{"_id":"69406f17e3fbd103af062333","slug":"introduced-students-to-modern-building-design-techniques-to-suit-the-changing-climate-scenario-kurukshetra-news-c-45-1-knl1024-147015-2025-12-16","type":"story","status":"publish","title_hn":"Kurukshetra News: बदलते जलवायु परिदृश्य के अनुरूप भवन डिजाइन की आधुनिक तकनीकों से विद्यार्थियों को कराया परिचित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Kurukshetra News: बदलते जलवायु परिदृश्य के अनुरूप भवन डिजाइन की आधुनिक तकनीकों से विद्यार्थियों को कराया परिचित
Tue, 16 Dec 2025 01:57 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, कुरुक्षेत्र
Updated Tue, 16 Dec 2025 01:57 AM IST
विज्ञापन
कुरुक्षेत्र। कार्यशाला में विचार साझा करने के दौरान मुख्य वक्ता। स्वयं
कुरुक्षेत्र। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) कुरुक्षेत्र के आर्किटेक्चर एवं प्लानिंग विभाग में सोमवार को एक सप्ताह की राष्ट्रीय कार्यशाला क्लाइमेटस्मार्ट : सस्टेनेबल डिजाइन एवं एनवायरनमेंटल सिमुलेशन का शुभारंभ हुआ। कार्यशाला में देश के विभिन्न राज्यों से आए विद्यार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को बदलते जलवायु परिदृश्य के अनुरूप ऊर्जा दक्ष और पर्यावरण अनुकूल भवन डिजाइन की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना है।
विभागाध्यक्ष एवं संयोजक प्रो. एचके शर्मा ने कहा कि तेजी से बदलते जलवायु परिवेश में वास्तुकला की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। आज के समय में छात्रों को पर्यावरणीय आंकड़ों को समझकर भवनों की दिशा, आकार, छायांकन और ऊर्जा उपयोग जैसे पहलुओं पर वैज्ञानिक निर्णय लेने की आवश्यकता है। यह कार्यशाला छात्रों को यही व्यावहारिक समझ प्रदान करती है।
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को साइट और क्लाइमेट एनालिसिस, सोलर स्टडी, डे-लाइटिंग, माइक्रोक्लाइमेट, ऊर्जा प्रदर्शन मॉडलिंग, पैसिव डिजाइन सिद्धांत और कार्बन विश्लेषण जैसे महत्वपूर्ण विषयों का गहन परिचय दिया जा रहा है। प्रशिक्षण सत्रों में राइनो/ग्रासहोपर, लेडीबग, क्यूजीआईएस और ओपनस्टूडियो/एनर्जीप्लस जैसे उन्नत सॉफ्टवेयर का उपयोग के बारे में भी जानकारी दी जाएगी जिससे छात्र व्यवहारिक और उद्योग-संगत कौशल विकसित कर सकें।
विज्ञापन
कार्यक्रम में डॉ. अमित कुमार जगलान, डॉ. गरिमा सिंह और डॉ. जितेंद्र एस यादव ने अपने विचार साझा किए और कहा कि यह कार्यशाला छात्रों को सतत और ऊर्जा कुशल डिजाइन की अवधारणाओं से जोड़ने के साथ-साथ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्य करने की समझ भी विकसित करेगी। यह कार्यशाला 19 दिसंबर तक चलेगी जिसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन वक्ता अपने विचार साझा करेंगे।
विज्ञापन
विभागाध्यक्ष एवं संयोजक प्रो. एचके शर्मा ने कहा कि तेजी से बदलते जलवायु परिवेश में वास्तुकला की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है। आज के समय में छात्रों को पर्यावरणीय आंकड़ों को समझकर भवनों की दिशा, आकार, छायांकन और ऊर्जा उपयोग जैसे पहलुओं पर वैज्ञानिक निर्णय लेने की आवश्यकता है। यह कार्यशाला छात्रों को यही व्यावहारिक समझ प्रदान करती है।
विज्ञापन
कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को साइट और क्लाइमेट एनालिसिस, सोलर स्टडी, डे-लाइटिंग, माइक्रोक्लाइमेट, ऊर्जा प्रदर्शन मॉडलिंग, पैसिव डिजाइन सिद्धांत और कार्बन विश्लेषण जैसे महत्वपूर्ण विषयों का गहन परिचय दिया जा रहा है। प्रशिक्षण सत्रों में राइनो/ग्रासहोपर, लेडीबग, क्यूजीआईएस और ओपनस्टूडियो/एनर्जीप्लस जैसे उन्नत सॉफ्टवेयर का उपयोग के बारे में भी जानकारी दी जाएगी जिससे छात्र व्यवहारिक और उद्योग-संगत कौशल विकसित कर सकें।
विज्ञापन
कार्यक्रम में डॉ. अमित कुमार जगलान, डॉ. गरिमा सिंह और डॉ. जितेंद्र एस यादव ने अपने विचार साझा किए और कहा कि यह कार्यशाला छात्रों को सतत और ऊर्जा कुशल डिजाइन की अवधारणाओं से जोड़ने के साथ-साथ राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप कार्य करने की समझ भी विकसित करेगी। यह कार्यशाला 19 दिसंबर तक चलेगी जिसमें ऑनलाइन और ऑफलाइन वक्ता अपने विचार साझा करेंगे।