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जिले की सीमाओ को पहले करें सील : रणबीर शर्मा
ब्यूरो/अमर उजाला/ कुरुक्षेत्र
Updated Mon, 04 Jan 2016 11:59 PM IST
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गुरदासपुर से पंजाब पुलिस सबक ले लेती तो पठानकोट में इस प्रकार की वारदात न होती। यह कहना है पूर्व आईजी रणबीर शर्मा का। वह रविवार को कुरुक्षेत्र में एक कार्यक्रम में शामिल होने आए थे।
इस दौरान उन्होंने अमर उजाला से खास बातचीत की। पूर्व आईजी ने कहा कि पठानकोट में इस प्रकार की घटना निंदनीय है। आतंकी पहले भी उसी रास्ते से पंजाब के गुरदासपुर में वारदात कर चुके थे। उन्हीं मंसूबों के साथ वे पठानकोट में घुसे है।
उन्होंने कह कि गुरदासपुर कांड के बाद पंजाब पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां गंभीरता से काम करतीं, तो आतंकी फिर से इस प्रकार की हरकत करने की सोच भी नहीं सकते थे। अब जब कि आतंकी पठानकोट में वारदात को अंजाम दे ही चुके हैं, तो अब ऐसी तैयारी करनी चाहिए, जिससे भविष्य में इस तरह की वारदात फिर से न हों।
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शर्मा ने कहा कि इस प्रकार की घटना हमारे प्रदेश में न हो, इसके लिए हमें स्वयं को तैयार रहने की जरूरत है। इसके लिए हमें तीन सूत्रीय योजना बनानी चाहिए। पहले सूत्र में हमें पंजाब से लगते सभी जिलों की सीमाओं को सील कर देना चाहिए।
इससे आतंकी पंजाब के रास्ते हरियाणा में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। इससे कुरुक्षेत्र भी सुरक्षित हो सकेगा। उन्होंने कहा कि दूसरे सूत्र के तहत हमें सीमाओं से नशे का कारोबार कर रहे लोगों पर भी शिकंजा कसना चाहिए। यहीं वे लोग है जो आसानी से नशे के चक्कर में आतंकियों के जाल में फंस जाते हैं।
इसके बाद वह जाने या अनजाने में इस प्रकार वारदातों में साथी बन जाते है। उन्होंने कहा कि हरियाणा की प्रदेश सरकार को जिले के साथ लगते पंजाब बार्डर पर नशे के कारोबारियों पर नकेल कसने की योजना पर काम करना चाहिए। पूर्व आईजी ने कहा कि तीसरे सूत्र के तहत यदि आतंकी जिले में घुस आते हैं, तो जिले के पिछले 10 वर्षों में विभिन्न मामलों के दोषियों और आरोपियों से गहनता से पूछताछ करनी चाहिए।
इससे एक तो उनके वर्तमान काम के बारे में पता चल जाएगा और दूसरा उनकी कमाई के साधन पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी। इससे यह भी पता चल सकेगा कि वे किसी संगठन के लिए काम कर रहे हैं या नहीं।
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इस दौरान उन्होंने अमर उजाला से खास बातचीत की। पूर्व आईजी ने कहा कि पठानकोट में इस प्रकार की घटना निंदनीय है। आतंकी पहले भी उसी रास्ते से पंजाब के गुरदासपुर में वारदात कर चुके थे। उन्हीं मंसूबों के साथ वे पठानकोट में घुसे है।
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उन्होंने कह कि गुरदासपुर कांड के बाद पंजाब पुलिस और अन्य जांच एजेंसियां गंभीरता से काम करतीं, तो आतंकी फिर से इस प्रकार की हरकत करने की सोच भी नहीं सकते थे। अब जब कि आतंकी पठानकोट में वारदात को अंजाम दे ही चुके हैं, तो अब ऐसी तैयारी करनी चाहिए, जिससे भविष्य में इस तरह की वारदात फिर से न हों।
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शर्मा ने कहा कि इस प्रकार की घटना हमारे प्रदेश में न हो, इसके लिए हमें स्वयं को तैयार रहने की जरूरत है। इसके लिए हमें तीन सूत्रीय योजना बनानी चाहिए। पहले सूत्र में हमें पंजाब से लगते सभी जिलों की सीमाओं को सील कर देना चाहिए।
इससे आतंकी पंजाब के रास्ते हरियाणा में प्रवेश नहीं कर पाएंगे। इससे कुरुक्षेत्र भी सुरक्षित हो सकेगा। उन्होंने कहा कि दूसरे सूत्र के तहत हमें सीमाओं से नशे का कारोबार कर रहे लोगों पर भी शिकंजा कसना चाहिए। यहीं वे लोग है जो आसानी से नशे के चक्कर में आतंकियों के जाल में फंस जाते हैं।
इसके बाद वह जाने या अनजाने में इस प्रकार वारदातों में साथी बन जाते है। उन्होंने कहा कि हरियाणा की प्रदेश सरकार को जिले के साथ लगते पंजाब बार्डर पर नशे के कारोबारियों पर नकेल कसने की योजना पर काम करना चाहिए। पूर्व आईजी ने कहा कि तीसरे सूत्र के तहत यदि आतंकी जिले में घुस आते हैं, तो जिले के पिछले 10 वर्षों में विभिन्न मामलों के दोषियों और आरोपियों से गहनता से पूछताछ करनी चाहिए।
इससे एक तो उनके वर्तमान काम के बारे में पता चल जाएगा और दूसरा उनकी कमाई के साधन पर आसानी से नजर रखी जा सकेगी। इससे यह भी पता चल सकेगा कि वे किसी संगठन के लिए काम कर रहे हैं या नहीं।