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जूलॉजी में रोजगार एवं शोध की अपार संभावनाएं

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Tue, 09 Aug 2022 01:57 AM IST
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Huge opportunities for employment and research in Zoology
कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के जूलॉजी विभाग में 90 सीटों पर दाखिले के लिए इच्छुक विद्यार्थी 17 से लेकर 31 अगस्त तक ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। विभाग में एमएससी जूलॉजी और एसएससी फॉरेंसिक साइंस दो कोर्स हैं, जिसमें एमएससी जूलॉजी में 60 और फॉरेंसिक साइंस में 30 सीटें हैं। विद्यार्थी कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। जूलॉजी विभाग के अध्यक्ष और जूलोजिकल एसोसिएशन के प्रेसिडेंट डॉ. दीपक राय ने बताया कि जूलॉजी कोर्स के बाद रोजगार और शोध के क्षेत्र में अपार संभावनाएं हैं।
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पर्यावरण में बदलाव और मानव हस्तक्षेप के चलते पूरी दुनिया में जीव प्रजातियां तेजी से विलुप्त होती जा रही हैं जिन्हें बचाने के लिए वर्ल्ड वाइल्ड लाइफ फेडरेशन जैसे वैश्विक संगठनों के साथ ही केंद्र व राज्य सरकारें भी जूलॉजी विशेषज्ञों की मदद लेती है। प्राकृतिक आपदाओं, दुर्घटना या पशुओं के प्राकृतिक आवास नष्ट होने की स्थिति में एनिमल रीहैबिलिटेटर्स की सेवाएं ली जाती हैं। इनका काम जानवरों की देखभाल, बीमार जंतुओं का इलाज और ठीक होने पर उन्हें दोबारा प्राकृतिक परिवेश में छोड़ना होता है।
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उन्होंने बताया कि मेडिकल क्षेत्र में जेनेटिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी या पैरासाइट बायोलॉजी जैसी शाखाओं के छात्रों के लिए मेडिकल फॉरेंसिक विभाग, टेस्टिंटग लैब और मेडिकल रिसर्च में विकल्पों की कोई कमी नहीं है। इसके अलावा मनुष्य और पशुओं के लिए दवा निर्माण करने वाली कंपनियों के साथ जुड़कर भी अपने कॅरिअर को ऊंचाइयां दे सकते हैं। अकादमिक क्षेत्र में जूलॉजी में ग्रेजुएशन के बाद बीएड के साथ स्कूल और कोचिंग संस्थानों में पढ़ा सकते हैं। कॉलेज और यूनिवर्सिटी में पढ़ाने के लिए एमएससी के साथ नेट पास व पीएचडी करना होगा। रिसर्च में जूलॉजी में शोध की अपार संभावनाएं मौजूद हैं। देश और दुनिया की तमाम श्रेष्ठ यूनिवर्सिटीज और अनुसंधान संस्थान जूलॉजी के क्षेत्र में रिसर्च को महत्व दे रहे हैं। पर्यावरण संरक्षण से जुड़े वैश्विक संगठनों में भी जूलॉजी के रिसर्चर्स की मांग है। साथ ही कॉस्मेटिक्स, फार्मेसी और एनिमल प्रॉडक्ट्स से जुड़ी कंपनियों में रिसर्च फेलो के तौर पर अच्छा वेतन हासिल कर सकते हैं।
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विद्यार्थी वाइल्डलाइफ एजुकेटर/गाइड भी बन सकते हैं जो वनों में आने वाले पर्यटकों को जानवरों के विषय में जानकारी देने का काम करते हैं। कोर्स करने के बाद विद्यार्थी एनिमल बिहेवियरिस्ट बन सकते हैं, जिनका काम जानवरों के व्यवहार का अध्ययन करना होता है। ये लोग जानवरों के साथ काम करने वाले लोगों को भी प्रशिक्षण देते हैं जिससे वे जानवरों के साथ अच्छे से घुल मिल सकें और उन्हें समझ सकें।
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