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Kurukshetra News: उपभोक्ता आयोग ने टीवी मामले में कंपनी को ठहराया दोषी
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कुरुक्षेत्र। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक उपभोक्ता शिकायत में फैसला सुनाते हुए एलईडी टीवी की अतिरिक्त वारंटी बढ़ाने वाली कंपनी को दोषी ठहराया है। आयोग ने कंपनी को टीवी की मूल कीमत 36,019 रुपये और वारंटी बढ़ाने के लिए गए 5,732.25 रुपये सहित कुल राशि नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया है। साथ ही शिकायतकर्ता को 11 हजार रुपये का मुआवजा और खर्च भी दिए गए हैं।
थानेसर निवासी शिकायतकर्ता सुरभि मिश्रा ने छह अक्टूबर 2021 को फ्लिपकार्ट इंडिया लिमिटेड के माध्यम से हिसेंस कंपनी का ए73एफ सीरीज 126 सेमी एलईडी टीवी 36,019 रुपये में खरीदा था। इसके अलावा उन्होंने गो वारंटी एंड सर्विसेज एलएलपी से 5,732.25 रुपये देकर चार वर्ष की अतिरिक्त वारंटी ली थी। अगस्त 2023 में टीवी की स्क्रीन में बीच में लाइन आने की समस्या शुरू हुई। शिकायतकर्ता के पति ने कंपनी को ईमेल भेजा, लेकिन कोई संतोषजनक सेवा नहीं मिली। कंपनी ने बार-बार बहाने बनाए।
शिकायत पर आयोग ने सुनवाई की। फ्लिपकार्ट ने अपना पक्ष छोड़ दिया, जबकि हिसेंस इंडिया ने लिखित जवाब दाखिल किया। गो वारंटी कंपनी के खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की गई क्योंकि वह उपस्थित नहीं हुई। आयोग की अध्यक्ष डॉ. नीलिमा शांगला, सदस्य नीलम और रमेश कुमार ने दोनों पक्षों के साक्ष्य (दस्तावेज, हलफनामे) का अध्ययन कर फैसला सुनाते हुए कहा कि वारंटी बढ़ाने के दौरान दोष आने पर कंपनी की जिम्मेदारी बनती है। आदेश का पालन न होने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 72 के तहत सजा और जुर्माना हो सकता है।
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थानेसर निवासी शिकायतकर्ता सुरभि मिश्रा ने छह अक्टूबर 2021 को फ्लिपकार्ट इंडिया लिमिटेड के माध्यम से हिसेंस कंपनी का ए73एफ सीरीज 126 सेमी एलईडी टीवी 36,019 रुपये में खरीदा था। इसके अलावा उन्होंने गो वारंटी एंड सर्विसेज एलएलपी से 5,732.25 रुपये देकर चार वर्ष की अतिरिक्त वारंटी ली थी। अगस्त 2023 में टीवी की स्क्रीन में बीच में लाइन आने की समस्या शुरू हुई। शिकायतकर्ता के पति ने कंपनी को ईमेल भेजा, लेकिन कोई संतोषजनक सेवा नहीं मिली। कंपनी ने बार-बार बहाने बनाए।
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शिकायत पर आयोग ने सुनवाई की। फ्लिपकार्ट ने अपना पक्ष छोड़ दिया, जबकि हिसेंस इंडिया ने लिखित जवाब दाखिल किया। गो वारंटी कंपनी के खिलाफ एकतरफा कार्यवाही की गई क्योंकि वह उपस्थित नहीं हुई। आयोग की अध्यक्ष डॉ. नीलिमा शांगला, सदस्य नीलम और रमेश कुमार ने दोनों पक्षों के साक्ष्य (दस्तावेज, हलफनामे) का अध्ययन कर फैसला सुनाते हुए कहा कि वारंटी बढ़ाने के दौरान दोष आने पर कंपनी की जिम्मेदारी बनती है। आदेश का पालन न होने पर उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 72 के तहत सजा और जुर्माना हो सकता है।
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