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दो युग के बाद आज हरियाणा में पहली बार होगा लक्षचंडी यज्ञ का आयोजन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 22 Oct 2021 12:00 AM IST
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lakshchandi yagya will be held for the first time in haryana
थीम पार्क में शुक्रवार से होने वाले 11 दिवसीय लक्षचंडी यज्ञ की पूर्व संध्या पर वीरवार को शहर में कलश यात्रा निकाली गई। इसमें शामिल 51 कन्याओं ने गुरु रविदास मंदिर से जल भरने के बाद कलश यात्रा की शुरुआत की। फिर महाराणा प्रताप चौक, थानेसर बाजार, सीकरी चौक, आंबेडकर चौक, गुरुद्वारा छठी पातशाही से होते हुए कलश यात्रा कार्यक्रम स्थल पर पहुंची। यज्ञ के आचार्य राम मेहर ने बताया कि शुक्रवार से होने वाले लक्षचंडी यज्ञ पर सात देशों के पर्यावरण वैज्ञानिक शोध करेंगे। आयोजन का उद्देश्य सामाजिक समरसता फैलाना व विश्व को वैज्ञानिक दृष्टि से यज्ञ का महत्व समझाना है।
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उन्होंने बताया कि यज्ञ सम्राट स्वामी हरिओम के मार्गदर्शन में होने वाले इस यज्ञ में 700 ब्राह्मण 501 हवन कुंड में आहुतियां देंगे। वहीं सात देश के पर्यावरण वैज्ञानिक यज्ञ से पर्यावरण, मनोविज्ञान व मनुष्य के व्यवहार पर पड़ने वाले प्रभाव पर शोध करेंगे। साउथ कोरिया के पर्यावरण वैज्ञानिक डॉ. राजेश केराज की अगुवाई में स्विजरलैंड, जापान, साउथ कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, वियना सहित भारत के 150 वैज्ञानिक इसमें शामिल होंगे। वहीं संत सम्मेलन भी यज्ञ का खास हिस्सा होगा। यज्ञ के दौरान 25 से 27 अक्तूबर तक होने वाले संत सम्मेलन में महंत, संत-महात्मा शिरकत करेंगे। उन्होंने बताया कि इससे पहले 22 राज्यों में यह यज्ञ हो चुका है।
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उन्होंने बताया कि यज्ञ स्थल के पास गैस एनालाइजर उपकरण लगाए हैं। यज्ञ से पहले इस उपकरण के जरिए पर्यावरण संबंधी डाटा लिया गया है। यज्ञ के बाद उससे पर्यावरण पर हुए प्रभाव का डाटा लेकर आकलन होगा। इसके अलावा उनकी टीम यज्ञ में प्रतिदिन हिस्सा भाग लेने वाले यजमान, पांच किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोग तथा 15 किलोमीटर के दायरे में आने वाले लोगों के व्यवहार पर शोध करेगी। इस शोध की रिपोर्ट को साक्ष्य के रूप में अन्य वैज्ञानिकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। उनकी टीम वैज्ञानिक दृष्टि के साथ-साथ आध्यत्मिक दृष्टि से भी शोध कर रही है।
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इस यज्ञ में रोजाना हजारों श्रद्धालु आहुतियां डालेंगे। इस यज्ञ में राजनेताओं, कुलपतियों, संस्थाओं के प्रतिनिधियों को यजमान के रूप में शामिल होने का न्योता दिया गया है। आचार्य राममेहर ने बताया कि यज्ञ में दो हजार क्विंटल आम, ढाक, पीपल, बरगद, 200 किलो सामग्री, 15 हजार किलो देसी घी की आहुतियां डाली जाएंगी।
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