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Kurukshetra News: वैज्ञानिक सुविधा नॉलेज ऑन स्फीयर का उद्घाटन समारोह आज
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कुरुक्षेत्र। पैनोरमा एवं विज्ञान केंद्र में स्थापित की गई अत्याधुनिक वैज्ञानिक सुविधा नॉलेज ऑन स्फीयर का उद्घाटन समारोह वीरवार को प्रातः 11:00 बजे आयोजित किया जा रहा है। यह ऐतिहासिक अवसर विज्ञान संचार, शिक्षा और उन्नत तकनीक के क्षेत्र में नए युग की शुरुआत का प्रतीक होगा। प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर सुरेश कुमार सोनी ने बताया कि उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. शेखर सीमांडे, अध्यक्ष, गवर्निंग बॉडी, राष्ट्रीय विज्ञान संग्रहालय परिषद्, कोलकाता होंगे, जो नॉलेज ऑन स्फीयर प्रणाली का औपचारिक शुभारंभ करेंगे। डॉ. मांडे विज्ञान संचार, वैज्ञानिक प्रशासन और अनुसंधान प्रोत्साहन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान रखते हैं। उनकी उपस्थिति इस आयोजन को विशिष्ट गौरव और प्रेरणा प्रदान करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि कार्यक्रम में प्रोफेसर बीवी रमना रेड्डी, निदेशक, राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान भी शामिल होंगे।
एक ही मंच पर हो सकेगा पृथ्वी और अंतरिक्ष का वैज्ञानिक अध्ययन
सुरेश सोनी ने नॉलेज ऑन स्फीयर के संदर्भ में बताया कि यह एक क्रांतिकारी वैज्ञानिक प्रणाली है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित किया गया है। यह अत्याधुनिक गोलाकार प्रक्षेपण तकनीक उपग्रहों से प्राप्त वास्तविक वैज्ञानिक डेटा, कंप्यूटर आधारित मॉडलिंग और पृथ्वी विज्ञान से संबंधित सूचनाओं को छह फुट व्यास वाली गोलाकार स्क्रीन पर जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है।
यह प्रणाली न केवल पृथ्वी संबंधी परिवर्तनों को दिखाती है बल्कि सौरमंडल के अन्य ग्रहों- जैसे मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण और पृथ्वी के अतिरिक्त उपग्रहों और कृत्रिम उपग्रहों की कक्षाओं, सतहों और मौसमीय परिवर्तनों को भी सजीव रूप में प्रदर्शित कर सकती है। इस प्रकार यह पृथ्वी और अंतरिक्ष का वैज्ञानिक अध्ययन एक ही मंच पर उपलब्ध कराती है।
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एक ही मंच पर हो सकेगा पृथ्वी और अंतरिक्ष का वैज्ञानिक अध्ययन
सुरेश सोनी ने नॉलेज ऑन स्फीयर के संदर्भ में बताया कि यह एक क्रांतिकारी वैज्ञानिक प्रणाली है, जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विकसित किया गया है। यह अत्याधुनिक गोलाकार प्रक्षेपण तकनीक उपग्रहों से प्राप्त वास्तविक वैज्ञानिक डेटा, कंप्यूटर आधारित मॉडलिंग और पृथ्वी विज्ञान से संबंधित सूचनाओं को छह फुट व्यास वाली गोलाकार स्क्रीन पर जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है।
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यह प्रणाली न केवल पृथ्वी संबंधी परिवर्तनों को दिखाती है बल्कि सौरमंडल के अन्य ग्रहों- जैसे मंगल, बृहस्पति, शनि, अरुण, वरुण और पृथ्वी के अतिरिक्त उपग्रहों और कृत्रिम उपग्रहों की कक्षाओं, सतहों और मौसमीय परिवर्तनों को भी सजीव रूप में प्रदर्शित कर सकती है। इस प्रकार यह पृथ्वी और अंतरिक्ष का वैज्ञानिक अध्ययन एक ही मंच पर उपलब्ध कराती है।
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