{"_id":"59062d9a4f1c1b915e44185c","slug":"kathhak-dance-cultural-program-mak-kurukshetra","type":"story","status":"publish","title_hn":"मैक में कत्थक नृत्य के कायल हुए दर्शक ","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मैक में कत्थक नृत्य के कायल हुए दर्शक
ब्यूरो/कुरुक्षेत्र,अमर उजाला
Updated Mon, 01 May 2017 12:02 AM IST
विज्ञापन
kathak dance
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा स्वर्ण जयंती के अवसर पर हरियाणा कला परिषद् मल्टी आर्ट कल्चरल सेंटर में विश्व नृत्य दिवस मनाया गया। इसमें नाद प्रतिष्ठा डांस इंस्टीट्यूट के कलाकारों ने अमरजीत कौर के निर्देशन में कत्थक की जीवन यात्रा कार्यक्रम प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में शास्त्रीय गायक डॉ. सुरेश गोपाल श्रीखण्डे ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। वहीं केयू के नृत्य एवं संगीत विभागाध्यक्षा प्रो. शुचिस्मिता शर्मा विशिष्ट अतिथि के रुप में उपस्थित रही।
विज्ञापन
डॉ. सुरेश गोपाल श्रीखंडे ने कहा कि नृत्य मनुष्य की खुशी की अभिव्यक्ति का साधन है। इसके माध्यम से हम अपनी खुशी को न केवल व्यक्त करते हैं अपितु अपने भावों को आमजन तक पहुंचाने में सफल भी होते हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल में जब लिपि का विकास नहीं हुआ था, तब नृत्य कला के माध्यम से मनुष्य अपनी भावनाओं दर्शाता था। मंच संचालन विकास शर्मा ने किया। उन्होंने बताया कि विश्व नृत्य दिवस की शुरुआत 29 अप्रैल 1982 से की गई। यह दिन महान रिर्फामर जीन जार्ज नावेरे के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। वहीं कार्यक्रम में सूत्रधार की भूमिका निभा रहे उमा शंकर ने कहा कि शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य ने प्राचीन काल से आधुनिक काल में प्रवेश किया। कार्यक्रम की पहली प्रस्तुति गणेश वंदना रही। जिसमें नाद प्रतिष्ठा डांस इंस्टीट्यूट के कलाकारों ने अमरजीत कौर के निर्देशन में अपने नृत्य के माध्यम से भगवान गणेश का गुणगान किया।
विज्ञापन
अगली प्रस्तुति में भगवान कृष्ण के जीवन को कत्थक शैली के माध्यम से दर्शकों के सम्मुख प्रस्तुत किया। तीसरी प्रस्तुति में कलाकारों ने भगवान शंकर के प्रतिष्ठा को द्रुपद गायन शैली में वर्णन किया। वहीं कलाकारों ने अपने नृत्य के माध्यम से मध्यकाल के सूफी गायन व नृत्य के संगम को दिखाया। नृत्य के द्वारा बताया गया कि मध्यकाल में जब देश पर मुगलों का राज रहा, उस समय सूफी शैली व नृत्य हमारी संस्कृति से जुड़ा। मुगल काल की शृंगार प्रधानता को ठुमरी और कत्थक के माध्यम से दर्शाया गया। जिसकी एकल प्रस्तुति अमरजीत कौर द्वारा दी गई।
विज्ञापन
अंतिम प्रस्तुति में कत्थक के प्राचीन काल से आधुनिक काल के रूप को छाप तिलक सब छिनी रे मौसे नैना मिलाईके के माध्यम से प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम के अंत में विशिष्ट अतिथि प्रो. शुचिस्मिता शर्मा व मैक के मुख्य सलाहकार महेश जोशी ने सभी कलाकारों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में नाद प्रतिष्ठा डांस इंस्टीट्यूट के कलाकारों में अमरजीत कौर, सुगंध शर्मा, सन्नी कुमार, वीरविकास, मोनू, पूजा, राही के साथ-साथ तबले पर अरविंद भट व गुरचेतन सिंह, सारंगी पर मोमिन खान, हरमोनियम व गायन पर तरुण जोशी, योगेश गर्ग तथा रवि ने संगत दी।