संकरेपन की मजबूरी, मदद की व्यवस्था अधूरी
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दिवाली पर पटाखों की धूम और सामानों की खरीददारी में शहर के लोग अभी से जुट गए हैं। बाजारों में भी चहलपहल का माहौल है। इसी के साथ फायर बिग्रेड की टीम भी आग लगने की घटनाओं से निपटने के लिए तैयारी में जुट गई है। हालांकि अग्रिशमन कार्यालय में स्टाफ और संसाधनों की कमी कई वर्षों से है, लेकिन हादसों से निपटने के लिए टीम खुद को पूरी तरह से हमेशा तैयार रहने का दावा करती हैं। टीम के सामने स्टाफ और संसाधनों की कमी के साथ ही शहर में अतिक्रमण के कारण संकरी गलियां भी बड़ी चुनौती के रूप में सामने खड़ी हैं। शहर की कई गलियां इतनी संकरी और घुमावदार है कि वहां तक फायर ब्रिगेड का वाहन पहुुंचना मुश्किल हैं।
शहर का मेन बाजार और छोटा बाजार और इसके आसपास चक्रवर्ती मोहल्ला, महादेव मोहल्ला सहित शहर के कई ऐसे क्षेत्र हैं जहां गलियां काफी संकरी हैं। मेन बाजार की स्थिति तो यह है कि यहां कई बड़े-बड़े प्रतिष्ठान हैं। शहर की भीड़ दिन भर यहां खरीदी के लिए उमड़ती हैं। ऐसे में यहां की पहले से ही संकरी गलियां और ज्यादा तंग हो जाती है। यही हाल छोटा बाजार में भी कई जगह हैं। इन दोनों जगह में कई बार पैदल चलने में भी मुश्किल हो जाती है। इसी तरह चक्रवर्ती मोहल्ला और महादेव मोहल्ला में भी कई जगह संकरी गलियां हैं। जहां चौपहिया वाहनों को निकलने में भी परेशानी होती है।
बड़ी चुनौती हैं ऐसे क्षेत्र
दिवाली के समय कई जगह पटाखों के कारण आग लगने से हादसे हो चुके हैं। हालांकि अच्छी बात यह है कि कुरुक्षेत्र में ऐसा कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ है। लेकिन यदि इन क्षेत्रों में ऐसी स्थिति आने पर सबसे ज्यादा मुश्किलें फायर ब्रिगेड की टीम को उठानी पड़ेगी। इन गलियों में फायर ब्रिगेड वाहनों को घुमाने के लिए भी जगह नहीं हैं। आग बुझाने के लिए अतिरिक्त प्रबंधन भी इन क्षेत्रों में नहीं हैं। कुछ एक दुकानों में जरूर अग्रिशमन यंत्र लगे हैं, लेकिन यह बड़ी आग बुझाने के लिए नाकाफी है।
पांच वाहनों के भरोसे शहर की सुरक्षा
नगर परिषद के अंडर आने वाले दमकल विभाग में मात्र पांच फायर बिग्रेड हैं। इनमें से तीन वाटर बाउजर हैं। जिनकी क्षमता 10 हजार लीटर की हैं। जबकि दो होम क्रॉस टेंडर वाहन हैं। जिनकी क्षमता 6 हजार लीटर पानी की हैं। इन्हीं वाहनों के भरोसे शहर की आग से सुरक्षा की जाती है।
न स्टाफ पर्याप्त न संसाधन
दमकल विभाग में पांच वाहन हैं। इन वाहनों पर तीन शिफ्ट में चालकों की ड्यूटी लगाई जाती है। लेकिन विभाग के पास इस वक्त 6 ही चालक हैं। जबकि जरूरत 15 चालकों की हैं। इसी तरह फायर मेन की भी भारी कमी इस विभाग में वर्षों से हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि आग बुझाने वाले कर्मचारियों के पास सेफ्टी किट भी पर्याप्त मात्रा में नहीं हैं। फायर सेफ्टी किट के बगैर ही यह कर्मचारी जान जोखिम में डालकर आग बुझाने का काम करते हैं।
भेजी है डिमांड
दमकल अधिकारी कृष्णचंद का कहना है कि स्टाफ की कमी के बारे में आला अधिकारियों को डिमांड भेजी गई है। डीसी के जरिये यह डिमांड निदेशालय को भेजी गई हैं। जिसमें 15 चालकों और 18 फायरमैन की डिमांड की गई है। उम्मीद है जल्द ही स्टाफ की कमी दूर हो जाएगी। जहां तक तंग गलियों में आग पर काबू पाने की बात है तो हमें ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। जहां वाहन बिलकुल नहीं पहुंच पाते वहां हम सिलेंडर्स का उपयोग करते हैं। इसके बाद घटनास्थल पर मौजूद संसाधनों का उपयोग भी किया जाता है। हमारा काम आग पर काबू पाना है, जिसे हम हर हाल में करते हैं।