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नाभिकमल मंदिर के महंत ने लगाया जाट सभा पर आरोप
Updated Sat, 07 Apr 2018 12:28 AM IST
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नाभिकमल मंदिर की भूमि पर चल रहे निर्माण को जाट सभा ने रुकवाया
अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
नाभिकमल मंदिर के महंत ने जाट सभा के लोगों पर उनकी भूमि पर आकर डराने, धमकाने और तंबू उखाड़ने के अलावा मिस्त्री और मजदूरों को धमकियां देकर काम रोकने का आरोप लगाया है। मंदिर के महंत विशाल मणिदास ने इस घटना की शिकायत केयू थर्ड गेट पुलिस चौकी में दी है। पुलिस ने दोनों पक्षों की मौजूदगी में पूछताछ की और घटनास्थल का जायजा लिया। इधर चौकी प्रभारी जयकरण का कहना है कि जाट सभा के सदस्यों ने स्टे की कॉपी दी है। उन्होंने कहा कि यह कॉपी सरकारी वकील को दिखाऊंगा, ताकि पता लग सके कि आर्डर में क्या है।
चौकी प्रभारी ने बताया कि दोनों पक्षों से तीन दिन का समय मांगा गया है। वहीं महंत विशाल मणिदास का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन ने उन्हें करीब एक माह पहले कब्जा दिलाया था। जो स्टे की कॉपी दिखाई जा रही है वह पुरानी है। उसमें यह लिखा है कि इस भूमि को नाभिकमल मंदिर सभा बेच नहीं सकती। यदि वे अपनी भूमि पर निर्माण नहीं करा सकते तो प्रशासन ने उन्हें कब्जा किस अधिकार से दिलाया था। महंत के मुताबिक भूमि नाभिकमल मंदिर की है। मंदिर द्वारा आज इसकी चारदीवारी कराई जा रही थी। इस दौरान जाट सभा के सदस्यों ने जोर जबरदस्ती और ताकत के साथ उनके साथ गाली-गलौच किया और धमकियां भी दीं।
जाट सभा के प्रधान की प्रतिक्रिया
जाट सभा के प्रधान अंग्रेज सिंह ने गाली-गलौच और धमकियां देने की बात से इंकार करते हुए कहा कि जिला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 9 मार्च को नाभिकमल मंदिर की विवादित भूमि का कब्जा दिलाया था, लेकिन पुराने रिकार्ड में मालिकाना हक जता रहे कुछ लोगों ने स्थानीय कोर्ट से 12 मार्च को स्टे ले लिया था। जाट सभा के प्रधान ने बताया कि मंदिर सभा इस जमीन पर कोई निर्माण नहीं कर सकती और न ही जमीन को खुर्द-बुर्द करने का अधिकार है।
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12 मार्च को स्टे तो 6 अप्रैल को क्यों पहुंची जाट सभा
मंदिर के महंत और पदाधिकारियों का कहना है कि जब स्टे 12 मार्च को हुआ था तो जाट सभा के लोग 6 अप्रैल को काम क्यों रुकवाने आए। उन्होंने बताया कि जाट सभा ने तीन दिन पहले ही नया प्रधान अंग्रेज सिंह को बनाया है, जिन्होंने आज अन्य पदाधिकारियों और 25 लोगों के साथ मिलकर जोर जबरदस्ती की। इन्होंने जाट सभा पर सवाल उठाया कि क्या सुप्रीम कोर्ट ने बगैर मालिकाना हक के नाभिकमल मंदिर सभा को कब्जा दिलाने का आदेश दिया था।
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अमर उजाला ब्यूरो
कुरुक्षेत्र।
नाभिकमल मंदिर के महंत ने जाट सभा के लोगों पर उनकी भूमि पर आकर डराने, धमकाने और तंबू उखाड़ने के अलावा मिस्त्री और मजदूरों को धमकियां देकर काम रोकने का आरोप लगाया है। मंदिर के महंत विशाल मणिदास ने इस घटना की शिकायत केयू थर्ड गेट पुलिस चौकी में दी है। पुलिस ने दोनों पक्षों की मौजूदगी में पूछताछ की और घटनास्थल का जायजा लिया। इधर चौकी प्रभारी जयकरण का कहना है कि जाट सभा के सदस्यों ने स्टे की कॉपी दी है। उन्होंने कहा कि यह कॉपी सरकारी वकील को दिखाऊंगा, ताकि पता लग सके कि आर्डर में क्या है।
चौकी प्रभारी ने बताया कि दोनों पक्षों से तीन दिन का समय मांगा गया है। वहीं महंत विशाल मणिदास का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर जिला प्रशासन ने उन्हें करीब एक माह पहले कब्जा दिलाया था। जो स्टे की कॉपी दिखाई जा रही है वह पुरानी है। उसमें यह लिखा है कि इस भूमि को नाभिकमल मंदिर सभा बेच नहीं सकती। यदि वे अपनी भूमि पर निर्माण नहीं करा सकते तो प्रशासन ने उन्हें कब्जा किस अधिकार से दिलाया था। महंत के मुताबिक भूमि नाभिकमल मंदिर की है। मंदिर द्वारा आज इसकी चारदीवारी कराई जा रही थी। इस दौरान जाट सभा के सदस्यों ने जोर जबरदस्ती और ताकत के साथ उनके साथ गाली-गलौच किया और धमकियां भी दीं।
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जाट सभा के प्रधान की प्रतिक्रिया
जाट सभा के प्रधान अंग्रेज सिंह ने गाली-गलौच और धमकियां देने की बात से इंकार करते हुए कहा कि जिला प्रशासन ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 9 मार्च को नाभिकमल मंदिर की विवादित भूमि का कब्जा दिलाया था, लेकिन पुराने रिकार्ड में मालिकाना हक जता रहे कुछ लोगों ने स्थानीय कोर्ट से 12 मार्च को स्टे ले लिया था। जाट सभा के प्रधान ने बताया कि मंदिर सभा इस जमीन पर कोई निर्माण नहीं कर सकती और न ही जमीन को खुर्द-बुर्द करने का अधिकार है।
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12 मार्च को स्टे तो 6 अप्रैल को क्यों पहुंची जाट सभा
मंदिर के महंत और पदाधिकारियों का कहना है कि जब स्टे 12 मार्च को हुआ था तो जाट सभा के लोग 6 अप्रैल को काम क्यों रुकवाने आए। उन्होंने बताया कि जाट सभा ने तीन दिन पहले ही नया प्रधान अंग्रेज सिंह को बनाया है, जिन्होंने आज अन्य पदाधिकारियों और 25 लोगों के साथ मिलकर जोर जबरदस्ती की। इन्होंने जाट सभा पर सवाल उठाया कि क्या सुप्रीम कोर्ट ने बगैर मालिकाना हक के नाभिकमल मंदिर सभा को कब्जा दिलाने का आदेश दिया था।