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Kurukshetra News: बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रहे जुगाड़ वाहन, बेबस प्रशासन

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Mon, 22 Apr 2024 05:00 AM IST
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Jugaad vehicles playing with children's lives, helpless administration
कुरुक्षेत्र। महेंद्रगढ़ के कनीना में हुई दिल दहला देने वाली घटना ने हर किसी को झकझोर कर रख दिया था। इसके बाद प्रशासन ने भी सख्त रुख अपनाया और स्कूलों की फिटनेस को लेकर स्कूल संचालकों पर शिकंजा कसा जाने लगा। इसके बाद प्रशासन द्वारा स्कूल बसों का निरीक्षण जारी है लेकिन हादसे के करीब 10 दिन बीत जाने के बाद भी प्रशासन जुगाड़ वाहनों पर रोक नहीं लगवा पाया। जुगाड़ के वाहन जहां धड़ल्ले से सड़कों पर नियम कानून की धज्जियां उड़ा रहे हैं तो वहीं दुर्घटना को भी आमंत्रण दे रहे हैं। इसको लेकर न तो अभिभावक सतर्क हैं और न ही स्कूल संचालक इन विद्यार्थियों का जिम्मा उठाने को तैयार है। स्कूल संचालकों का कहना है कि ये वाहन स्कूल के बाहर छोड़कर जाते हैं उनके पास इन वाहनों का कोई जिम्मा नहीं है।
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आरटीए विभाग के मुताबिक बच्चों को स्कूल लाने व छोड़ने के लिए केवल बसें ही मान्य हैं। इसके बावजूद भी रिक्शा, ई-रिक्शा सहित अन्य वाहन स्कूली बच्चों को लेकर सड़कों पर दौड़ाए जा रहे हैं, जिन पर प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं कर पा रहा है वहीं प्रशासन का कहना है कि अभिभावकों द्वारा निजी तौर पर यह वाहन बच्चों की सुविधा के लिए लगाए गए हैं। उन पर कार्रवाई करने के दौरान अभिभावक बहस करने लगते हैं कि वह अपनी जिम्मेदारी पर बच्चों को भेज रहे हैं। जिला परिवहन अधिकारी राजीव प्रसाद का कहना है कि ऑटो व ई-रिक्शा से स्कूली बच्चे का स्कूल जाना गैर कानूनी है। ऐसे वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी। अभिभावकों को भी अपने बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए वाहन की फिटनेस का ध्यान कर बच्चों को भेजना चाहिए। अगर संचालकों द्वारा भी इस तरह का कोई जुगाड़ किया पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी।
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ऑटो की सवारी भी मानकों के अनुसार ही संभव : गुरनाम सिंह
ट्रैफिक पुलिस एसएचओ गुरनाम सिंह का कहना है कि किसी भी स्कूल की ओर से ई-रिक्शा या ऑटो लगाना कानून का उल्लंघन है। अगर अभिभावकों द्वारा भी बच्चों की सहूलियत के लिए ऑटो या अन्य वाहन लगाया गया है तो वह भी वाहन में उपलब्ध सीटों के मुताबिक ही बच्चों को बैठा सकता है और निर्धारित गति से ही वाहन चला सकते हैं। अन्यथा उनका भी चालान किया जाता है।
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छुट्टी के दिन जांची 45 बसें, पांच में मिली खामियां
स्कूल बसों का निरीक्षण अभियान रविवार को छुट्टी के दिन भी जारी रहा, जिसमें संयुक्त टीमों द्वारा 45 बसों का निरीक्षण किया गया। मोटर व्हीकल अधिकारी सुनील कुमार और इंस्पेक्टर महावीर चंदेल ने बताया कि करीब 40 बसें फिट पाई गईं। अन्य पांच बसाें में माइनर खामियां मिलने पर उन्हें दुरुस्त कराने के लिए कहा गया है, जिनका निरीक्षण फिर से किया जाएगा। बसों का निरीक्षण 27 बिंदुओं पर किया जा रहा है। अगर एक बिंदु से भी किसी बस में कमी पाई जा रही है ताे उसे ठीक कराकर फिर से निरीक्षण के लिए बुलाया जा रहा है।



ये कैसी जांच : कोई बनियान पहन पहुंचा तो किसी के पास दस्तावेज ही नहीं
स्कूल वाहनों के निरीक्षण को लेकर कितनी गंभीरता बरती जा रही है, यह रविवार को उस समय देखने को मिला जब सेक्टर में एक स्कूल बस में सहयोगी बनियान पहनकर ही पहुंच गया। जब अधिकारियों द्वारा फटकार लगाई गई तो उसने चुप्पी साध ली और उसे साइड में खड़ा कर दिया गया। यही नहीं कई बसों पर आपात नंबर तक नहीं लिखे थे तो कई के इंडीकेटर टूटे मिले। अधिकारियों को मौके पर ही पेंटर बुलाकर आपात नंबर तक लिखवाने पड़े। यही नहीं कई ऐसी बसें भी निरीक्षण के लिए लाई गईं, जिनके चालक व सहयोगियों के पास दस्तावेज तक नहीं थे। कई बसों के दस्तावेज बाद में मंगवाने पड़े, जिसके बाद जांच की जा सकी।
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