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Kurukshetra News: दो माह बाद कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड को मिला नया मानद सचिव
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कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड को दो माह बाद आखिरकार नया मानद सचिव मिल ही गया। इस पद पर प्रदेश सरकार ने छह साल तक सदस्य रहे उपेंद्र सिंघल को जिम्मेदारी सौंपी है। अगले सप्ताह वे यह पदभार ग्रहण करेंगे। उनकी नियुक्ति से लोगों में खुशी की लहर है । उम्मीद है कि अब विकास बोर्ड के कार्य और गति पकड़ेंगे।
बता दें कि इससे पहले मदन मोहन छाबड़ा कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव थे और उनका कार्यकाल गत 18 अप्रैल को खत्म हो गया था। इसके बाद से ही कई लोग मानद सचिव बनने की दौड़ में थे, लेकिन प्रदेश सरकार ने पिछले कार्यकाल में मनोनीत सदस्य रहे उपेंद्र सिंघल के नाम पर मोहर लगाई है, जिसको लेकर शुक्रवार को नियुक्त आदेश भी जारी कर दिए गए। मदन मोहन छाबड़ा 2018 में पहली बार दो साल के लिए मानद सचिव नियुक्त किए थे। उनके काम को देखते हुए कार्यकाल तीन बार बढ़ाया गया, जिसके चलते इस बार उनके कार्यकाल को बढ़ाए जाने को लेकर संशय बना हुआ था।
छह साल रहे सदस्य, लेकिन सिंघल के लिए होगी बड़ी चुनौती
बता दें कि उपेंद्र सिंघल मदन मोहन छाबड़ा के वर्तमान कार्यकाल के दौरान भी केडीबी सदस्य रहे हैं तो इससे पहले भी वे लगातार दो बार सदस्य रहे। हालांकि उन्हें लगातार छह साल तक सदस्य होने के चलते बोर्ड के कामकाज का पूरा अनुभव है, लेकिन मदन मोहन छाबड़ा के कार्यकाल में हुए कार्यों के चलते उनके लिए इनसे आगे बढ़कर कार्य करना बड़ी चुनौती होगा। मदन मोहन छाबड़ा को तीन बार विस्तार दिए जाने का कारण गीता महोत्सव अंतरराष्ट्रीय पलक पर ले जाना और 48 कोस कुरुक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तीर्थों का बेहतर विकास कराना रहा है। उनके कार्यकाल में ही ब्रह्मसरोवर देश के आईकोनिक प्लेस की सूची में शामिल हुआ तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गीता जयंती महोत्सव मनाया जाने लगा। गीता स्थली ज्योतिसर को भी नई पहचान मिली तो तीर्थों का भी बेहतर विकास हुआ। पहले केडीबी के पास 134 तीर्थ थे, लेकिन पिछले कुछ माह पहले ही 30 नए तीर्थो को भी शामिल कर दिया गया। अब 164 तीर्थों का विकास कराना भी बड़ी चुनौती होगी। उधर मदन मोहन छाबड़ा का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में बेहतर कार्य करने का प्रयास किया।
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किए जाएंगे भरसक प्रयास : सिंघल
केडीबी के मानद सचिव बने उपेंद्र सिंघल का कहना है कि वे सभी के साथ मिलकर विकास बोर्ड द्वारा तीर्थों के विकास के भरसक प्रयास करेंगे। हर सदस्य की विकास कार्यों में अहम भूमिका रहेगी।
मनोनीत सदस्य आज तक नहीं नियुक्त
बता दें कि केडीबी में 10 गैर सरकारी सदस्य सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। 18 अप्रैल को मानद सचिव का कार्यकाल खत्म हो गया था जबकि इससे पहले 10 मनोनीत सदस्यों का भी कार्यकाल खत्म हो गया था। इन सदस्यों की आज तक नियुक्ति नहीं हो पाई है जबकि कई लोग इसके लिए लगातार दौड़धूप कर रहे हैं।
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बता दें कि इससे पहले मदन मोहन छाबड़ा कुरुक्षेत्र विकास बोर्ड के मानद सचिव थे और उनका कार्यकाल गत 18 अप्रैल को खत्म हो गया था। इसके बाद से ही कई लोग मानद सचिव बनने की दौड़ में थे, लेकिन प्रदेश सरकार ने पिछले कार्यकाल में मनोनीत सदस्य रहे उपेंद्र सिंघल के नाम पर मोहर लगाई है, जिसको लेकर शुक्रवार को नियुक्त आदेश भी जारी कर दिए गए। मदन मोहन छाबड़ा 2018 में पहली बार दो साल के लिए मानद सचिव नियुक्त किए थे। उनके काम को देखते हुए कार्यकाल तीन बार बढ़ाया गया, जिसके चलते इस बार उनके कार्यकाल को बढ़ाए जाने को लेकर संशय बना हुआ था।
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छह साल रहे सदस्य, लेकिन सिंघल के लिए होगी बड़ी चुनौती
बता दें कि उपेंद्र सिंघल मदन मोहन छाबड़ा के वर्तमान कार्यकाल के दौरान भी केडीबी सदस्य रहे हैं तो इससे पहले भी वे लगातार दो बार सदस्य रहे। हालांकि उन्हें लगातार छह साल तक सदस्य होने के चलते बोर्ड के कामकाज का पूरा अनुभव है, लेकिन मदन मोहन छाबड़ा के कार्यकाल में हुए कार्यों के चलते उनके लिए इनसे आगे बढ़कर कार्य करना बड़ी चुनौती होगा। मदन मोहन छाबड़ा को तीन बार विस्तार दिए जाने का कारण गीता महोत्सव अंतरराष्ट्रीय पलक पर ले जाना और 48 कोस कुरुक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले तीर्थों का बेहतर विकास कराना रहा है। उनके कार्यकाल में ही ब्रह्मसरोवर देश के आईकोनिक प्लेस की सूची में शामिल हुआ तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गीता जयंती महोत्सव मनाया जाने लगा। गीता स्थली ज्योतिसर को भी नई पहचान मिली तो तीर्थों का भी बेहतर विकास हुआ। पहले केडीबी के पास 134 तीर्थ थे, लेकिन पिछले कुछ माह पहले ही 30 नए तीर्थो को भी शामिल कर दिया गया। अब 164 तीर्थों का विकास कराना भी बड़ी चुनौती होगी। उधर मदन मोहन छाबड़ा का कहना है कि उन्होंने अपने कार्यकाल में बेहतर कार्य करने का प्रयास किया।
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किए जाएंगे भरसक प्रयास : सिंघल
केडीबी के मानद सचिव बने उपेंद्र सिंघल का कहना है कि वे सभी के साथ मिलकर विकास बोर्ड द्वारा तीर्थों के विकास के भरसक प्रयास करेंगे। हर सदस्य की विकास कार्यों में अहम भूमिका रहेगी।
मनोनीत सदस्य आज तक नहीं नियुक्त
बता दें कि केडीबी में 10 गैर सरकारी सदस्य सरकार द्वारा नियुक्त किए जाते हैं। 18 अप्रैल को मानद सचिव का कार्यकाल खत्म हो गया था जबकि इससे पहले 10 मनोनीत सदस्यों का भी कार्यकाल खत्म हो गया था। इन सदस्यों की आज तक नियुक्ति नहीं हो पाई है जबकि कई लोग इसके लिए लगातार दौड़धूप कर रहे हैं।