कोई ऐसा कदम उठाने से बच रही है, जिससे भविष्य में कानूनी अड़चन खड़ी हो सकती है। इसी कारण समिति अब नोटिस का कानूनी जवाब तैयार करने और आगे की रणनीति तय करने के लिए विशेषज्ञों से परामर्श कर रही है।
उधर, वेतन न मिलने से परेशान कर्मचारियों का धैर्य जवाब देने लगा है। कर्मचारियों ने एसजीपीसी को पांच अगस्त तक वेतन भुगतान सुनिश्चित कराने का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो पांच अगस्त से एसजीपीसी के कुरुक्षेत्र कार्यालय के बाहर धरना शुरू किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार चार माह से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने परिवार का पालन-पोषण और दैनिक खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। मीरी-पीरी कर्मचारी संघर्ष समिति का कहना है कि ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारियों एवं संबंधित अधिकारियों को उनकी वैधानिक जिम्मेदारियों के संबंध में कर्मचारियों और चिकित्सकों की ओर से विधिक नोटिस भी भेजे जाएंगे तथा उपलब्ध कानूनी विकल्पों का सहारा लिया जाएगा। विवाद के बीच अब निगाहें एचएसजीएमसी की कानूनी रणनीति और कर्मचारियों के प्रस्तावित आंदोलन पर टिकी हैं।
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यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो मामला कानूनी लड़ाई के साथ-साथ आंदोलन का भी रूप ले सकता है। उधर एचएसजीएमसी प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा का कहना है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चिकित्सकों के बोर्ड पर स्टे का संस्थान के संचालन पर कोई असर नहीं लेकिन एसजीपीसी की ओर से दबाव बनाने की नीयत से नोटिस दिया हुआ है। इस पर कानूनी राय ली जा रही है।
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जानकारी के अनुसार, मीरी-पीरी मेडिकल संस्थान के संचालन और प्रशासनिक अधिकारों को लेकर चल रहे विवाद के बीच कर्मचारियों का वेतन पिछले चार माह से लंबित है। इस बीच एसजीपीसी की ओर से भेजे गए कानूनी नोटिस के बाद एचएसजीएमसी फिलहाल कोई ऐसा कदम उठाने से बच रही है, जिससे भविष्य में कानूनी अड़चन खड़ी हो सकती है। इसी कारण समिति अब नोटिस का कानूनी जवाब तैयार करने और आगे की रणनीति तय करने के लिए विशेषज्ञों से परामर्श कर रही है।
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उधर, वेतन न मिलने से परेशान कर्मचारियों का धैर्य जवाब देने लगा है। कर्मचारियों ने एसजीपीसी को पांच अगस्त तक वेतन भुगतान सुनिश्चित कराने का अल्टीमेटम दिया है। चेतावनी दी गई है कि यदि तय समय तक समस्या का समाधान नहीं हुआ तो पांच अगस्त से एसजीपीसी के कुरुक्षेत्र कार्यालय के बाहर धरना शुरू किया जाएगा। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार चार माह से वेतन नहीं मिलने के कारण उनके सामने परिवार का पालन-पोषण और दैनिक खर्च चलाना मुश्किल हो गया है। मीरी-पीरी कर्मचारी संघर्ष समिति का कहना है कि ट्रस्ट के जिम्मेदार पदाधिकारियों एवं संबंधित अधिकारियों को उनकी वैधानिक जिम्मेदारियों के संबंध में कर्मचारियों और चिकित्सकों की ओर से विधिक नोटिस भी भेजे जाएंगे तथा उपलब्ध कानूनी विकल्पों का सहारा लिया जाएगा। विवाद के बीच अब निगाहें एचएसजीएमसी की कानूनी रणनीति और कर्मचारियों के प्रस्तावित आंदोलन पर टिकी हैं।
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यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो मामला कानूनी लड़ाई के साथ-साथ आंदोलन का भी रूप ले सकता है। उधर एचएसजीएमसी प्रधान जत्थेदार जगदीश सिंह झींडा का कहना है कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के चिकित्सकों के बोर्ड पर स्टे का संस्थान के संचालन पर कोई असर नहीं लेकिन एसजीपीसी की ओर से दबाव बनाने की नीयत से नोटिस दिया हुआ है। इस पर कानूनी राय ली जा रही है।