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ई-ट्रेडिंग के खिलाफ लामबंद होने लगे आढ़ती
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरूक्षेत्र
Updated Fri, 16 Sep 2016 12:56 AM IST
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ई-ट्रेडिंग के खिलाफ लामबंद होने लगे आढ़ती
- फोटो : Amar Ujala
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मार्केटिंग बोर्ड द्वारा धान खरीद के सीजन से ऑनलाइन ट्रेडिंग शुरू किए जाने का विरोध जोर पकड़ने लगा है और सरकार के इस निर्णय के खिलाफ प्रदेश भर के आढ़ती लामबंद होना शुरू हो गए है। इसी को लेकर अंबाला व कुरुक्षेत्र जिला की मंडियों के प्रधानों की एक बैठक बुधवार देर सायं जीटी रोड स्थित एक निजी होटल में हुई। जिसमें इस सिस्टम का विरोध करने के लिए रणनीति बनाई गई।
आढ़तियों के मूड़ को देखकर लगता है कि इस मुद्दे पर आढ़ती बड़े आंदोलन की ओर बढ़ रहे हैं। बैठक का आयोजन शाहाबाद नई अनाज मंडी एसोसिएशन की ओर किया गया था जिसमें कुरुक्षेत्र जिला के प्रधान अशोक कुमार गुप्ता, जिला अंबाला के प्रधान दुनी चंद, शाहाबाद मंडी के प्रधान स्वर्णजीत सिंह कालड़ा बिट्टू व चेयरमैन डॉ. प्रदीप , कुरुक्षेत्र मंडी के प्रधान दौलत राम बंसल व चौधरी अंग्रेज सिंह, पिपली मंडी के प्रधान ललित सिंगला, बाबैन मंडी के प्रधान लाभ सिंह, पिहोवा मंडी के प्रधान विनोद बंसल, इस्माईलाबाद मंडी के प्रधान नसीब सिंह, ठोल से कुलदीप सिंह, नलवी से हजूर सिंह हांडा, झांसा से जगदीश पाहवा सहित अनेक आढ़तियों ने अपने विचार रखे।
मंच का संचालन पवन बंसल ने किया। अंबाला के प्रधान दुनी चंद ने कहा कि सरकार ने आढ़तियों को बिना विश्वास में लिए ई ट्रेडिंग का ड्राफ्ट बना दिया और बिना पूरी तैयारी के ही इसे चालू कर दिया। उन्होंने बताया कि अंबाला मंडी में पंजाब के साथ लगते गांवों से भी किसान अपनी फसल लाते हैं लेकिन मार्केटिंग बोर्ड के सिस्टम में उन गांवों का डाटा ही नहीं है इस तरह उनके जे फार्म न बनने से यह सिस्टम ही फेल साबित हुआ है।
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आढ़तियों के पास न ही कंप्यूटर और न ही ओपरेटर
मंडी एसोसिएशन के प्रधान स्वर्णजीत सिंह कालड़ा ने कहा कि सरकार जबरदस्ती इस सिस्टम को आढ़तियों के ऊपर थोपना चाहती है। मंडी में कुल 280 आढ़ती हैं जिसमें अधिकांश कम पढ़े लिखे हैं और किसी के पास भी न तो कंप्यूटर है और न ही कंप्यूटर चलाने का ज्ञान। उन्होंने कहा कि यदि यही सिस्टम लागू किया गया तो सभी आढ़तियों को कंप्यूटर सिस्टम, प्रिंटर, इंटरनेट के साथ-साथ कंप्यूटर आपरेटर भी रखना होगा। उन्होंने बताया कि एक ओर तो सरकार कह रही है कि पेमेंट आढ़तियों के माध्यम से होगी वहीं दूसरी ओर किसानों के आधार कार्ड व बैंक खाता नंबर मांगे जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले सीजन में मार्केट बोर्ड द्वारा मंडी के दो हजार किसानों से पूछा गया था कि क्या वह पेमेंट डायरेक्ट अपने खाते में लेना चाहते हैं तो मात्र 20 किसानों ने इस पर सहमति जताई थी। जिससे स्पष्ट है कि किसान भी इस सिस्टम से खुश नहीं है। और यदि ऐसा किया गया तो पिछले अनेक वर्षों से चले आ रहे आढ़ती व किसानों के रिश्ते पर भी दुष्प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि ऑन लाईन खरीद के बाद उपज को भरने के लिए खाली बारदाना कहां से मिलेगा और पेमेंट कैसे होगी यह भी स्पष्ट नहीं है। दूसरा माल भेजने के बाद यदि कोई व्यापारी माल को नहीं उतरवाता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। यह भी स्पष्ट नहीं है।
नहीं हुआ कोई ट्रेनिंग सैशन
कुरुक्षेत्र जिला प्रधान अशोक गुप्ता ने बताया कि इस प्रणाली को शुरू करने से पहले आढ़तियों व मुनीमों को बिड़ डालने, गेट पास व बिल बनाने की कोइ्र भी ट्रेनिंग नहीं दी गई। इस कार्यक्रम को शुरू करने के लिए आढ़तियों का एक राज्यस्तरीय कार्यशाला कुरुक्षेत्र के एक पैलेस में हुई थी जिसमें खाद्य आपूर्ति मंत्री कर्ण देव कंबोज के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारियों ने केवल अपने भाषण ही दिए थे। आढ़तियों को ट्रेेनिंग के नाम पर कुछ भी हासिल नहीं हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस सिस्टम को चालू कर आढ़तियों को उनके कारोबार से महरूम करना चाहती है।
उन्होंने सभी प्रधानों से अपील की कि अपनी-अपनी मंडियों में आढ़तियों को लॉगईन व पासवर्ड न लेने दें ताकि यह सिस्टम चालू ही न हो सके। साथ ही अपने जिलों के आसपास लगने वाली अन्य मंडियों में जाकर वहां के आढ़तियों से भी बातचीत करें। उन्होंने बताया कि अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, करनाल, हिसार, सिरसा व फतेहाबाद की एसोसिएशनें जुड़ चुकी हैं और शेष जिलों की एसोसिएशनों से संपर्क साध कर जल्दी ही प्रदेश की एक कार्यकारिणी का गठन होगा जिसमें अगले आंदोलन की रूप रेखा बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि आढ़ती एसोसिएशन सरकार की इस आढ़ती, किसान, मुनीम व मजदूर विरोधी इस नीति को किसी कीमत पर भी शुरू नहीं होने देंगे।
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आढ़तियों के मूड़ को देखकर लगता है कि इस मुद्दे पर आढ़ती बड़े आंदोलन की ओर बढ़ रहे हैं। बैठक का आयोजन शाहाबाद नई अनाज मंडी एसोसिएशन की ओर किया गया था जिसमें कुरुक्षेत्र जिला के प्रधान अशोक कुमार गुप्ता, जिला अंबाला के प्रधान दुनी चंद, शाहाबाद मंडी के प्रधान स्वर्णजीत सिंह कालड़ा बिट्टू व चेयरमैन डॉ. प्रदीप , कुरुक्षेत्र मंडी के प्रधान दौलत राम बंसल व चौधरी अंग्रेज सिंह, पिपली मंडी के प्रधान ललित सिंगला, बाबैन मंडी के प्रधान लाभ सिंह, पिहोवा मंडी के प्रधान विनोद बंसल, इस्माईलाबाद मंडी के प्रधान नसीब सिंह, ठोल से कुलदीप सिंह, नलवी से हजूर सिंह हांडा, झांसा से जगदीश पाहवा सहित अनेक आढ़तियों ने अपने विचार रखे।
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मंच का संचालन पवन बंसल ने किया। अंबाला के प्रधान दुनी चंद ने कहा कि सरकार ने आढ़तियों को बिना विश्वास में लिए ई ट्रेडिंग का ड्राफ्ट बना दिया और बिना पूरी तैयारी के ही इसे चालू कर दिया। उन्होंने बताया कि अंबाला मंडी में पंजाब के साथ लगते गांवों से भी किसान अपनी फसल लाते हैं लेकिन मार्केटिंग बोर्ड के सिस्टम में उन गांवों का डाटा ही नहीं है इस तरह उनके जे फार्म न बनने से यह सिस्टम ही फेल साबित हुआ है।
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आढ़तियों के पास न ही कंप्यूटर और न ही ओपरेटर
मंडी एसोसिएशन के प्रधान स्वर्णजीत सिंह कालड़ा ने कहा कि सरकार जबरदस्ती इस सिस्टम को आढ़तियों के ऊपर थोपना चाहती है। मंडी में कुल 280 आढ़ती हैं जिसमें अधिकांश कम पढ़े लिखे हैं और किसी के पास भी न तो कंप्यूटर है और न ही कंप्यूटर चलाने का ज्ञान। उन्होंने कहा कि यदि यही सिस्टम लागू किया गया तो सभी आढ़तियों को कंप्यूटर सिस्टम, प्रिंटर, इंटरनेट के साथ-साथ कंप्यूटर आपरेटर भी रखना होगा। उन्होंने बताया कि एक ओर तो सरकार कह रही है कि पेमेंट आढ़तियों के माध्यम से होगी वहीं दूसरी ओर किसानों के आधार कार्ड व बैंक खाता नंबर मांगे जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले सीजन में मार्केट बोर्ड द्वारा मंडी के दो हजार किसानों से पूछा गया था कि क्या वह पेमेंट डायरेक्ट अपने खाते में लेना चाहते हैं तो मात्र 20 किसानों ने इस पर सहमति जताई थी। जिससे स्पष्ट है कि किसान भी इस सिस्टम से खुश नहीं है। और यदि ऐसा किया गया तो पिछले अनेक वर्षों से चले आ रहे आढ़ती व किसानों के रिश्ते पर भी दुष्प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने बताया कि ऑन लाईन खरीद के बाद उपज को भरने के लिए खाली बारदाना कहां से मिलेगा और पेमेंट कैसे होगी यह भी स्पष्ट नहीं है। दूसरा माल भेजने के बाद यदि कोई व्यापारी माल को नहीं उतरवाता है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। यह भी स्पष्ट नहीं है।
नहीं हुआ कोई ट्रेनिंग सैशन
कुरुक्षेत्र जिला प्रधान अशोक गुप्ता ने बताया कि इस प्रणाली को शुरू करने से पहले आढ़तियों व मुनीमों को बिड़ डालने, गेट पास व बिल बनाने की कोइ्र भी ट्रेनिंग नहीं दी गई। इस कार्यक्रम को शुरू करने के लिए आढ़तियों का एक राज्यस्तरीय कार्यशाला कुरुक्षेत्र के एक पैलेस में हुई थी जिसमें खाद्य आपूर्ति मंत्री कर्ण देव कंबोज के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारियों ने केवल अपने भाषण ही दिए थे। आढ़तियों को ट्रेेनिंग के नाम पर कुछ भी हासिल नहीं हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार इस सिस्टम को चालू कर आढ़तियों को उनके कारोबार से महरूम करना चाहती है।
उन्होंने सभी प्रधानों से अपील की कि अपनी-अपनी मंडियों में आढ़तियों को लॉगईन व पासवर्ड न लेने दें ताकि यह सिस्टम चालू ही न हो सके। साथ ही अपने जिलों के आसपास लगने वाली अन्य मंडियों में जाकर वहां के आढ़तियों से भी बातचीत करें। उन्होंने बताया कि अंबाला, कुरुक्षेत्र, यमुनानगर, करनाल, हिसार, सिरसा व फतेहाबाद की एसोसिएशनें जुड़ चुकी हैं और शेष जिलों की एसोसिएशनों से संपर्क साध कर जल्दी ही प्रदेश की एक कार्यकारिणी का गठन होगा जिसमें अगले आंदोलन की रूप रेखा बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि आढ़ती एसोसिएशन सरकार की इस आढ़ती, किसान, मुनीम व मजदूर विरोधी इस नीति को किसी कीमत पर भी शुरू नहीं होने देंगे।