{"_id":"6226683dff77d14c214663ce","slug":"every-moment-was-being-cut-in-the-shadow-of-deat-kurukshetra-kurukshetra-news-knl101164213","type":"story","status":"publish","title_hn":"मौत के साए में कट रहा था एक-एक पल","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मौत के साए में कट रहा था एक-एक पल
विज्ञापन
पत्रकारों से बातचीत करती राशि भाटिया और परिजन। संवाद
- फोटो : Kurukshetra
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
संवाद न्यूज एजेंसी
शाहाबाद। यूक्रेन से रविवार सुरक्षित अपने वतन लौटी एमबीबीएस की छात्रा राशि भाटिया अपनी दास्तां सुनाते अभी भी सहम उठती है। शाहाबाद की राशि का कहना है कि यूक्रेन-रशिया के युद्ध का मंजर बड़ा ही भयानक था और एक-एक पल वहां मौत के साए में बीता है। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उन्हें बम धमाके में अपने दो प्रोफेसरों की मौत की सूचना मिली।
इस सूचना से वह बिल्कुल सहम गए और बंकरों में बैठे भी ऐसा लग रहा था कि अभी कोई मिसाइल या बम बंकर पर गिर जाएगा और वह सभी खत्म हो जाएंगे। राशि ने कहा कि उसने वापस लौटने की आस छोड़ दी थी और ऐसा लग रहा था कि वह अब कभी भी अपने परिजनों से नहीं मिल पाएगी। उस खतरनाक मंजर को याद करते हुए राशि ने बताया कि एक सप्ताह जंग के माहौल में बीता है। आकाश और धरती बम धमाकों से गूंज रहे थे। सबसे कठिन काम बॉर्डर क्रॉस करने का था, जिसके लिए उसे व उसके साथियों को करीब 40 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा।
यहां तक की बॉर्डर क्रॉस करने के लिए बस से जो सफर किया उसके लिए दस हजार की राशि खर्च करनी पड़ी। राशि ने कहा कि युद्ध के शुरूआती दिनों में वहां खाने की दिक्कत नहीं थी, लेकिन जैसे-जैसे युद्ध बढ़ता गया खाना की कमी होने लगी और बिजली भी गुल रहने लगी। एटीएम में कैश खत्म, बाजार बंद हर तरफ सन्नाटा था, जिससे वह भयभीत थे। राशि ने कहा कि एक सप्ताह के बाद जब वह बॉर्डर क्रॉस कर हंगरी पहुंचे तो उनकी जान में जान आई और उन्हें लगा कि अब वह अपने वतन लौट जाएंगे। देश के तिरंगे को ढाल बनाकर उन्होंने बॉर्डर क्रॉस किया।
विज्ञापन
राशि ने बताया कि सबसे भयानक वह रात थी जब मिसाइल के सिंबल बनाए जा रहे थे और सायरन बजा था कि आज रात हमला तेज हो सकता है। राशि के पिता राजकुमार भाटिया ने केंद्र व हरियाणा सरकार के साथ-साथ शाहाबाद प्रशासन का आभार व्यक्त किया है कि जिनके प्रयासों की बदौलत उनकी बेटी सुरक्षित अपने घर लौट सकी। इस अवसर पर अवशीष शर्मा, अनिल अरोड़ा व शेर सिंह मौजूद रहे।
विज्ञापन
शाहाबाद। यूक्रेन से रविवार सुरक्षित अपने वतन लौटी एमबीबीएस की छात्रा राशि भाटिया अपनी दास्तां सुनाते अभी भी सहम उठती है। शाहाबाद की राशि का कहना है कि यूक्रेन-रशिया के युद्ध का मंजर बड़ा ही भयानक था और एक-एक पल वहां मौत के साए में बीता है। सबसे बड़ा झटका तब लगा जब उन्हें बम धमाके में अपने दो प्रोफेसरों की मौत की सूचना मिली।
इस सूचना से वह बिल्कुल सहम गए और बंकरों में बैठे भी ऐसा लग रहा था कि अभी कोई मिसाइल या बम बंकर पर गिर जाएगा और वह सभी खत्म हो जाएंगे। राशि ने कहा कि उसने वापस लौटने की आस छोड़ दी थी और ऐसा लग रहा था कि वह अब कभी भी अपने परिजनों से नहीं मिल पाएगी। उस खतरनाक मंजर को याद करते हुए राशि ने बताया कि एक सप्ताह जंग के माहौल में बीता है। आकाश और धरती बम धमाकों से गूंज रहे थे। सबसे कठिन काम बॉर्डर क्रॉस करने का था, जिसके लिए उसे व उसके साथियों को करीब 40 किलोमीटर तक पैदल चलना पड़ा।
विज्ञापन
यहां तक की बॉर्डर क्रॉस करने के लिए बस से जो सफर किया उसके लिए दस हजार की राशि खर्च करनी पड़ी। राशि ने कहा कि युद्ध के शुरूआती दिनों में वहां खाने की दिक्कत नहीं थी, लेकिन जैसे-जैसे युद्ध बढ़ता गया खाना की कमी होने लगी और बिजली भी गुल रहने लगी। एटीएम में कैश खत्म, बाजार बंद हर तरफ सन्नाटा था, जिससे वह भयभीत थे। राशि ने कहा कि एक सप्ताह के बाद जब वह बॉर्डर क्रॉस कर हंगरी पहुंचे तो उनकी जान में जान आई और उन्हें लगा कि अब वह अपने वतन लौट जाएंगे। देश के तिरंगे को ढाल बनाकर उन्होंने बॉर्डर क्रॉस किया।
विज्ञापन
राशि ने बताया कि सबसे भयानक वह रात थी जब मिसाइल के सिंबल बनाए जा रहे थे और सायरन बजा था कि आज रात हमला तेज हो सकता है। राशि के पिता राजकुमार भाटिया ने केंद्र व हरियाणा सरकार के साथ-साथ शाहाबाद प्रशासन का आभार व्यक्त किया है कि जिनके प्रयासों की बदौलत उनकी बेटी सुरक्षित अपने घर लौट सकी। इस अवसर पर अवशीष शर्मा, अनिल अरोड़ा व शेर सिंह मौजूद रहे।